बकरीद पर राणे का बड़ा वार, ‘ड्राई होली बोलने वाले अब क्यों चुप?’ 'वर्चुअल बकरा काटने' वाले बयान पर भड़के मुस्लिम संगठन

नितेश राणे ने बकरीद पर “वर्चुअल कुर्बानी” का सुझाव देकर नया विवाद खड़ा कर दिया, जिस पर मुस्लिम संगठनों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है. वहीं, महाराष्ट्र में कुर्बानी और सार्वजनिक बलि को लेकर पहले से सख्ती के बीच यह बयान राजनीतिक बहस का मुद्दा बन गया है.

Suraj Mishra
Edited By: Suraj Mishra

मुंबई: नितेश राणे के बकरीद को लेकर दिए गए बयान के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है. बकरीद यानी Eid al-Adha पर पशु कुर्बानी को लेकर चल रही बहस के बीच महाराष्ट्र सरकार के मंत्री नितेश राणे ने 'वर्चुअल कुर्बानी' का सुझाव देकर राजनीतिक और धार्मिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है.

सार्वजनिक स्थानों पर पशु बलि को लेकर सख्ती

दरअसल, महाराष्ट्र में मुंबई समेत कई इलाकों में सार्वजनिक स्थानों पर पशु बलि को लेकर सख्ती की गई है. राज्य में गाय की कुर्बानी पर पहले से प्रतिबंध लागू है. इसी मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए नितेश राणे ने कहा कि जिस तरह हिंदू त्योहारों के दौरान लोगों को “ड्राई होली” खेलने और दिवाली पर पटाखे न जलाने की सलाह दी जाती है, उसी तरह बकरीद पर भी लोगों को कंप्यूटर पर बकरे की तस्वीर लगाकर “वर्चुअल कुर्बानी” करने की सलाह दी जानी चाहिए.

राणे ने अपने बयान में कहा कि हिंदू त्योहारों के समय पर्यावरण और नियमों की बात करने वाले लोग बकरीद पर ऐसी सलाह देने से बचते हैं. उन्होंने दावा किया कि कुछ लोग सिर्फ हिंदू त्योहारों पर ही नियम और पर्यावरण का मुद्दा उठाते हैं. राणे ने वीर सावरकर का जिक्र करते हुए कहा कि हिंदुओं को बाहरी खतरे से ज्यादा अपने ही लोगों से चुनौती मिलती है.

महाराष्ट्र के कई इलाकों में आयोजित कार्यक्रमों में राणे ने हिंदू समाज से एकजुट रहने की अपील भी की. उन्होंने कहा कि समाज की सुरक्षा और न्याय सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है और राज्य सरकार इस दिशा में काम कर रही है.

वहीं, राणे के इस बयान पर मुस्लिम संगठनों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है. शहाबुद्दीन रज़वी बरेलवी ने मंत्री के बयान की आलोचना करते हुए कहा कि इस्लाम एक व्यवहारिक धर्म है और धार्मिक परंपराओं को समझे बिना इस तरह के बयान देना गलत है. उन्होंने आरोप लगाया कि मंत्री इस्लामी रीति-रिवाजों और मदरसों के बारे में सही जानकारी नहीं रखते.

मदरसों को लेकर विवादित टिप्पणी 

गौरतलब है कि नितेश राणे ने अपने भाषण में मदरसों को लेकर भी विवादित टिप्पणी की थी. उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ मदरसे शिक्षा के बजाय कट्टरपंथ को बढ़ावा दे रहे हैं. उनके इन बयानों के बाद राजनीतिक माहौल और गरमा गया है. विपक्षी दलों और कई सामाजिक संगठनों ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देना शुरू कर दिया है.

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