दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनी पर फिर वार, सऊदी अरब की अरामको रिफाइनरी को ड्रोन से निशाना बनाने की कोशिश
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच सऊदी अरब की सबसे बड़ी तेल रिफाइनरी फिर निशाने पर आ गई। अरामको की रास तनुरा रिफाइनरी पर ड्रोन हमले की कोशिश की खबर सामने आई।

मिडिल ईस्ट में तनाव लगातार बढ़ रहा है। इसी बीच सऊदी अरब से एक बड़ी खबर सामने आई है। दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनी अरामको फिर निशाने पर आ गई है। रास तनुरा स्थित उसकी बड़ी रिफाइनरी को ड्रोन से निशाना बनाने की कोशिश की गई। सऊदी रक्षा मंत्रालय ने इस घटना की पुष्टि की है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक ड्रोन हमला नाकाम रहा। इस हमले से कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ।
आखिर रास तनुरा रिफाइनरी इतनी अहम क्यों?
रास तनुरा सऊदी अरब की सबसे बड़ी घरेलू तेल रिफाइनरियों में गिनी जाती है। यह जगह वैश्विक तेल बाजार के लिए भी बहुत अहम है। यहां से बड़ी मात्रा में पेट्रोलियम उत्पाद तैयार होते हैं। सऊदी अरब दुनिया का सबसे बड़ा तेल निर्यातक देश है। उसके कई बड़े तेल क्षेत्र पूर्वी तट पर स्थित हैं। यह इलाका ईरान के करीब पड़ता है। इसलिए यहां सुरक्षा हमेशा बड़ी चुनौती रहती है।
क्या इससे पहले भी हुआ था हमला?
इसी सप्ताह की शुरुआत में भी यहां हमला हुआ था। उस समय आत्मघाती ड्रोन का इस्तेमाल किया गया था। रिपोर्ट के मुताबिक वह ड्रोन शाहेद-136 जैसा था। हमले के बाद रिफाइनरी के कुछ हिस्सों में आग लग गई थी। सुरक्षा कारणों से अरामको को कुछ यूनिट अस्थायी तौर पर बंद करनी पड़ी। हालांकि आग को जल्द ही काबू में कर लिया गया। इसके बावजूद यह घटना क्षेत्र में बढ़ते खतरे का संकेत मानी गई।
क्या तेल आपूर्ति पर पड़ा असर?
हमले के बाद अरामको ने कुछ एहतियाती कदम उठाए थे। कंपनी ने एलपीजी यानी द्रवीकृत पेट्रोलियम गैस के निर्यात को कुछ समय के लिए रोक दिया था। हालांकि स्थानीय बाजार में सप्लाई सामान्य बनी रही। कंपनी ने कहा कि घरेलू जरूरतों को प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा। इसके साथ ही निर्यात के लिए वैकल्पिक रास्तों पर भी विचार किया जा रहा है।
क्या होर्मुज जलडमरूमध्य बना नया मोर्चा?
ईरान और उसके सहयोगी देशों के बीच तनाव अब समुद्री रास्तों तक पहुंच गया है। ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य के पास टैंकरों को निशाना बनाने की चेतावनी दी है। यह जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में गिना जाता है। यहां से दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत तेल और गैस गुजरती है। इसलिए इस इलाके में किसी भी टकराव का असर पूरी दुनिया पर पड़ सकता है।
क्या तेल के दाम तेजी से बढ़ रहे?
इस संघर्ष का असर अब अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी दिखने लगा है। तेल की कीमतों में तेजी दर्ज की गई है। ब्रेंट क्रूड की कीमत बढ़कर करीब 82 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। यह पिछले एक साल से ज्यादा समय का ऊंचा स्तर है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर तनाव बढ़ता है तो कीमतें और ऊपर जा सकती हैं।
क्या मिडिल ईस्ट में बढ़ेगा संकट?
अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद ईरान की जवाबी कार्रवाई तेज हो गई है। ड्रोन और मिसाइल हमलों से पूरे क्षेत्र में तनाव फैल गया है। सऊदी अरब समेत कई खाड़ी देश सतर्क हो गए हैं। दुनिया की नजर अब इस टकराव पर टिकी है। क्योंकि तेल बाजार में हलचल का असर हर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। आने वाले दिनों में हालात और बदल सकते हैं।


