ट्रंप के 'पसंदीदा फील्ड मार्शल' आसिम मुनीर पर उठे सवाल, ईरान से संबंधों को लेकर बढ़ी अमेरिकी चिंता

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा जनरल आसिम मुनीर को "पसंदीदा फील्ड मार्शल" कहे जाने के बीच उनके ईरान से कथित संबंधों ने अमेरिकी सुरक्षा तंत्र में चिंता बढ़ा दी है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन रिश्तों को संभावित रणनीतिक जोखिम के तौर पर देखा जा रहा है.

Yogita Pandey
Edited By: Yogita Pandey

नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर के प्रति दिखाई गई सार्वजनिक नजदीकी अब अमेरिकी सुरक्षा तंत्र के भीतर बहस का विषय बन गई है. ट्रंप द्वारा उन्हें अपना "पसंदीदा फील्ड मार्शल" कहे जाने के बाद जहां राजनीतिक संदेश गया, वहीं दूसरी ओर उनके ईरान से कथित संबंधों ने नई चिंताओं को जन्म दिया है.

मीडिया रिपोर्ट्स और खुफिया सूत्रों के हवाले से सामने आई जानकारी के अनुसार, अमेरिकी अधिकारी और क्षेत्रीय विश्लेषक इन रिश्तों को संभावित खतरे के रूप में देख रहे हैं. खासतौर पर इस बात को लेकर चिंता है कि मुनीर को वाशिंगटन और तेहरान के बीच एक गुप्त संपर्क कड़ी के तौर पर देखा जा रहा है.

गुप्त मध्यस्थ की भूमिका पर उठे सवाल

रिपोर्ट्स के मुताबिक, जनरल आसिम मुनीर वाशिंगटन और तेहरान के बीच एक अहम गुप्त मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं. हालांकि, उनकी इस भूमिका पर सवाल इसलिए उठ रहे हैं क्योंकि ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उनके कथित पुराने संबंधों की चर्चा हो रही है.

ईरानी सैन्य नेतृत्व से कथित नजदीकी

सेवानिवृत्त पाकिस्तानी जनरल अहमद सईद ने फॉक्स न्यूज डिजिटल को बताया कि मुनीर के ईरान के प्रमुख सैन्य अधिकारियों के साथ व्यक्तिगत संबंध रहे हैं. इनमें कुद्स फोर्स के दिवंगत कमांडर कासिम सुलेमानी और आईआरजीसी कमांडर हुसैन सलामी जैसे नाम शामिल हैं. इन संबंधों को लेकर कुछ अमेरिकी अधिकारियों ने संदेह जताया है कि उनकी दोहरी पहुंच रणनीतिक जोखिम पैदा कर सकती है.

पुराने अनुभवों से जुड़ी वर्तमान चिंताएं

अमेरिकी नीति निर्माताओं के बीच उठ रही यह चिंता कोई नई नहीं है, बल्कि इसका आधार पाकिस्तान की क्षेत्रीय भूमिका को लेकर पहले से मौजूद संदेह हैं. खासकर अफगानिस्तान संघर्ष के दौरान पाकिस्तान की भूमिका को लेकर अमेरिका में लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं.

आलोचकों का कहना है कि इस्लामाबाद ने एक ओर जहां अमेरिका से सहायता प्राप्त की, वहीं दूसरी ओर तालिबान से जुड़े नेटवर्क के प्रति नरम रुख अपनाया या उन्हें बढ़ावा दिया. इसी पृष्ठभूमि में मौजूदा हालात का मूल्यांकन किया जा रहा है.

विशेषज्ञों की चेतावनी

फाउंडेशन फॉर डिफेंस ऑफ डेमोक्रेसीज (एफडीडी) के विश्लेषकों, जिनमें वरिष्ठ फेलो बिल रोगियो भी शामिल हैं, ने पाकिस्तान के सैन्य ढांचे को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी है. उनका मानना है कि क्षेत्रीय समीकरणों और पिछले अनुभवों को देखते हुए किसी भी भूमिका का आकलन सतर्कता के साथ किया जाना चाहिए.

रोगियो ने यह भी कहा कि अमेरिका-ईरान संबंधों में संभावित मध्यस्थ के रूप में पाकिस्तान की भूमिका जरूरी नहीं कि अमेरिकी रणनीतिक हितों के अनुरूप हो, बल्कि इससे जटिलताएं और बढ़ सकती हैं.

कूटनीति और जोखिम के बीच संतुलन की चुनौती

अमेरिकी नीति निर्माताओं के सामने फिलहाल एक जटिल स्थिति है. एक ओर राष्ट्रपति ट्रंप और जनरल मुनीर के बीच व्यक्तिगत समीकरण हैं, वहीं दूसरी ओर खुफिया रिपोर्ट्स से सामने आई चिंताएं भी हैं, जो पाकिस्तान के ईरान से संबंधों को लेकर सवाल खड़े करती हैं.

मध्य पूर्व और दक्षिण एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच यह बहस जारी है कि क्या मुनीर एक प्रभावी कूटनीतिक माध्यम साबित होंगे या फिर अमेरिका के लिए एक रणनीतिक जोखिम बन सकते हैं.

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