ईरान संग टकराव बना ट्रंप के लिए बड़ी चुनौती, अर्थव्यवस्था और राजनीति पर दिखने लगा असर

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर अब सीधे अमेरिका पर पड़ रहा है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में रुकावट के कारण ईंधन की कीमतें बढ़ी हैं, जिससे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने आर्थिक और राजनीतिक चुनौती खड़ी हो गई है.

Yogita Pandey
Edited By: Yogita Pandey

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और युद्ध का प्रभाव अब सीधे अमेरिका की अर्थव्यवस्था और सियासत पर नजर आने लगा है. ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही बाधित करने से वैश्विक ऊर्जा संकट गहराता जा रहा है, जिसका असर अमेरिका में ईंधन की कीमतों पर साफ दिखाई दे रहा है.

अमेरिका में डीजल की कीमत 5 डॉलर प्रति गैलन के पार पहुंच गई है, जिससे महंगाई बढ़ने की आशंका तेज हो गई है. यह स्थिति अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए बड़ी राजनीतिक चुनौती बनती जा रही है, क्योंकि इसका असर आगामी चुनावों में उनकी रिपब्लिकन पार्टी के प्रदर्शन पर पड़ सकता है.

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज: वैश्विक तेल आपूर्ति की जीवनरेखा

होरमुज़ जलडमरू मध्य ईरान और ओमान के बीच स्थित एक बेहद अहम समुद्री मार्ग है, जो फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है. दुनिया का लगभग 20-22% कच्चा तेल और पेट्रोलियम उत्पाद इसी रास्ते से गुजरता है, जबकि करीब 20-25% एलएनजी की आपूर्ति भी यहीं से होती है.

भले ही अमेरिका इस मार्ग से सीधे ज्यादा तेल आयात नहीं करता, लेकिन इसकी रुकावट से अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें बढ़ जाती हैं, जिसका असर वैश्विक स्तर पर पड़ता है.

ईरान की प्रतिक्रिया ने बढ़ाई मुश्किलें

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने पहले से ही मिसाइलें तैनात कर रखी थीं और हमले की स्थिति में खाड़ी क्षेत्र के देशों को निशाना बनाने की तैयारी कर ली थी. शुरुआती हमलों के बाद यह माना जा रहा था कि ईरान कमजोर पड़ जाएगा, लेकिन हाल के हफ्तों में उसकी जवाबी कार्रवाई ने हालात को और जटिल बना दिया है.

कतर, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और बहरीन जैसे देशों पर हमलों ने पूरे पश्चिम एशिया को अस्थिर कर दिया है.

ट्रंप के बयान पर उठे सवाल

डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में कहा कि उन्हें उम्मीद नहीं थी कि ईरान इस तरह से जवाब देगा. उनके इस बयान ने कई सवाल खड़े कर दिए, क्योंकि खुफिया एजेंसियां पहले ही ईरान की संभावित प्रतिक्रिया को लेकर चेतावनी दे चुकी थीं.

नाटो सहयोगियों पर नाराजगी

ट्रंप ने नाटो को "एकतरफा व्यवस्था" बताते हुए आरोप लगाया कि अमेरिका अपने सहयोगियों की सुरक्षा पर भारी खर्च करता है, लेकिन जरूरत के समय वे साथ नहीं देते. उन्होंने कहा कि अमेरिका को किसी की मदद की आवश्यकता नहीं है और वह अकेले ही हालात संभाल सकता है.

सहयोगियों ने युद्ध से बनाई दूरी

ट्रंप ने ब्रिटेन और फ्रांस सहित अन्य नाटो देशों से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खुला रखने के लिए सैन्य सहयोग मांगा था, लेकिन अधिकांश देशों ने इस संघर्ष में शामिल होने से इनकार कर दिया. उन्होंने अमेरिका और ईरान से तनाव कम करने और कूटनीतिक समाधान अपनाने की अपील की.

मैक्रों पर भी साधा निशाना

नाटो सहयोगियों के रुख से नाराज ट्रंप ने इमैनुएल मैक्रों पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि वह जल्द ही सत्ता से बाहर हो सकते हैं.

करीबी सहयोगी का इस्तीफा

नेशनल काउंटरटेररिज्म सेंटर के डायरेक्टर जो केंट ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया. उन्होंने कहा कि ईरान से अमेरिका को कोई खतरा नहीं था और सैन्य कार्रवाई को गलत बताया.

ट्रंप ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह अच्छा हुआ.

मध्य पूर्वी देशों का समर्थन और चीन पर नरमी

कतर ने कतर, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब और बहरीन से मिले समर्थन की सराहना की. वहीं, चीन को लेकर उन्होंने नरम रुख अपनाते हुए कहा कि दोनों देशों के संबंध अच्छे हैं और इससे आर्थिक लाभ हुआ है.

गहराता संकट, बढ़ती चुनौती

होर्मुज संकट ने न केवल वैश्विक ऊर्जा बाजार को प्रभावित किया है, बल्कि अमेरिका के भीतर भी इसके राजनीतिक और आर्थिक असर स्पष्ट रूप से दिखने लगे हैं. ट्रंप के बयानों और जमीनी हालात के बीच का अंतर इस पूरे घटनाक्रम को और जटिल बना रहा है.

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