ईरान के बाद क्या पाकिस्तान पर होगा इजरायल का वार? बढ़ते तनाव के बीच उठा बड़ा सवाल
पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के बीच पाकिस्तान में यह आशंका बढ़ रही है कि ईरान के बाद वह भी इजरायल के निशाने पर आ सकता है. विशेषज्ञ क्षेत्रीय राजनीति, परमाणु क्षमता और बदलते सैन्य गठबंधनों को इसकी वजह मानते हैं.

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया इस समय गहरे तनाव और संघर्ष के दौर से गुजर रहा है. ईरान पर इजरायल और अमेरिका की कार्रवाई के बाद पूरे क्षेत्र में युद्ध जैसे हालात बन गए हैं. इसी बीच इजरायल की ओर से लेबनान और गाजा में भी लगातार हमले किए जा रहे हैं. इन घटनाओं के कारण पाकिस्तान में भी चिंता बढ़ गई है. वहां के कई राजनीतिक नेता और रणनीतिक विशेषज्ञ यह आशंका जता रहे हैं कि भविष्य में पाकिस्तान भी इजरायल के निशाने पर आ सकता है.
दक्षिण एशिया मामलों के शोधकर्ता अल्ताफ परवेज ने अपने एक लेख में इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की है. उनका कहना है कि पहली नजर में ईरान के बाद पाकिस्तान पर इजरायल के हमले की संभावना असामान्य लग सकती है, लेकिन इसे पूरी तरह खारिज भी नहीं किया जा सकता. उनके अनुसार अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं जैसे संयुक्त राष्ट्र और इस्लामिक सहयोग संगठन पहले जितनी प्रभावी नहीं रह गई हैं. इसके अलावा भारत और इजरायल के बीच बढ़ती नजदीकियां भी पाकिस्तान के रणनीतिक हलकों में चिंता का कारण बन रही हैं.
पाकिस्तान के नेताओं ने भी जताई आशंका
पाकिस्तान के नीति निर्माताओं और नेताओं ने भी कई बार इस तरह की आशंका जताई है. पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा मुहम्मद आसिफ ने 3 मार्च को कहा था कि अगर ईरान में इजरायल का प्रभाव बढ़ता है तो उसका असर सीधे पाकिस्तान तक पहुंच सकता है. उन्होंने यह भी कहा कि ईरान के बाद इजरायल भारत और अफगानिस्तान के साथ मिलकर पाकिस्तान को कमजोर करने की कोशिश कर सकता है. हालांकि उनके इस बयान पर कई विशेषज्ञों ने सवाल भी उठाए हैं.
परमाणु हथियार भी बनते हैं चिंता का कारण
दुनिया में कई देशों के पास परमाणु हथियार हैं और पाकिस्तान भी उनमें से एक है. इसी वजह से यह सवाल उठता है कि इजरायल को पाकिस्तान से आखिर खतरा क्यों महसूस हो सकता है. कुछ विश्लेषकों का मानना है कि इजरायल की चिंता यह है कि किसी भी मुस्लिम बहुल देश के पास परमाणु तकनीक नहीं होनी चाहिए. उनका तर्क है कि अगर एक इस्लामी देश परमाणु ताकत हासिल करता है तो अन्य देशों में भी ऐसी दौड़ शुरू हो सकती है.
‘ग्रेटर इजरायल’ की बहस
कई राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इजरायल की रणनीति क्षेत्र में अपनी सैन्य बढ़त बनाए रखने की है. कुछ लोग इसे ‘ग्रेटर इजरायल’ की अवधारणा से भी जोड़ते हैं. उनके मुताबिक इजरायल नहीं चाहता कि कोई मजबूत मुस्लिम देश उसकी रणनीति के रास्ते में खड़ा हो सके.
दूरी के बावजूद कैसे बढ़ सकता है टकराव?
पाकिस्तान और इजरायल के बीच करीब 3000 किलोमीटर की दूरी है और दोनों देशों की सीधी सीमा भी नहीं मिलती. इसलिए फिलहाल दोनों के बीच सीधा सैन्य टकराव संभव नहीं दिखाई देता. हालांकि पाकिस्तान की सीमा ईरान से लगती है. अगर भविष्य में ईरान की राजनीति में बड़ा बदलाव होता है या वहां इजरायल समर्थित सरकार बनती है तो उसका असर पाकिस्तान पर पड़ सकता है.
तुर्की और सऊदी अरब से बढ़ते रिश्ते
हाल के महीनों में पाकिस्तान ने तुर्की और सऊदी अरब के साथ अपने सैन्य और रणनीतिक संबंध मजबूत किए हैं. यह भी इजरायल के लिए चिंता का विषय माना जा रहा है. कुछ इजरायली रणनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में मुस्लिम देशों का कोई सैन्य गठबंधन बन सकता है, जिसे कई लोग अनौपचारिक रूप से “इस्लामिक नाटो” भी कहते हैं. अगर ऐसा हुआ तो इससे क्षेत्र की राजनीतिक और सैन्य समीकरण बदल सकते हैं.


