बलूचिस्तान: पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में शनिवार को हुए घातक हमले को दशकों तक याद रखा जाएगा. कई जिलों पर एक ही वक्त पर हुए आत्मघाती हमलों ने पूरे देश को दहला दिया है. बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) ने इसे दशकों का सबसे बड़ा और घातक ऑपरेशन बताया है. इस हमले ने केवल पाकिस्तान ही नहीं, बल्कि उसके सहयोगी देशों की भी चिंताएं बढ़ा दी है.
बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) ने अपने इस अभियान को 'ऑपरेशन हेरोफ-2' नाम दिया है, जिसका मतलब है 'काला तूफान'. BLA ने इससे पहले 2024 में ‘हेरोफ-1’ चलाया गया था, लेकिन इस बार अभियान में हमले का दायरा ज्यादा बड़ा रहा. इस हमले के तहत पुलिस, सेना और अर्धसैनिक ठिकानों सहित आम नागरिकों को निशाना बनाया गया.
कई जिलों में एक साथ हमले
क्वेटा, पंजगुर, केच, ग्वादर, नुश्की, मस्तुंग, कलात सहित अन्य कई इलाकों में एक-साथ गोलीबारी, बम धमाके और आत्मघाती हमले किए गए. मस्तुंग में जेल पर हमला कर लगभग 30 कैदियों को छुड़ाया गया. वहीं, ग्वादर में भी मजदूरों के कैंप पर हमले में महिलाओं और बच्चों समेत 11 लोगों की जान गई. वहीं, अलग-अलग पक्षों द्वारा मारे गए नागरिकोंं और BLA लड़ाकों के आंकड़े भी अलग बताए जा रहे हैं. सरकार द्वारा की गई पुष्टि और BLA द्वारा किए गए दावों में बड़ा अंतर है.
चीन-अमेरिका के लिए भी चेतावनी?
विदेश नीति विशेषज्ञों का मानना है कि ये हमला केवल पाकिस्तान के लिए, बल्कि अमेरिका और चीन के लिए भी एक चेतावनी है. इस क्षेत्र में पाकिस्तान के सहयोगी देशों के बड़े रणनीतिक और आर्थिक हित जुड़े हुए हैं. बलूचिस्तान प्राकृतिक गैस, तांबा, सोना और दुर्लभ खनिजों से समृद्ध है.
विदेश नीति विशेषज्ञ माइकल कुगेलमैन ने सोशल मीडिया पर लिखा, "आज बलूचिस्तान में हुए हमले उन सभी के लिए चेतावनी हैं, खासकर व्हाइट हाउस में बैठे लोगों के लिए, जो पाकिस्तान के क्रिटिकल मिनरल्स में निवेश करना चाहते हैं. BLA की सबसे बड़ी शिकायत बाहरी शक्तियों द्वारा स्थानीय संसाधनों का दोहन करना है."
क्यों अहम है बलूचिस्तान?
बलूचिस्तान क्षेत्रफल के लिहाज से पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत है, जिसकी सीमा ईरान और अफगानिस्तान से लगती है. अरब सागर तक पहुंच होने के कारण चीन और अमेरिका की इस इलाके पर नजर बनी हुई है. इस क्षेत्र में स्थित ग्वादर बंदरगाह, चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) का केंद्र. वहीं, अमेरिका ने भी हाल ही में खनन परियोजनाओं के लिए बलूचिस्तान के रेको दिक इलाके में 1.25 अरब डॉलर के निवेश की घोषणा की है.
1948 से जारी बलूच विद्रोह
1948 से जारी बलूच विद्रोह समय के साथ अपने सबसे उग्र चरण में पहुंच चुका है. हाल के दिनों में हुए BLA द्वारा विदेशी परियोजनाओं को निशाना बनाने की घटनाएं बढ़ती जा रही है. BLA का कहना है कि बलूचिस्तान के संसाधनों का शोषण हो रहा है, लेकिन स्थानीय आबादी को उसका कोई लाभ नहीं मिल रहा है. First Updated : Monday, 02 February 2026