डेडलाइन करीब, हमले और बातचीत के बीच फंसा फैसला... क्या ईरान हमले को टालेंगे ट्रंप?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को सख्त चेतावनी देते हुए डेडलाइन तय की है. समझौता न होने पर हमले की आशंका है, हालांकि बातचीत जारी है और अंतिम फैसला हालात पर निर्भर करेगा.

Shraddha Mishra

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच हालात बेहद संवेदनशील हो गए हैं. दुनिया की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या टकराव बढ़ेगा या बातचीत के जरिए समाधान निकलेगा. इसी बीच अमेरिका की ओर से दिए गए सख्त बयान ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है.

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर कड़ा रुख अपनाया है. उन्होंने साफ कहा है कि अगर तय समय सीमा तक कोई समझौता नहीं होता या स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए नहीं खोला जाता, तो गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं. ट्रंप ने मंगलवार शाम 8 बजे (ईस्टर्न टाइम) तक की डेडलाइन दी है और इसे अंतिम बताया है.

हमले की चेतावनी से बढ़ा तनाव

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ट्रंप ने बेहद सख्त भाषा का इस्तेमाल करते हुए कहा कि अगर ईरान ने उनकी शर्तें नहीं मानीं, तो देश के अहम ढांचे को निशाना बनाया जा सकता है. उन्होंने यहां तक कहा कि बिजली संयंत्र और पुल जैसे महत्वपूर्ण संसाधन नष्ट किए जा सकते हैं. इस तरह के बयान से वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ गई है.

हालांकि, सख्त चेतावनी के बीच बातचीत की संभावना भी बनी हुई है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, अगर ट्रंप को लगता है कि बातचीत सकारात्मक दिशा में बढ़ रही है, तो वे सैन्य कार्रवाई को टाल सकते हैं. इसका मतलब है कि अंतिम फैसला पूरी तरह उनके आकलन पर निर्भर करेगा.

संभावित हमले की तैयारी

सूत्रों के अनुसार, अमेरिका और इजरायल मिलकर ईरान के ऊर्जा ढांचे पर बड़े स्तर पर हमले की तैयारी कर चुके हैं. इस संभावित अभियान को “इंफ्रास्ट्रक्चर डे” नाम दिया गया है. बताया जा रहा है कि इस योजना पर उच्च स्तर पर चर्चा चल रही है और जरूरत पड़ने पर इसे तुरंत लागू किया जा सकता है.

इस पूरे मामले में अमेरिका पर उसके सहयोगी देशों का भी दबाव है. इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू समेत कई क्षेत्रीय नेता चाहते हैं कि ईरान पर सख्ती बरती जाए और बिना ठोस रियायत के कोई समझौता न किया जाए. इसके अलावा सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात भी इसी रुख का समर्थन कर रहे हैं.

ट्रंप की धमकी वाली पोस्ट को शेयर करते हुए जिम्बाब्वे में ईरानी दूतावास ने लिखा- 'रात के 8 बजे का समय उतना अच्छा नहीं है. क्या आप इसे बदलकर दोपहर 1 से 2 बजे के बीच, या अगर मुमकिन हो तो, रात 1 से 2 बजे के बीच कर सकते हैं? इस जरूरी मामले पर ध्यान देने के लिए आपका धन्यवाद. I.E.Z.'

बातचीत की उम्मीद अभी बाकी

दूसरी ओर, ट्रंप प्रशासन के कुछ वरिष्ठ अधिकारी मानते हैं कि अगर बातचीत सही दिशा में जाती है, तो समझौते की संभावना बन सकती है. ट्रंप ने भी संकेत दिया है कि ईरान के साथ बातचीत जारी है और वह सकारात्मक हो सकती है. इससे यह साफ होता है कि अभी स्थिति पूरी तरह एकतरफा नहीं है.

ताजा खबरें

ट्रेंडिंग वीडियो