पद्म विभूषण से सम्मानित हुए धर्मेंद्र, समारोह में भावुक हुई हेमा मालिनी और अहाना देओल
दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र को देश के दूसरे सबसे बड़े नागरिक सम्मान 'पद्म विभूषण' से नवाजा गया है. राष्ट्रपति भवन के ऐतिहासिक दरबार हॉल में आयोजित भव्य पद्म पुरस्कार समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने यह सम्मान प्रदान किया.

नई दिल्ली: भारतीय सिनेमा के 'ही-मैन' और करोड़ों दिलों की धड़कन रहे दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र को देश के दूसरे सबसे बड़े नागरिक सम्मान 'पद्म विभूषण' से मरणोपरांत नवाजा गया है. राष्ट्रपति भवन के ऐतिहासिक दरबार हॉल में आयोजित भव्य पद्म पुरस्कार समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने यह सम्मान प्रदान किया.
हेमा मालिनी की आखें नम
धर्मेंद्र की ओर से उनकी जीवनसंगिनी और वरिष्ठ अभिनेत्री हेमा मालिनी ने नम आंखों के साथ इस सर्वोच्च सम्मान को ग्रहण किया. इस ऐतिहासिक लेकिन बेहद भावुक कर देने वाले क्षण के दौरान हेमा मालिनी के साथ दिल्ली पहुंचीं उनकी छोटी बेटी अहाना देओल भी अपने आंसुओं को रोक नहीं पाई. सिनेमा जगत के छह दशकों के सफर को राष्ट्र द्वारा दी गई इस ऐतिहासिक स्वीकृति ने पूरे माहौल को अत्यंत संवेदनशील बना दिया.
हेमा मालिनी ने अपने जज्बातों को साझा किया
इस गौरवमयी समारोह से ठीक पहले मीडिया से हुई एक बेहद निजी और भावनात्मक बातचीत में हेमा मालिनी ने अपने दिल के जज्बातों को साझा किया. उन्होंने देश के प्रति धर्मेंद्र के असाधारण योगदान को याद करते हुए कहा धर्मजी को देश का दूसरा सबसे बड़ा नागरिक पुरस्कार दिया गया है.
गौरव का अवसर
वे सचमुच इस सम्मान के हकदार हैं. यह पहचान शायद उन्हें बहुत पहले ही मिल जानी चाहिए थी. लेकिन कोई बात नहीं, जब भी मिली यह हमारे लिए अत्यंत गर्व का विषय है. मैं खुद को सौभाग्यशाली मानती हूं कि उनकी अनुपस्थिति में मुझे उनकी तरफ से यह गौरव प्राप्त करने का अवसर मिला. हेमा मालिनी ने भावुक होते हुए आगे कहा कि धर्मजी केवल एक महान अभिनेता ही नहीं बल्कि वे भारतीय सिनेमा की एक जीवंत संस्था थे.
भारत की सांस्कृतिक आत्मा के प्रतीक
छह दशकों से अधिक लंबे फिल्मी करियर में धर्मेंद्र ने अपनी सादगी, गरिमा और अद्वितीय अभिनय के दम पर देश के सांस्कृतिक ताने-बाने में अपनी एक अमिट पहचान बनाई थी. हेमा मालिनी के अनुसार धर्मेंद्र की लोकप्रियता केवल उनकी ब्लॉकबस्टर फिल्मों या स्क्रीन प्रेजेंस के कारण नहीं थी बल्कि उन मानवीय मूल्यों के कारण थी जो वे असल जिंदगी में जीते थे.
कई यादगार पल
वे कहती हैं अपनी कला और अभिनय से परे वे असल मायनों में भारत की आत्मा, उसकी परंपरा और सच्ची मानवता का प्रतिनिधित्व करते थे. मुझे गर्व है कि मैं कई यादगार और ऐतिहासिक फिल्मों में उनकी सह-कलाकार रही और बाद में उनके जीवन के सफर में उनकी अर्धांगिनी बनी.
खट्टा-मीठा पल
धर्मेंद्र के बिना गुजरे पिछले छह महीनों के अकेलेपन और शून्यता को बयां करते हुए हेमा मालिनी का गला भर आया. उन्होंने एक समर्पित पति, स्नेहिल पिता और प्यारे दादा के रूप में धर्मेंद्र के पारिवारिक स्वरूप को याद किया. उन्होंने कहा, घर का कोना-कोना उनकी जादुई और प्यारी मौजूदगी से महकता था.
छह महीने का अकेलापन
अचानक उनका चले जाना और उनके बिना जिंदगी की कल्पना करना आज भी नामुमकिन सा लगता है. राष्ट्रपति भवन जाने से पहले मुझे पता था कि यह पल मेरे लिए बहुत 'खट्टा-मीठा' होने वाला है. एक तरफ जहां उनके छह दशकों की कड़ी मेहनत को मिला यह मुकाम रोमांचित करता है. वहीं दूसरी तरफ उनकी भौतिक गैर-मौजूदगी दिल को गहरी तकलीफ देती है.


