तेल बचाने की अपील के पीछे क्या है बड़ा संकेत? PM मोदी से लेकर सीएम तक क्यों रट रहे एक ही बात
मध्य पूर्व संकट के बीच पीएम मोदी ने देशवासियों से तेल और ऊर्जा बचाने की अपील की, जिससे संभावित ईंधन संकट को लेकर चर्चा तेज हो गई. सरकार का कहना है कि घबराने की जरूरत नहीं, लेकिन वैश्विक हालात को देखते हुए जिम्मेदारी से ऊर्जा उपयोग करना जरूरी है.

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक अपील ने पूरे देश में नई चर्चा छेड़ दी है. रविवार शाम से सोशल मीडिया और आम जनमानस में एक ही सवाल गूंज रहा है क्या देश किसी बड़े संकट की आशंका से गुजर रहा है? इसकी वजह बनी प्रधानमंत्री की वह अपील, जिसमें उन्होंने नागरिकों से तेल और ऊर्जा की बचत करने का आग्रह किया. सिकंदराबाद की एक जनसभा में दिए गए इस संदेश के बाद लोगों के मन में कई तरह की आशंकाएं पैदा हो गई हैं.
अमेरिका, इजरायल और ईरान के बढ़ते टकराव से वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता
दरअसल, अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते टकराव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ा दी है. इस तनाव का असर कच्चे तेल और गैस की कीमतों पर साफ दिखाई दे रहा है. ऐसे माहौल में प्रधानमंत्री मोदी ने तेलंगाना के सिकंदराबाद में आयोजित कार्यक्रम के दौरान लोगों से ऊर्जा संरक्षण को राष्ट्रीय जिम्मेदारी बताते हुए सात अहम सुझाव दिए. इनमें वर्क फ्रॉम होम को बढ़ावा देना, अनावश्यक वाहन उपयोग से बचना, कार पूलिंग अपनाना और खाद्य तेल की खपत कम करना शामिल है.
प्रधानमंत्री की इस अपील को सरकार के अन्य नेताओं का भी समर्थन मिला है. केंद्रीय मंत्री अश्विणी वैष्णव ने कहा कि पश्चिम एशिया में हालात जल्द सामान्य होते नहीं दिख रहे, इसलिए देशवासियों को अभी से सतर्क रहने की जरूरत है. वहीं देवेंद्र फडणवीस ने भी नागरिकों से जिम्मेदारीपूर्वक तेल और गैस के इस्तेमाल की अपील की. उनका कहना है कि भारत फिलहाल ऊर्जा आपूर्ति के मामले में स्थिर है, लेकिन अगर खपत पर नियंत्रण नहीं रखा गया तो भविष्य में चुनौतियां बढ़ सकती हैं.
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में क्या कहा?
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि भारत खाद्य तेल और ईंधन के आयात पर बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा खर्च करता है. ऐसे में अगर हर परिवार थोड़ी-थोड़ी बचत करे, तो यह देशहित में बड़ा योगदान होगा. उन्होंने किसानों से प्राकृतिक खेती अपनाने, लोगों से सार्वजनिक परिवहन का अधिक इस्तेमाल करने और माल परिवहन में रेलवे को प्राथमिकता देने का सुझाव भी दिया. साथ ही इलेक्ट्रिक वाहनों को ऊर्जा सुरक्षा का दीर्घकालिक समाधान बताया.
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्ट्रेट होर्मुज जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में तनाव बढ़ता है, तो वैश्विक तेल बाजार पर और दबाव पड़ सकता है. इसी आशंका को देखते हुए सरकार ऊर्जा संरक्षण और आत्मनिर्भरता पर लगातार जोर दे रही है, ताकि किसी भी वैश्विक संकट का असर देश पर न्यूनतम रहे.


