पंजाब के मुख्यमंत्री ने क्यों खत्म किया सालों पुराना ये नियम? जानिए कैसे एक लड़की के सवाल ने बदल दी पूरी व्यवस्था
पंजाब की शिक्षा नीति में एक ऐतिहासिक और क्रांतिकारी बदलाव देखने को मिला है. पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड की परीक्षाओं में अब समान अंक हासिल करने वाले विद्यार्थियों की रैंक तय करने के लिए उम्र को आधार नहीं बनाया जाएगा.

पंजाब की शिक्षा नीति में एक ऐतिहासिक और क्रांतिकारी बदलाव देखने को मिला है. पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड की परीक्षाओं में अब समान अंक हासिल करने वाले विद्यार्थियों की रैंक तय करने के लिए उम्र को आधार नहीं बनाया जाएगा. मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार ने इस दशकों पुरानी 'टाई-ब्रेकर' व्यवस्था को पूरी तरह से खत्म करने का फैसला किया है. अब से बोर्ड परीक्षाओं में बराबर अंक लाने वाले सभी छात्र-छात्राओं को एक समान रैंक दी जाएगी. इस ऐतिहासिक फैसले की सबसे खास बात यह है कि यह किसी अधिकारी के दिमाग की उपज नहीं बल्कि एक स्कूली छात्रा द्वारा सीधे मुख्यमंत्री से पूछे गए तीखे सवाल का नतीजा है.
'सितारे जमीन ते' समारोह में छात्रा ने उठाया था सवाल
यह पूरा मामला 31 मई 2026 को राज्य स्तर पर आयोजित मेधावी छात्र सम्मान समारोह 'सितारे जमीन ते' के दौरान शुरू हुआ था. इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री भगवंत मान कक्षा 8वीं, 10वीं और 12वीं के जिला टॉपर्स को सम्मानित कर रहे थे. इसी दौरान अमृतसर से आई एक छात्रा ने सीधे मुख्यमंत्री के सामने अपनी शिकायत रखी. छात्रा ने कहा, हम अमृतसर से आए हैं और एक ही कक्षा में पढ़ते हैं. बोर्ड परीक्षा में हमारे बिल्कुल बराबर अंक आए हैं. लेकिन उम्र में छोटे-बड़े होने के आधार पर हमें पहली, दूसरी और तीसरी रैंक दे दी गई. जबकि मेहनत हम तीनों ने एक बराबर की थी। छात्रा ने यह दर्द भी बयां किया कि मंच पर केवल पहली रैंक पाने वाले को ही बुलाया गया.
मुख्यमंत्री मान ने तुरंत सहमति जताते हुए कहा
छात्रा की इस तार्किक बात पर मुख्यमंत्री मान ने तुरंत सहमति जताते हुए कहा, हमारे लिए आप तीनों ही पहले स्थान पर हैं. कार्यक्रम में मौजूद आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया ने भी छात्रा के इस साहस की सराहना की कि उसने सीधे मुख्यमंत्री से कहा कि आपका सिस्टम गलत है.
रट्टा मार पढ़ाई के दिन खत्म
पंजाब के शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने इस फैसले की पुष्टि करते हुए बताया कि भविष्य में केवल रैंकिंग ही नहीं, बल्कि परीक्षा के पूरे ढांचे में बड़ा बदलाव किया जा रहा है. अब बोर्ड परीक्षाओं के प्रश्न पत्रों के पैटर्न में बदलाव होगा ताकि 'रट्टा मार' पढ़ाई को खत्म किया जा सके. आगामी परीक्षाओं में अब योग्यता-आधारित सवाल पूछे जाएंगे, जो छात्रों की याद रखने की क्षमता के बजाय उनकी वैचारिक समझ और विश्लेषणात्मक कौशल का परीक्षण करेंगे.
केरल से आगे निकला पंजाब
शिक्षा मंत्री बैंस ने इस बदलाव को शिक्षा के क्षेत्र में 'पंजाब के युग' की शुरुआत बताया है. उन्होंने कहा कि बुनियादी ढांचे में सुधार और शिक्षकों-छात्रों के सामूहिक प्रयास से आज पंजाब देश में स्कूली शिक्षा के मामले में शीर्ष पर पहुंच गया है. हाल ही में जारी नीति आयोग शिक्षा गुणवत्ता रिपोर्ट 2026 के आंकड़े बताते हैं कि पंजाब कई प्रमुख पैमानों पर केरल से भी आगे निकल गया है.
पंजाब 82 प्रतिशत पर है
कक्षा तीसरी के छात्रों में भाषा की कुशलता के मामले में पंजाब 82 प्रतिशत पर है. जबकि केरल 75 प्रतिशत पर। वहीं गणित में पंजाब के छात्र 78 प्रतिशत कुशलता के साथ केरल (70 प्रतिशत) से आगे हैं. इसके अतिरिक्त, कक्षा 9वीं के गणित विषय में पंजाब ने 52 प्रतिशत का स्कोर किया है, जबकि केरल 45 प्रतिशत पर सिमट गया है. पंजाब सरकार का यह नया फैसला छात्रों के बीच गैर-जरूरी मानसिक तनाव को दूर कर उन्हें समान अवसर देने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा.


