समुद्री केबलों की सुरक्षा: NATO ने उठाए बड़े कदम, जहाज, ड्रोन और AI का इस्तेमाल
नाटो ने बाल्टिक सागर में समुद्र के नीचे बिछी केबलों की सुरक्षा के लिए हाई-टेक मिशन लॉन्च किया है. रूस पर शक है, लेकिन पक्के सबूत नहीं. एआई और समुद्री ड्रोन्स के साथ, नाटो हर हरकत पर नजर रख रहा है. क्या ये सब किसी बड़े हाइब्रिड हमले की ओर इशारा है? जानिए पूरी कहानी और इसके पीछे छिपे राज!

Battle of the Cables: क्रिसमस की सुबह एस्टोनिया के पावर ग्रिड ऑपरेटरों को बड़ा झटका लगा. फिनलैंड और एस्टोनिया को जोड़ने वाली एस्टलिंक 2 पावर केबल अचानक खराब हो गई. इससे एस्टोनिया की विद्युत आपूर्ति में भारी गिरावट आई और बिजली का प्रवाह लगभग दो-तिहाई तक कम हो गया. हालांकि, रिजर्व क्षमता के चलते सेवाओं पर ज्यादा असर नहीं पड़ा, लेकिन ऊर्जा की कीमतों में इज़ाफ़े का डर सताने लगा.
फिनलैंड में पकड़ा गया संदिग्ध जहाज
अगले ही दिन फिनलैंड ने ईगल एस नाम के जहाज को हिरासत में लिया. यह जहाज रूस से तुर्की की ओर तेल लेकर जा रहा था. अधिकारियों का कहना है कि यह जहाज पावर केबल के ऊपर से गुजरा और अपने लंगर को घसीटते हुए केबल को नुकसान पहुंचा गया.
नाटो ने दिखाई फुर्ती, युद्धपोतों की तैनाती
इस घटना के तुरंत बाद, नाटो ने तेजी से कार्रवाई करते हुए बाल्टिक सागर में युद्धपोतों और निगरानी मिशन शुरू कर दिए. बाल्टिक सेंट्री नाम के इस मिशन का उद्देश्य समुद्री बुनियादी ढांचे की सुरक्षा सुनिश्चित करना है. नाटो महासचिव मार्क रूटे ने इसे “महत्वपूर्ण समुद्री संरचनाओं के लिए बढ़ता खतरा” करार दिया.
रूस पर शक, लेकिन सबूत की कमी
हालांकि रूस ने इन घटनाओं में अपनी किसी भी तरह की भागीदारी से इनकार किया है, लेकिन एस्टोनिया के रक्षा मंत्री हनो पेवकुर का मानना है कि इसमें रूस के छाया बेड़े (shadow fleet) का हाथ हो सकता है. उनका कहना है कि ये जहाज न केवल सुरक्षा बल्कि पर्यावरण के लिए भी खतरनाक हैं.
स्वीडन और लातविया में भी संदिग्ध घटनाएं
स्वीडिश अधिकारियों ने भी हाल ही में एक जहाज को जब्त किया है, जिस पर समुद्री केबल को नुकसान पहुंचाने का शक है. इस बीच, नाटो ने समुद्र के नीचे बिछाई गई असुरक्षित इंटरनेट और पावर केबलों की सुरक्षा के लिए एआई और समुद्री ड्रोन का सहारा लिया है.
समुद्री ड्रोन और एआई: सुरक्षा का भविष्य
नाटो के इस मिशन में समुद्री ड्रोन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का इस्तेमाल किया जा रहा है. एआई की मदद से समुद्र के नीचे के “जीवन के पैटर्न” का अध्ययन किया जा रहा है, जिससे संदिग्ध गतिविधियों पर तुरंत नजर रखी जा सके. 2022 में हुए नॉर्ड स्ट्रीम पाइपलाइन हमलों के बाद से ही समुद्री केबलों की सुरक्षा नाटो के लिए प्राथमिकता बन गई है.
विद्युत कटौती का वैश्विक प्रभाव
बाल्टिक सागर के नीचे बिछाई गई ये केबलें न केवल इंटरनेट बल्कि वैश्विक व्यापार का भी अहम हिस्सा हैं. यदि इनपर हमला होता है, तो इसके दूरगामी परिणाम हो सकते हैं.
क्या रूस पर लगेगा आरोप?
नाटो और बाल्टिक सेंट्री के अधिकारी रूस को दोषी ठहराने से पहले पुख्ता सबूत जुटाने की कोशिश कर रहे हैं. हालांकि, एस्टोनिया के मंत्री पेवकुर का कहना है कि रूस के पास इस तरह की घटनाओं का इतिहास है. समुद्री ड्रोन और एआई के माध्यम से नाटो इस चुनौती का सामना करने के लिए तैयार है. लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ऐसे हमले बढ़ते हैं, तो यह स्थिति तनावपूर्ण युद्ध में बदल सकती है.


