री-पोल के बाद फाल्टा सीट पर बड़ा उलटफेर, शुरुआती रुझानों में BJP उम्मीदवार हजारों वोट से आगे
पश्चिम बंगाल की फाल्टा विधानसभा सीट पर हुए दोबारा मतदान के बाद आज वोटों की गिनती हो रही है सुबह 8 बजे से मतों की गिनती कड़ी सुरक्षा के बीच शुरू हो गई है. बता दें कि 29 अप्रैल को दूसरे चरण के मतदान के दौरान इस क्षेत्र में भारी हंगामा हुआ था.

कोलकाता: पश्चिम बंगाल की फाल्टा विधानसभा सीट एक बार फिर पूरे राज्य की राजनीति का केंद्र बन गई है. दोबारा मतदान के बाद रविवार सुबह से यहां मतगणना जारी है और शुरुआती रुझानों ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया है. भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के बीच सीधी टक्कर वाली इस सीट पर पहले ही राउंड से भाजपा उम्मीदवार देवांगशू पांडा ने मजबूत बढ़त बना ली है. बताया जा रहा है कि वह शुरुआती चरण में ही 9 हजार से ज्यादा वोटों से आगे चल रहे हैं. ऐसे में फाल्टा सीट अब सिर्फ एक विधानसभा सीट नहीं, बल्कि बंगाल की बदलती राजनीति का प्रतीक बन चुकी है.
फाल्टा विधानसभा सीट पर वोटों की गिनती सुबह 8 बजे से शुरू हुई. मतगणना केंद्र के बाहर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं ताकि किसी भी तरह की गड़बड़ी न हो. सबसे पहले पोस्टल बैलेट की गिनती की गई, जिसके बाद ईवीएम खोले गए. चुनाव आयोग ने पूरी प्रक्रिया की निगरानी के लिए विशेष इंतजाम किए हैं. इस सीट पर कुल 21 राउंड में मतगणना होनी है. शुरुआती रुझानों के बाद भाजपा खेमे में उत्साह का माहौल देखा जा रहा है, जबकि तृणमूल कांग्रेस के समर्थकों में बेचैनी बढ़ती नजर आ रही है.
दोबारा मतदान क्यों कराना पड़ा?
फाल्टा सीट पर 29 अप्रैल को दूसरे चरण के दौरान मतदान हुआ था, लेकिन चुनाव के दिन भारी हंगामा और कई गंभीर शिकायतें सामने आई थीं. कई बूथों पर आरोप लगा कि ईवीएम मशीनों पर खुशबूदार पदार्थ और सेलोटेप चिपकाए गए थे. इसके अलावा वेब कैमरों की फुटेज के साथ छेड़छाड़ की कोशिश की भी बात सामने आई.
इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए चुनाव आयोग ने जांच कराई. जांच में कई अनियमितताओं के संकेत मिलने के बाद आयोग ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए सभी 285 बूथों पर फिर से मतदान कराने का फैसला किया. इसके बाद 21 मई को दोबारा वोटिंग हुई.
भाजपा उम्मीदवार की मजबूत स्थिति
मतगणना शुरू होने से पहले ही राजनीतिक जानकार भाजपा उम्मीदवार देवांगशू पांडा को मजबूत स्थिति में मान रहे थे. इसकी सबसे बड़ी वजह तृणमूल कांग्रेस उम्मीदवार जहांगीर खान का अचानक चुनावी मैदान से हटना माना जा रहा है. जहांगीर खान ने मतदान से ठीक दो दिन पहले चुनाव न लड़ने का फैसला लिया था. उन्होंने इसे व्यक्तिगत निर्णय बताया, लेकिन इस कदम ने पूरे चुनावी समीकरण को बदल दिया. इसके बाद से ही भाजपा इस सीट पर अपनी जीत को लेकर काफी आश्वस्त नजर आ रही थी.
बंगाल की राजनीति में फाल्टा सीट क्यों अहम?
फाल्टा सीट का राजनीतिक महत्व लगातार बढ़ता जा रहा है. 2021 के विधानसभा चुनाव में यहां तृणमूल कांग्रेस के शंकर कुमार नास्कर ने भाजपा उम्मीदवार बिधान परुई को 40 हजार से ज्यादा वोटों से हराया था. लेकिन 2026 के चुनावों में हालात पूरी तरह बदलते नजर आए. इस बार यहां 88.78 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जो पिछले चुनाव के मुकाबले ज्यादा रहा. इससे साफ संकेत मिला कि मतदाताओं में इस चुनाव को लेकर काफी उत्साह था. राज्य में पहले ही भाजपा ऐतिहासिक बहुमत के साथ सरकार बना चुकी है, इसलिए फाल्टा सीट का परिणाम राजनीतिक तौर पर और ज्यादा अहम हो गया है.


