ईरान युद्ध में मदद न करने वाले देशों पर भड़के डोनाल्ड, कहा- 'होर्मुज से अपना तेल खुद निकालो'
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य संकट के बीच देशों से खुद तेल जुटाने और आत्मनिर्भर बनने को कहा. ईरान के साथ बढ़ते तनाव और हमलों से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिससे संकट और गहराने की आशंका है.

ईरान से बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने एक बार फिर तीखा रुख अपनाते हुए वैश्विक मंच पर विवादित बयान दिया है. मंगलवार को उन्होंने उन देशों को कड़ा संदेश दिया, जो होर्मुज जलडमरूमध्य के बाधित होने के कारण ईंधन संकट का सामना कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि ऐसे देशों को हिम्मत दिखानी चाहिए और अपनी ऊर्जा जरूरतें खुद पूरी करने की दिशा में कदम उठाने चाहिए.
होर्मुज जलडमरूमध्य में आवाजाही प्रभावित
गौरतलब है कि होर्मुज जलडमरूमध्य विश्व के सबसे अहम समुद्री मार्गों में से एक है, जहां से लगभग 20 प्रतिशत वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति गुजरती है. फरवरी के अंत में अमेरिका और इजरायल की सैन्य कार्रवाई के बाद ईरान की जवाबी गतिविधियों ने इस क्षेत्र में आवाजाही को प्रभावित कर दिया. रिपोर्ट्स के मुताबिक, तेल और गैस ले जाने वाले जहाजों को निशाना बनाए जाने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव बढ़ गया है.
ट्रम्प ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर पोस्ट करते हुए सुझाव दिया कि ब्रिटेन जैसे देशों को या तो अमेरिका से तेल खरीदना चाहिए या फिर खुद इस जलमार्ग तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाने चाहिए. उन्होंने संकेत दिया कि आने वाले समय में अमेरिका अन्य देशों की मदद करने के बजाय उनसे आत्मनिर्भर बनने की उम्मीद करेगा.
अपने बयान में ट्रम्प ने यह भी कहा कि अमेरिका के पास पर्याप्त ऊर्जा संसाधन हैं, लेकिन अन्य देशों को भी अपनी सुरक्षा और संसाधनों के लिए खुद खड़ा होना सीखना होगा. उन्होंने यह तक कहा कि अब अमेरिका हर बार आपकी मदद के लिए नहीं आएगा.
ईरान को चेतावनी
इससे पहले भी ट्रंप ईरान को लेकर कड़े तेवर दिखा चुके हैं. उन्होंने चेतावनी दी थी कि यदि तेहरान के साथ कोई समझौता नहीं होता है, तो अमेरिका ईरान के ऊर्जा ढांचे जैसे बिजली संयंत्र, तेल के कुएं और खार्ग द्वीप पर बड़ा सैन्य हमला कर सकता है. खार्ग द्वीप, जहां से ईरान का अधिकांश तेल निर्यात होता है, लंबे समय से अमेरिकी रणनीतिक नजर में बना हुआ है.
हालांकि, ईरान ने अमेरिका के साथ सीधे संवाद से इनकार कर दिया है. उसका कहना है कि उसे केवल अप्रत्यक्ष माध्यमों से “अनुचित मांगें” मिल रही हैं. ईरान ने यह भी स्पष्ट किया कि वह शांति की अपीलों का स्वागत करता है, लेकिन संघर्ष की शुरुआत के लिए अमेरिका को जिम्मेदार मानता है. इस पूरे घटनाक्रम ने वैश्विक स्तर पर तनाव और ऊर्जा संकट की आशंकाओं को और बढ़ा दिया है.


