Ex-RAW chief Vikram Sood: पूर्व रॉ (RAW) प्रमुख विक्रम सूद ने हाल ही में अमेरिका और पाकिस्तान के बीच बढ़ते हुए संबंधों के पीछे की सच्चाई का खुलासा किया. विक्रम सूद के अनुसार, ये रिश्ता भारत के 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान संघर्ष विराम में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कथित भूमिका को भारत द्वारा अस्वीकार करने के कारण और मजबूत हुआ है. उन्होंने कहा कि यह सब ट्रंप की व्यक्तिगत नाराजगी का नतीजा है, क्योंकि भारत ने उन्हें युद्धविराम का श्रेय देने से साफ इंकार कर दिया था.
विक्रम सूद ने डीप स्टेट की भूमिका पर भी रोशनी डाली और बताया कि अमेरिका की यह गुप्त शक्ति भारत की तेज आर्थिक प्रगति को रोकने के लिए काम कर रही है. उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिकी प्रयास केवल भारत को आर्थिक रूप से कमजोर बनाए रखने पर केंद्रित हैं, ना कि किसी राष्ट्रवादी एजेंडे पर.
सूद ने दिए साक्षात्कार में कहा कि यह सब ट्रंप की व्यक्तिगत नाराजगी से शुरू हुआ. जब भारत ने उन्हें युद्धविराम का श्रेय देने से इनकार किया, तो पाकिस्तानी नेता उनके सामने घुटनों पर गिर पड़े और कहा कि धन्यवाद, मेरे स्वामी. आप नोबेल पुरस्कार के योग्य हैं. यही डीप स्टेट की चालबाजी है. वे भारत को कभी आर्थिक रूप से मजबूत नहीं होने देंगे.
उन्होंने आगे कहा कि अमेरिका भारत की तेज आर्थिक प्रगति को लेकर चिंतित है. अब भारत और चीन विश्व की दो सबसे बड़ी आर्थिक महाशक्तियां बन चुकी हैं. सूद ने जोर देकर कहा कि इसमें कोई राष्ट्रवादी मंशा नहीं है, बल्कि वास्तविक चिंता यह है कि चीन एक प्रमुख आर्थिक शक्ति बन चुका है और भारत दूसरी.
सूद ने बताया कि डीप स्टेट शब्द की उत्पत्ति तुर्की से हुई थी, जब वहां खुफिया एजेंसी, सेना और एक प्रमुख अधिकारी एक कार दुर्घटना में मारे गए. उनके साथ एक ड्रग तस्कर भी था, जिसके पास नकदी, नशीले पदार्थ और हथियारों का भंडार था. उन्होंने कहा कि डीप स्टेट अब केवल सेना या खुफिया एजेंसी नहीं है. इसमें कॉर्पोरेट जगत, सैन्य-खुफिया तंत्र और अन्य प्रभावशाली समूह शामिल हैं, जो गुप्त रूप से सत्ता की डोर संभालते हैं.
सूद ने अमेरिकी हथियार निर्माता कंपनियों की भूमिका पर भी प्रकाश डाला. उनका कहना था कि अमेरिका की विदेश नीति केवल वाइट हाउस या कांग्रेस द्वारा नहीं तय होती. हथियार बनाने वाली कंपनियां भी सरकार पर दबाव डालती हैं और अपने हित सुरक्षित करती हैं.
सूद ने पाकिस्तान को 'बनाना रिपब्लिक' बताया और उसके सेना प्रमुख को 'जिहादी जनरल' करार दिया. उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी सेना के अधिकारी वैचारिक होते हैं और दूसरों पर शासन करने की लालसा रखते हैं. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि आसिम मुनीर एक इस्लामी जिहादी जनरल हैं. 'हिंदू और मुसलमान एक साथ नहीं रह सकते' – क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि कोई भारतीय जनरल ऐसा कहे? कभी नहीं. हमारे अधिकारी पेशेवर हैं, वैचारिक नहीं. उनकी सफलता का पैमाना जमीन हासिल करना है.
First Updated : Thursday, 02 October 2025