मेघालय में नामांकन के दौरान हिंसक झड़प, दो लोगों की मौत...इंटरनेट सेवाएं सस्पेंड, सेना तैनात
मेघालय के पश्चिम गारो हिल्स में चुनाव नामांकन को लेकर हुई जातीय हिंसा में दो लोगों की मौत हो गई है. जिला प्रशासन ने स्थिति बिगड़ते देख कर्फ्यू लगा दिया है और सुरक्षा के लिए सेना को फ्लैग मार्च के लिए बुलाया है.

शिलांग: मेघालय का शांत दिखने वाला पश्चिम गारो हिल्स जिला इन दिनों भारी तनाव और हिंसा की चपेट में है. गारो पर्वतीय स्वायत्त जिला परिषद (GHDC) के आगामी चुनावों के लिए चल रही नामांकन प्रक्रिया के दौरान जनजातीय और गैर-जनजातीय समूहों के बीच अचानक खूनी झड़पें शुरू हो गईं. स्थिति तब बेकाबू हो गई जब हिंसक भीड़ को नियंत्रित करने के लिए सुरक्षा बलों को मजबूरन गोलीबारी करनी पड़ी. जिसमें दो स्थानीय निवासियों की मौके पर ही जान चली गई. इस दुखद घटना के बाद पूरे इलाके में अनिश्चितकालीन कर्फ्यू लगा दिया गया है.
दो समुदायों के बीच नामांकन को लेकर गंभीर विवाद
आपको बता दें कि पुलिस अधीक्षक अब्राहम टी. संगमा के अनुसार, हिंसा की मुख्य घटना मंगलवार तड़के चिबिनांग इलाके में हुई. जहां दो समुदायों के बीच नामांकन को लेकर गंभीर विवाद छिड़ गया था. जब भीड़ उग्र होकर कानून-व्यवस्था को चुनौती देने लगी. तो सुरक्षा बलों ने उसे तितर-बितर करने के लिए फायरिंग की. इस दौरान गोली लगने से चिबिनांग के ही दो निवासियों की मौत हो गई. पुलिस का कहना है कि यह कार्रवाई भीड़ को हटाने के लिए की गई थी. लेकिन स्थिति काफी तनावपूर्ण हो गई.
पूर्व विधायक पर हमले से भड़की आग
इस अशांति की असली शुरुआत सोमवार को हुई थी. जब फूलबाड़ी के पूर्व विधायक एस्तामुर मोमिन अपना नामांकन पत्र दाखिल करने तुरा स्थित उपायुक्त कार्यालय पहुँचे थे. प्रदर्शनकारियों ने उनकी गाड़ी और उन पर जानलेवा हमला कर दिया. प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग यह है कि इस चुनाव में किसी भी गैर-जनजातीय व्यक्ति को भाग लेने की अनुमति नहीं मिलनी चाहिए. इसी मांग को लेकर समूहों के बीच तनाव चरम पर है. जिसने अब हिंसक रूप ले लिया है और पूरे जिले में दहशत फैल गई है.
इंटरनेट सेवाएं तत्काल प्रभाव से निलंबित
हालात की संवेदनशीलता को देखते हुए मेघालय सरकार ने पश्चिम गारो हिल्स में 48 घंटों के लिए मोबाइल इंटरनेट सेवाओं को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है. यह फैसला सोशल मीडिया पर गलत सूचनाओं और अफवाहों के प्रसार को रोकने के लिए लिया गया है. जो हिंसा भड़काने का काम कर रही थीं. अधिकारियों के अनुसार. इंटरनेट का उपयोग भीड़ जुटाने और हमले करने के लिए किया जा रहा था. हालांकि. वॉयस कॉल और एसएमएस सेवाओं को सुचारू रखा गया है ताकि लोग संपर्क कर सकें.
भारतीय सेना से मदद मांगी...
जिले के उपायुक्त विभोर अग्रवाल ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए भारतीय सेना से मदद मांगी है. उन्होंने पूर्वी कमान के अधिकारियों को पत्र लिखकर मैदानी इलाकों के गांवों में सेना द्वारा 'फ्लैग मार्च' करने का विशेष अनुरोध किया है. उपायुक्त का मानना है कि सशस्त्र बलों की मौजूदगी से स्थानीय लोगों के बीच सुरक्षा का भाव पैदा होगा और किसी भी अन्य अप्रिय घटना को रोकने में मदद मिलेगी. वर्तमान में संवेदनशील केंद्रों पर सुरक्षा के कड़े और व्यापक इंतजाम किए गए हैं.
नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 16 मार्च
जीएचएडीसी चुनावों के लिए नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 16 मार्च तय की गई है. जबकि मतदान 10 अप्रैल को होना है. इस बार स्वायत्त जिला परिषद ने एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किया है. जिसके तहत उम्मीदवारों को नामांकन पत्र दाखिल करते समय एक वैध अनुसूचित जनजाति (एसटी) प्रमाण पत्र जमा करना अनिवार्य कर दिया गया है. इसी नई शर्त और गैर-जनजातीय लोगों की भागीदारी के विरोध ने विवाद को हवा दी है. जिससे जिला प्रशासन के लिए चुनाव संपन्न कराना बड़ी चुनौती बन गया है.


