संगम का इंतजार, स्नान की खुशी और दूर-दूर तक वाहनों से टकटकी लगाए बेचैन श्रद्धालु
महाकुंभ में बड़ी संख्या में श्रद्धालु जुट रहे हैं, जिससे भारी जाम की स्थिति उत्पन्न हो रही है. 8 फरवरी के बाद से प्रयागराज के बाहर और अंदर कई प्रमुख मार्गों पर लंबा जाम देखा गया है. प्रशासन को इसे नियंत्रित करने में दिक्कतें आ रही हैं. 8 फरवरी के बाद से शहर के प्रमुख राजमार्गों पर लंबा जाम देखा गया है. 9 फरवरी को लगभग 1.57 करोड़ श्रद्धालु प्रयागराज पहुंचे, जिनमें 1.47 करोड़ श्रद्धालु और 10 लाख कल्पवासी शामिल थे.

महाकुंभ में अमृत स्नान के दौरान श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ना कोई नई बात नहीं है. हालांकि, इस बार प्रयागराज में स्नान के बाद भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु जुट रहे हैं, जिससे भारी जाम की स्थिति उत्पन्न हो रही है. 8 फरवरी के बाद से प्रयागराज के बाहर और अंदर कई प्रमुख मार्गों पर लंबा जाम देखा गया है. प्रशासन को इसे नियंत्रित करने में दिक्कतें आ रही हैं. इस स्थिति का राजनीति और व्यवस्था पर क्या असर हो रहा है, यह सवाल भी उठ रहा है.
महाकुंभ में श्रद्धालुओं के पहुंचने का आंकड़ा
महाकुंभ की शुरुआत 13 जनवरी से हुई थी. अब तक करीब 28 दिन बीत चुके हैं. यूपी सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, 9 फरवरी तक महाकुंभ में 44 करोड़ श्रद्धालु संगम में डुबकी लगा चुके हैं. इसका मतलब यह हुआ कि औसतन हर दिन 1.62 करोड़ लोग स्नान करने आए हैं. इस आंकड़े में मुख्य स्नान तिथियां जैसे 14 जनवरी (मकर संक्रांति), 29 जनवरी (मौनी अमावस्या) और 3 फरवरी (बसंत पंचमी) शामिल हैं, जिनमें लाखों श्रद्धालु प्रयागराज पहुंचे. इन तीन स्नानों में ही 14 करोड़ से अधिक लोग महाकुंभ में आए हैं. इसके अलावा, अन्य दिनों में 30 करोड़ से अधिक लोग प्रयागराज में डुबकी लगाने पहुंचे हैं.
प्रयागराज में भीड़ का असर और जाम की स्थिति
प्रयागराज में हालिया दिनों में भारी जाम की स्थिति बनी हुई है. खासकर 8 फरवरी के बाद से शहर के प्रमुख राजमार्गों पर लंबा जाम देखा गया है. 9 फरवरी को लगभग 1.57 करोड़ श्रद्धालु प्रयागराज पहुंचे, जिनमें 1.47 करोड़ श्रद्धालु और 10 लाख कल्पवासी शामिल थे. इससे पहले 8 फरवरी को 1.32 करोड़ श्रद्धालु संगम पर स्नान के लिए पहुंचे थे. इस बढ़ती भीड़ के कारण यातायात की समस्या भी विकट हो गई है.
महाकुंभ में स्नान के दौरान बढ़ती भीड़
महाकुंभ के पहले 16 दिनों में दो प्रमुख शाही स्नान हुए थे और तब तक 27 करोड़ लोग संगम में डुबकी लगा चुके थे. यानी प्रतिदिन औसतन 1.68 करोड़ श्रद्धालु पहुंचे थे. इसके बाद, 30 जनवरी से 9 फरवरी तक 16 करोड़ श्रद्धालु महाकुंभ में पहुंचे. इन दिनों में बसंत पंचमी का स्नान भी था, जिसमें भीड़ अपेक्षाकृत कम रही. इसकी वजह एक दुर्घटना हो सकती है, जो 29 जनवरी को प्रयागराज मेला क्षेत्र में हुई थी. उस दिन 8 करोड़ लोग पहुंचे थे, लेकिन बाद में भगदड़ के कारण श्रद्धालुओं ने अपना दौरा स्थगित कर दिया.
भीड़ में गिरावट और प्रशासन की कार्रवाई
29 जनवरी की दुर्घटना के बाद प्रशासन ने सुरक्षा और परिवहन के इंतजामों में सुधार किया, जिससे 3 फरवरी के बाद श्रद्धालुओं का मन फिर से महाकुंभ में जाने का बना. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 5 फरवरी को प्रयागराज पहुंचे थे और उनके दौरे के बाद भीड़ की संख्या में गिरावट आई. इस दौरान प्रशासन ने सुरक्षा के सख्त इंतजाम किए थे, जिससे वीवीआईपी दर्शन के दौरान कुछ कम श्रद्धालु पहुंचे. लेकिन 6 फरवरी के बाद, प्रयागराज में फिर से श्रद्धालुओं का तांता लगना शुरू हो गया, और 9 फरवरी तक 4.5 करोड़ श्रद्धालु संगम में स्नान करने पहुंचे.
सांस्कृतिक कार्यक्रमों का प्रभाव
7 फरवरी से महाकुंभ मेला क्षेत्र में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया. इन कार्यक्रमों के कारण भीड़ में एक बार फिर वृद्धि देखी गई. इन कार्यक्रमों में देशभर की विविध संस्कृतियों को दिखाया गया, और यह भीड़ को आकर्षित करने का एक प्रमुख कारण बना. प्रशासन को फिर से भीड़ को नियंत्रित करने में समस्या आने लगी.
प्रयागराज के अंदर बढ़ती भीड़ के प्रभाव
प्रयागराज के अंदर भीड़ बढ़ने से प्रशासन के हाथ-पांव फूलने लगे हैं. संगम घाटों पर सुबह से ही भीड़ उमड़ने लगी थी. पुलिस अफसरों ने लगातार अपील की कि लोग घाट को खाली करें, ताकि किसी भी दुर्घटना से बचा जा सके. बढ़ती भीड़ के कारण संगम पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. प्रशासन बार-बार श्रद्धालुओं से अपील कर रहा था कि किसी भी असुविधा से बचने के लिए घाट खाली करें और सुरक्षित तरीके से स्नान करें.


