कोहिनूर हीरे की वापसी पर फिर उठी आवाज, ममदानी बोले राजा चार्ल्स से करेंगे आग्रह
न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी ने कोहिनूर हीरे की वापसी को लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि यदि मौका मिला तो वह राजा चार्ल्स तृतीय से इस मुद्दे पर व्यक्तिगत रूप से बात करेंगे.

नई दिल्ली: न्यूयॉर्क शहर के मेयर ज़ोहरान ममदानी ने बुधवार को एक बार फिर कोहिनूर हीरे की वापसी का मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि यदि उन्हें अवसर मिला तो वह ब्रिटेन के सम्राट राजा चार्ल्स तृतीय से व्यक्तिगत रूप से मिलकर इस ऐतिहासिक हीरे को भारत को लौटाने की अपील करेंगे. यह बयान ऐसे समय आया है जब राजा चार्ल्स अपनी अमेरिका यात्रा पर हैं.
11 सितंबर हमलों के पीड़ितों की स्मृति में आयोजित कार्यक्रम से पहले हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में ममदानी ने स्पष्ट किया कि यह मुद्दा आधिकारिक एजेंडे में शामिल नहीं है, लेकिन निजी बातचीत का मौका मिलने पर वह इसे जरूर उठाना चाहेंगे. उनके इस बयान ने लंबे समय से चल रही कोहिनूर की वापसी की बहस को फिर से चर्चा में ला दिया है.
प्रेस कॉन्फ्रेंस में क्या बोले ममदानी
भारतीय मूल के नेता ज़ोहरान ममदानी ने कहा, "अगर मुझे राजा से अलग से बात करने का मौका मिले, तो मैं शायद उन्हें कोहिनूर हीरा लौटाने के लिए प्रोत्साहित करूंगा."
उन्होंने यह टिप्पणी न्यूयॉर्क में ब्रिटिश सम्राट से संभावित मुलाकात से कुछ घंटे पहले की.
9/11 स्मारक कार्यक्रम में मुलाकात
दिन में बाद में 9/11 स्मारक समारोह के दौरान राजा चार्ल्स तृतीय और ममदानी के बीच संक्षिप्त बातचीत हुई. हालांकि, यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि इस दौरान कोहिनूर हीरे का मुद्दा चर्चा में आया या नहीं.
बकिंघम पैलेस ने इस मामले पर कोई प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया, वहीं मेयर कार्यालय ने भी बातचीत के विवरण साझा नहीं किए.
कोहिनूर हीरे का इतिहास
कोहिनूर 105.6 कैरेट का ऐतिहासिक हीरा है, जो कई राजवंशों के हाथों से गुजरते हुए 1849 में लाहौर संधि के तहत ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के कब्जे में चला गया. इस समझौते के तहत बाल शासक महाराजा दलीप सिंह को इसे सौंपने के लिए मजबूर किया गया था.
वर्तमान में यह हीरा ब्रिटिश क्राउन ज्वेल्स का हिस्सा है और महारानी महारानी एलिजाबेथ द्वितीय के मुकुट में जड़ा हुआ लंदन टॉवर में प्रदर्शित किया जाता है.
भारत का दावा और ब्रिटेन का रुख
भारत लगातार यह दावा करता रहा है कि कोहिनूर हीरा सिख शासक से जबरन लिया गया था और यह औपनिवेशिक शोषण का प्रतीक है. भारत ने इसे अपने इतिहास से जुड़ी एक अमूल्य धरोहर बताते हुए इसकी वापसी की मांग कई बार दोहराई है.
वहीं ब्रिटेन 19वीं सदी की संधि का हवाला देते हुए इस पर अपना कानूनी अधिकार बनाए रखने की बात करता है.
कई शासकों के हाथों से गुजरा कोहिनूर
भारतीय उपमहाद्वीप से निकला यह हीरा समय के साथ कई शासकों के पास रहा, जिनमें मुगल बादशाह, फारसी शाह और अफगान अमीर शामिल थे. अंततः यह अंग्रेजों के कब्जे में पहुंचा और तब से ब्रिटिश शाही खजाने का हिस्सा बना हुआ है.


