मिडिल ईस्ट संकट के बीच ट्रंप का बड़ा खुलासा, ईरान के साथ बातचीत टूटने की खबरों को बताया झूठ
अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु वार्ता को लेकर जारी अटकलों के बीच डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा बयान दिया है. इसके साथ ही उन्होंने मिडिल ईस्ट के हालात और हालिया कूटनीतिक प्रयासों को लेकर भी महत्वपूर्ण संकेत दिए हैं.

नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर चल रही बातचीत को लेकर पिछले कुछ दिनों से कई तरह की अटकलें लगाई जा रही थीं. कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि दोनों देशों के बीच वार्ता पूरी तरह ठप हो गई है और अब किसी समझौते की संभावना नहीं बची है. हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है. डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत खत्म होने की खबरें पूरी तरह गलत हैं.
उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में दोनों पक्षों के बीच लगातार संपर्क बना हुआ है और विभिन्न स्तरों पर चर्चा जारी है. ट्रंप ने अपने संदेश में कहा कि चार दिन पहले भी बातचीत हुई थी, तीन दिन पहले भी संपर्क बना था और उसके बाद भी दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच संवाद जारी रहा. उन्होंने स्पष्ट किया कि आज भी इस विषय पर चर्चा हुई है. ट्रंप के इस बयान से यह साफ संकेत मिला है कि पर्दे के पीछे कूटनीतिक प्रयास अभी भी जारी हैं.
ईरान को समझौते के लिए दिया संदेश
अपने बयान में ट्रंप ने ईरान को लेकर सख्त रुख भी अपनाया. उन्होंने कहा कि यह मुद्दा काफी लंबे समय से अटका हुआ है और अब इसे किसी निष्कर्ष तक पहुंचाने की जरूरत है. उनके मुताबिक, दोनों पक्षों को किसी न किसी दिशा में आगे बढ़ना होगा ताकि अनिश्चितता की स्थिति खत्म हो सके.
ट्रंप ने कहा कि बातचीत का अंतिम परिणाम क्या होगा, यह अभी कहना मुश्किल है, लेकिन अमेरिका चाहता है कि यह मामला लंबे समय तक अधर में न रहे. उन्होंने यह भी संकेत दिया कि वॉशिंगटन समझौते के लिए तैयार है, लेकिन इसके लिए ईरान को भी सकारात्मक कदम उठाने होंगे.
क्षेत्रीय तनाव के बीच आया बयान
ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब मिडिल ईस्ट में हालात पहले से ही तनावपूर्ण बने हुए हैं. हाल ही में इजरायल और लेबनान के बीच बढ़े सैन्य तनाव के बाद ईरान ने वार्ता प्रक्रिया को लेकर कड़ा रुख अपनाया था. क्षेत्र में बढ़ती सैन्य गतिविधियों और राजनीतिक बयानबाजी के कारण यह आशंका जताई जा रही थी कि अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक संवाद पूरी तरह समाप्त हो सकता है. लेकिन ट्रंप के ताजा बयान ने इन आशंकाओं को काफी हद तक कम कर दिया है.
नेतन्याहू और हिजबुल्लाह प्रतिनिधियों से भी की बातचीत
क्षेत्र में शांति बनाए रखने की कोशिशों के तहत ट्रंप ने सोमवार को इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और हिजबुल्लाह से जुड़े प्रतिनिधियों से भी बातचीत की. बताया गया कि इस दौरान उन्होंने दोनों पक्षों से संघर्ष कम करने और गोलीबारी रोकने की अपील की. रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रंप ने नेतन्याहू से बेरूत पर बड़े स्तर के हमले से बचने का अनुरोध किया. इसके बाद इजरायली सेना ने कुछ सैन्य गतिविधियों को सीमित करने का फैसला लिया. ट्रंप ने इस पहल पर संतोष जताते हुए सोशल मीडिया पर नेतन्याहू का धन्यवाद भी किया.
परमाणु मुद्दे से आगे बढ़कर क्षेत्रीय स्थिरता का सवाल
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत केवल परमाणु कार्यक्रम तक सीमित नहीं है. इसका संबंध क्षेत्रीय सुरक्षा, समुद्री व्यापार, आर्थिक प्रतिबंधों और पश्चिम एशिया की स्थिरता से भी जुड़ा हुआ है. राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, ट्रंप का बयान एक ऐसी रणनीति का हिस्सा हो सकता है जिसमें एक तरफ ईरान पर दबाव बनाए रखा जाए और दूसरी तरफ बातचीत का रास्ता भी खुला रखा जाए. यदि आने वाले समय में दोनों देशों के बीच कोई सकारात्मक समझौता होता है, तो इसका असर पूरे मिडिल ईस्ट क्षेत्र पर पड़ सकता है.


