Artemis-II Mission: 50 साल बाद नासा की चंद्रमा की ओर ऐतिहासिक वापसी, चार अंतरिक्ष यात्री रवाना
नासा ने 50 से अधिक वर्षों बाद एक बार फिर मानव को चंद्रमा की ओर भेजकर इतिहास रच दिया है. आर्टेमिस-II मिशन के तहत चार अंतरिक्ष यात्री गहरे अंतरिक्ष की इस अहम यात्रा पर निकले हैं, जो भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों के लिए नई दिशा तय करेगा.

नई दिल्ली: पांच दशकों से अधिक समय के लंबे अंतराल के बाद, मानव ने एक बार फिर चंद्रमा की ओर कदम बढ़ाया है. गुरुवार सुबह चार अंतरिक्ष यात्रियों ने उड़ान भरी, जो गहरे अंतरिक्ष में मानव मिशनों की वापसी का प्रतीक बन गई है.
नासा का ओरियन अंतरिक्ष यान, स्पेस लॉन्च सिस्टम (SLS) रॉकेट पर सवार होकर फ्लोरिडा स्थित कैनेडी स्पेस सेंटर से सफलतापूर्वक प्रक्षेपित हुआ. आर्टेमिस-II मिशन नासा का 50 वर्षों में पहला मानवयुक्त चंद्र मिशन है, जो अंतरिक्ष अन्वेषण के नए युग की शुरुआत कर रहा है.
शानदार लॉन्च: मिशन की शुरुआत
एसएलएस, जिसे अब तक के सबसे शक्तिशाली रॉकेटों में गिना जाता है, ने भारतीय समयानुसार सुबह 4:04 बजे उड़ान भरी. ओरियन कैप्सूल में सवार चारों अंतरिक्ष यात्री सुरक्षित रूप से अंतरिक्ष की ओर रवाना हुए.
लॉन्च के लगभग आठ मिनट बाद, ओरियन कैप्सूल रॉकेट से अलग हो गया और अपनी निर्धारित कक्षा में पहुंच गया.
पहले दिन की योजना और तैयारियां
प्रक्षेपण के बाद मिशन के पहले दिन अंतरिक्ष यात्री पृथ्वी की कक्षा में ही रहेंगे. इस दौरान वे अंतरिक्ष यान की प्रमुख प्रणालियों जैसे प्रणोदन, नेविगेशन और जीवन-सहायता तंत्र की जांच करेंगे.
इंजीनियर और मिशन कंट्रोल टीम यह सुनिश्चित करेंगे कि सभी सिस्टम सुचारू रूप से काम कर रहे हैं, ताकि चंद्रमा की ओर सुरक्षित यात्रा की जा सके. इसी दौरान एक महत्वपूर्ण पेरिजी-रेजिंग बर्न भी किया जाएगा, जिससे अंतरिक्ष यान की दिशा और गति नियंत्रित रहे.
अंतरिक्ष यात्रियों की दिनचर्या
अंतरिक्ष यान के भीतर अंतरिक्ष यात्री अपने लॉन्च सूट हटाकर सामान्य कपड़ों में आ जाते हैं और आवश्यक सुविधाओं को व्यवस्थित करते हैं. इसमें पानी की आपूर्ति, शौचालय, कार्बन डाइऑक्साइड नियंत्रण और सुरक्षा उपकरण शामिल हैं.
वे केबिन को रहने और काम करने के लिए अनुकूल बनाते हैं, साथ ही सोने की व्यवस्था भी तैयार करते हैं. सीमित जगह के कारण चालक दल दो अलग-अलग शिफ्टों में विश्राम करेगा.
चंद्रमा तक पहुंचने की प्रक्रिया
आर्टेमिस-II के प्रक्षेपण के लगभग चार दिन बाद चंद्रमा के पास पहुंचने की संभावना है. यह अंतरिक्ष यान एक विशेष मार्ग अपनाएगा, जो अंतरिक्ष में 8 के आकार जैसा होगा.
दूसरे दिन होने वाले ट्रांस-लूनर इंजेक्शन (TLI) बर्न के बाद ओरियन पृथ्वी की कक्षा से बाहर निकलकर चंद्रमा की ओर बढ़ेगा. इस दौरान चालक दल लगातार यान की प्रणालियों पर नजर रखेगा और आवश्यक डेटा एकत्र करेगा.
वापसी की योजना
चंद्रमा के पास पहुंचने पर ओरियन उसकी कक्षा में प्रवेश नहीं करेगा, बल्कि उसके गुरुत्वाकर्षण का उपयोग करते हुए एक फ्लाईबाई करेगा और फिर पृथ्वी की ओर लौट आएगा.
इस दौरान अंतरिक्ष यान अपने मार्ग को सटीक बनाए रखने के लिए छोटे-छोटे सुधार भी करेगा.
इतिहास रचता विविधतापूर्ण दल
आर्टेमिस-II मिशन केवल तकनीकी उपलब्धि ही नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव का भी प्रतीक है. इस मिशन में पहली बार एक महिला, एक अश्वेत व्यक्ति और एक कनाडाई अंतरिक्ष यात्री शामिल हैं.
क्रिस्टीना कोच चंद्रमा की यात्रा करने वाली पहली महिला बनेंगी. वहीं विक्टर ग्लोवर इस मिशन में शामिल पहले अश्वेत अंतरिक्ष यात्री हैं. कनाडा के जेरेमी हैनसेन नासा के बाहर के पहले अंतरिक्ष यात्री हैं जो इस मिशन का हिस्सा हैं.
मिशन की कमान रीड वाइजमैन के हाथों में है, जो अपने अनुभव के साथ इस ऐतिहासिक दल का नेतृत्व कर रहे हैं.
क्यों खास है आर्टेमिस-II मिशन?
यह मिशन 1972 के बाद पहला मानवयुक्त चंद्र मिशन है और नासा की भविष्य की योजनाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है. इसकी सफलता आने वाले आर्टेमिस मिशनों और मंगल ग्रह की यात्रा की दिशा तय करेगी.
यह मिशन अंतरिक्ष यात्रियों को पृथ्वी की निचली कक्षा से बाहर गहरे अंतरिक्ष में ले जाएगा, जहां उन्हें विकिरण, लंबे अलगाव और संचार में देरी जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा.
नासा के लिए यह जरूरी है कि ओरियन अंतरिक्ष यान की सभी प्रणालियां इन परिस्थितियों में सही ढंग से काम करें, ताकि भविष्य में सुरक्षित चंद्र लैंडिंग संभव हो सके.


