मिसाइलों के धमाकों के बीच उड़ी नेतन्याहू की मौत की खबर, सोशल मीडिया पर तूफान लेकिन सरकार और मीडिया की चुप्प

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की मौत की अफवाह अचानक सोशल मीडिया पर फैल गई। लेकिन अब तक किसी सरकार या भरोसेमंद मीडिया ने इसकी पुष्टि नहीं की है।

Lalit Sharma
Edited By: Lalit Sharma

सोशल मीडिया पर एक खबर तेजी से दौड़ रही है। कहा जा रहा है कि इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की मौत हो गई। कई पोस्ट में दावा किया गया कि ईरान के हमले में उनकी जान गई। वीडियो और तस्वीरें भी शेयर की जा रही हैं। लोग उन्हें असली बताकर आगे बढ़ा रहे हैं। कुछ ही घंटों में यह खबर कई देशों तक पहुंच गई। भारत में भी लाखों लोगों ने इसे देखा। लेकिन अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।

सोशल मीडिया पर कैसे फैली कहानी?

कई सोशल मीडिया अकाउंट ने धमाकों के वीडियो पोस्ट किए। इन वीडियो के साथ लिखा गया कि यह हमला इजराइल पर हुआ। कुछ पोस्ट में कहा गया कि सरकारी इमारतों को निशाना बनाया गया। साथ में यह भी लिखा गया कि उसी हमले में नेतन्याहू मारे गए। वीडियो देखने में डरावने लगते हैं। मिसाइल और धमाकों के दृश्य दिखते हैं। लेकिन जांच में पता चला कि कई वीडियो पुराने हैं। कुछ क्लिप पहले के युद्धों से जुड़े हुए हैं।

क्या दूसरे नेताओं के नाम भी आए?

यह अफवाह सिर्फ नेतन्याहू तक सीमित नहीं रही। कुछ पोस्ट में उनके भाई इड्डो नेतन्याहू का नाम भी जोड़ दिया गया। कुछ में इजराइल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन गवीर का भी जिक्र आया। कहा गया कि वे भी कथित हमले में मारे गए। इन पोस्ट को भी खूब शेयर किया गया। लोगों ने बिना जांच किए इन्हें आगे भेज दिया। लेकिन इन दावों की भी कहीं पुष्टि नहीं हुई। न सरकार ने कुछ कहा। न किसी बड़े मीडिया ने इसे सच बताया।

सरकार और मीडिया क्या कहते?

इजराइल सरकार की तरफ से ऐसी कोई घोषणा नहीं हुई। दुनिया के बड़े न्यूज चैनलों ने भी इस खबर की पुष्टि नहीं की। अगर किसी देश के प्रधानमंत्री के साथ ऐसा कुछ होता है। तो पूरी दुनिया में तुरंत खबर चलती है। लेकिन अभी तक ऐसा कुछ नहीं हुआ। इसका मतलब साफ है कि मामला संदिग्ध है। अधिकतर विशेषज्ञ इसे अफवाह मान रहे हैं। इसलिए आधिकारिक जानकारी का इंतजार जरूरी है।

युद्ध के समय अफवाहें क्यों फैलती?

जब युद्ध या तनाव बढ़ता है तो अफवाहें भी तेजी से फैलती हैं। लोग डर और गुस्से में खबरें जल्दी शेयर कर देते हैं। सोशल मीडिया का एल्गोरिदम भी सनसनीखेज खबरों को आगे बढ़ाता है। जितनी चौंकाने वाली बात होगी उतनी जल्दी फैलती है। यही कारण है कि कई बार झूठ सच से तेज दौड़ता है। खासकर अंतरराष्ट्रीय संघर्ष में ऐसा बार-बार देखा गया है। इसलिए सावधानी बहुत जरूरी हो जाती है।

नेतन्याहू की हाल की गतिविधि?

कुछ दिन पहले नेतन्याहू एक सरकारी बैठक में दिखाई दिए थे। वह राष्ट्रीय स्वास्थ्य कमांड सेंटर पहुंचे थे। उनके साथ स्वास्थ्य मंत्री हाइम काट्ज भी मौजूद थे। वहां उन्हें स्वास्थ्य व्यवस्था की जानकारी दी गई। यह बैठक एक सैन्य अभियान के दौरान हुई थी। इसका मतलब है कि हाल तक वे सक्रिय थे। इसलिए अचानक मौत की खबर और भी संदिग्ध लगती है। फिलहाल उनकी मौत का कोई आधिकारिक रिकॉर्ड नहीं है।

लोगों को क्या सावधानी रखनी?

फैक्ट-चेक करने वाले विशेषज्ञ लोगों को चेतावनी दे रहे हैं। वे कहते हैं कि सोशल मीडिया की हर खबर सच नहीं होती। किसी भी बड़ी खबर को शेयर करने से पहले जांच जरूरी है। सरकारी बयान और भरोसेमंद मीडिया पर भरोसा करना चाहिए। खासकर युद्ध के समय झूठी खबरें हथियार बन जाती हैं। इसलिए समझदारी यही है कि जल्दबाजी में विश्वास न किया जाए। अभी तक नेतन्याहू की मौत सिर्फ अफवाह ही मानी जा रही है।

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