पाकिस्तान से चला फर्जी युद्ध वीडियो नेटवर्क, 31 अकाउंट से फैलाया एआई प्रोपेगेंडा, X ने किया बड़ा खुलासा

अमेरिका-ईरान संघर्ष के बीच सोशल मीडिया पर फर्जी युद्ध वीडियो की बाढ़ आ गई। जांच में पता चला कि पाकिस्तान से 31 अकाउंट चलाकर एआई से बने नकली वीडियो फैलाए जा रहे थे।

Lalit Sharma
Edited By: Lalit Sharma

अमेरिका-ईरान युद्ध के बीच सोशल मीडिया पर अजीब वीडियो फैलने लगे। कई वीडियो में मिसाइल हमले और युद्ध के दृश्य दिखाए जा रहे थे। लेकिन जांच में पता चला कि इनमें से कई वीडियो असली नहीं थे। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X ने एक बड़ा खुलासा किया है। कंपनी के मुताबिक पाकिस्तान से एक नेटवर्क चलाया जा रहा था। यह नेटवर्क एआई से बने युद्ध वीडियो पोस्ट कर रहा था। इस पूरे मामले ने सोशल मीडिया की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

कैसे पकड़ा गया 31 अकाउंट का नेटवर्क?

X के प्रोडक्ट हेड निकिता बियर ने इस मामले की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि एक व्यक्ति पाकिस्तान से 31 अकाउंट चला रहा था। इन सभी अकाउंट्स से एआई से बने युद्ध वीडियो पोस्ट किए जा रहे थे। जांच में पता चला कि ये सभी अकाउंट पहले हैक किए गए थे। बाद में इनके नाम बदल दिए गए। कई अकाउंट का नाम “Iran War Monitor” जैसा रखा गया था। इसके जरिए युद्ध से जुड़े फर्जी वीडियो तेजी से फैलाए जा रहे थे।

क्या सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही थी गलत जानकारी?

जांच में सामने आया कि इन अकाउंट्स से लगातार भ्रामक सामग्री पोस्ट की जा रही थी। कई वीडियो ऐसे थे जो असली लगते थे लेकिन पूरी तरह नकली थे। इनमें मिसाइल हमलों और सैन्य कार्रवाई के दृश्य दिखाए गए थे। कुछ वीडियो में जहाजों और शहरों पर हमले का दावा किया गया। लेकिन बाद में जांच में पता चला कि वे वीडियो एआई से बनाए गए थे। इससे लोगों में भ्रम फैल रहा था।

क्या X ने तुरंत कार्रवाई की?

X ने इन अकाउंट्स पर तुरंत कार्रवाई की। कंपनी ने सभी 31 अकाउंट हटा दिए। निकिता बियर ने कहा कि प्लेटफॉर्म अब ऐसी गतिविधियों को जल्दी पकड़ने लगा है। उन्होंने कहा कि फर्जी नेटवर्क को खत्म करने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। कंपनी का कहना है कि एआई से बने युद्ध वीडियो पर सख्ती बढ़ाई जाएगी। अगर कोई यूजर ऐसे वीडियो बिना चेतावनी के पोस्ट करेगा तो उस पर कार्रवाई होगी।

क्या युद्ध के दौरान बढ़ रहा है एआई का दुरुपयोग?

विशेषज्ञों का कहना है कि आधुनिक युद्ध में एआई का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। अब केवल हथियार ही नहीं बल्कि सूचना भी एक हथियार बन गई है। एआई की मदद से बेहद असली दिखने वाले वीडियो बनाए जा सकते हैं। आम लोग अक्सर असली और नकली वीडियो में फर्क नहीं कर पाते। यही वजह है कि ऐसे वीडियो तेजी से वायरल हो जाते हैं। इससे गलत जानकारी फैलती है।

क्या पहले भी फैल चुके हैं ऐसे फर्जी वीडियो?

यह पहला मौका नहीं है जब युद्ध के दौरान एआई वीडियो फैले हों। इससे पहले भी कई संघर्षों के दौरान ऐसा हुआ है। साल 2025 में ईरान-इजरायल संघर्ष के दौरान भी कई नकली वीडियो सामने आए थे। कुछ वीडियो में ईरानी सैन्य ताकत दिखाने का दावा किया गया था। वहीं कुछ वीडियो पुराने थे जिन्हें नए हमलों के रूप में पेश किया गया। इससे सोशल मीडिया पर भारी भ्रम पैदा हुआ था।

अब सोशल मीडिया कंपनियां क्या कर रही हैं?

फर्जी वीडियो के बढ़ते खतरे को देखते हुए सोशल मीडिया कंपनियां सतर्क हो गई हैं। X ने कहा है कि एआई से बने युद्ध वीडियो पोस्ट करने पर नए नियम लागू होंगे। अगर कोई यूजर ऐसे वीडियो को एआई बताकर पोस्ट नहीं करता तो उसे सजा मिल सकती है। अकाउंट्स को राजस्व कार्यक्रम से भी हटाया जा सकता है। सरकारें भी लोगों को चेतावनी दे रही हैं कि अपुष्ट जानकारी साझा न करें। क्योंकि डिजिटल दौर में झूठी खबर भी बड़ी आग लगा सकती है।

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