कई दिनों से दर्द कर रहा था पेट...डॉक्टर ने किया बच्ची का अल्ट्रासाउंड, रिपोर्ट देख परिजनों के उड़ गए होश
उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग से एक बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया है. यहां एक 16 साल की नाबालिक लड़की का पेट बार-बार दर्द कर रहा था. जिसके बाद लड़की को लेकर परिजन अस्पताल पहुंचे. जहां डॉक्टरों ने बताया कि बच्ची प्रग्नेंट है. इसके बाद छात्रा ने एक बच्ची को जन्म दिया.

रुद्रप्रयाग : उत्तराखंड के शांत पहाड़ों के बीच रुद्रप्रयाग जिले से इंसानियत को शर्मसार कर देने वाली एक अत्यंत गंभीर घटना प्रकाश में आई है. यहाँ मात्र 16 साल की एक नाबालिग छात्रा, जो 9वीं कक्षा में पढ़ती है, ने एक बच्ची को जन्म दिया है. इस शर्मनाक और दर्दनाक वाकये ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है. घटना का खुलासा तब हुआ जब परिजन स्वास्थ्य संबंधी शिकायत के चलते उसे अस्पताल ले गए. फिलहाल अस्पताल प्रबंधन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए बाल कल्याण समिति को सूचित किया है.
बीमारी के बहाने हुआ बड़ा खुलासा
परिजनों को बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि उनकी मासूम बेटी इस भयावह स्थिति से गुजर रही है. छात्रा को पेट में काफी समय से दर्द की शिकायत थी, जिसे परिजन सामान्य स्वास्थ्य समस्या समझ रहे थे. उन्हें लगा कि शायद उसे पथरी (स्टोन) की समस्या है. वे उसे लेकर रुद्रप्रयाग के कई अस्पतालों के चक्कर काटते रहे ताकि उसे राहत मिल सके. जब स्थानीय अस्पतालों में सुधार नहीं हुआ, तो वे उसे श्रीनगर बेस चिकित्सालय ले गए. वहाँ के डॉक्टरों ने जब छात्रा का अल्ट्रासाउंड कराया, तो रिपोर्ट देखकर सबके होश उड़ गए और सच सामने आया.
अस्पताल में नवजात को दिया जन्म
अल्ट्रासाउंड की रिपोर्ट आने के कुछ ही समय बाद, उसी अस्पताल में छात्रा ने एक स्वस्थ नवजात कन्या को जन्म दिया. 16 साल की अल्पायु में माँ बनने का यह अनुभव उस बच्ची के लिए शारीरिक और मानसिक रूप से कितना कष्टकारी रहा होगा, इसका अंदाजा लगाना भी मुश्किल है. श्रीनगर बेस चिकित्सालय के डॉक्टरों ने बताया कि रिपोर्ट में गर्भावस्था की पुष्टि होने के बाद प्रसव की प्रक्रिया पूरी हुई. अस्पताल प्रशासन ने प्रोटोकॉल के तहत तुरंत मामले का संज्ञान लिया और सुरक्षा की दृष्टि से कदम उठाए.
परिजनों और समाज में भारी गम
इस घटना के सार्वजनिक होने के बाद नाबालिग के माता-पिता गहरे सदमे और ग्लानि में डूबे हुए हैं. जिसे वे सामान्य पेट दर्द की बीमारी समझकर अस्पताल लाए थे, वह उनके जीवन का सबसे बड़ा मानसिक आघात बन गया. समाज में भी इस घटना को लेकर काफी गुस्सा और आक्रोश देखा जा रहा है. नाबालिग छात्रा का भविष्य अब अनिश्चितता के भंवर में फंस गया है और उसकी शिक्षा पर भी सवालिया निशान लग गया है. पहाड़ी समाज में इस तरह की घटना का होना सुरक्षा पर कई गंभीर सवाल खड़े करता है.
आरोपी की पहचान अभी तक गुप्त
सबसे चिंताजनक और चुनौतीपूर्ण बात यह है कि इस घृणित अपराध को अंजाम देने वाला अपराधी अभी भी कानून की पकड़ से कोसों दूर है. सूत्रों के मुताबिक, नाबालिग छात्रा ने अभी तक उस व्यक्ति के नाम का खुलासा नहीं किया है जिसने उसके साथ यह दुष्कर्म किया था. डरी-सहमी छात्रा शायद किसी गहरे दबाव या भविष्य के डर की वजह से चुप्पी साधे हुए है. पुलिस और स्थानीय प्रशासन के लिए उस अज्ञात आरोपी तक पहुँचना अब एक बहुत बड़ी और जटिल चुनौती बन गया है.
प्रशासन और बाल कल्याण की भूमिका
अस्पताल प्रबंधन द्वारा सूचित किए जाने के बाद बाल कल्याण समिति ने अपनी सक्रियता बढ़ा दी है और मामले की निगरानी कर रही है. समिति अब छात्रा की उचित काउंसलिंग करने और उसे इस कठिन समय में मानसिक संबल देने का प्रयास करेगी. साथ ही, प्रशासन यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहा है कि पीड़िता को न्याय मिले और दोषी को कड़ी सजा दी जा सके. अभी तक इस मामले में किसी के खिलाफ भी कोई बड़ी कानूनी कार्यवाही नहीं हो पाई है, जो प्रशासन की सुस्ती को भी दर्शाता है.


