क्या पश्चिमी देशों से नाराज हुए राष्ट्रपति ट्रंप? ईरान युद्ध के बीच हथियारों की सप्लाई पर लगाई रोक
यूरोपीय देशों ने भी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को उम्मीद से ज्यादा झटका दिया और इस युद्ध की निंदा की, साथ ही सीधे तौर पर युद्ध में शामिल होने से भी इनकार कर दिया. इन सब के बीच अब अमेरिका भी पश्चिमी देशों से नाराजगी स्पष्ट दिखाई दे रही है.

नई दिल्ली: पूरी दुनिया का ध्यान इस समय अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध पर है. इस दौरान USA ने लगातार अपने तमाम मित्र देशों से जंग में शामिल होने को कहा, लेकिन कुछ देशों ने यहाँ अमेरिका को निराश कर दिया. इसी क्रम में यूरोपीय देशों ने भी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को उम्मीद से ज्यादा झटका दिया और इस युद्ध की निंदा की, साथ ही सीधे तौर पर युद्ध में शामिल होने से भी इनकार कर दिया.
इन सब के बीच अब अमेरिका भी पश्चिमी देशों से नाराजगी स्पष्ट दिखाई दे रही है, क्योंकि हाल ही में USA ने एक बातचीत के दौरान यूरोपीय देशों से कहा है कि विदेशी सैन्य बिक्री के तहत खरीदे गए हथियारों की सप्लाई में अब देरी होने की संभावना है.
हथियारों की सप्लाई में होगी देरी - USA
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार USA अधिकारियों ने कुछ यूरोपीय समकक्षों को बताया है कि पहले से कॉन्ट्रैक्ट (FMS - विदेशी सैन्य बिक्री) किए गए कुछ हथियारों की डिलीवरी में देरी हो सकती है, क्योंकि यूएसए का हथियारों का स्टॉक लगातार कम हो रहा है, जिसका कारण ईरान युद्ध को बताया गया.
इस मामले से जुड़े सूत्रों ने यह भी दावा किया कि बाल्टिक क्षेत्र और स्कैंडिनेविया सहित कई यूरोपीय देश प्रभावित होंगे. अमेरिका ने स्पष्ट कहा है कि हथियारों की सप्लाई में देरी होने वाली है. हालांकि, इस कड़ी में वाईट हाउस अथवा अमेरिका के विदेशी विभाग की ओर से किसी तरह का स्पष्टीकरण नहीं आया है.
यूरोपीय देशों ने युद्ध में मदद नहीं की - USA
गौरतलब है कि अमेरिकी अधिकारियों ने यह बताया कि ईरान के साथ चल रहे युद्ध के दौरान अमेरिका और इजराइल की मदद के लिए यूरोपीय देशों ने आगे आना जरूरी नहीं समझा, उन्होंने सहायता नहीं की. विशेष रूप से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के मुद्दे पर भी पश्चिमी देशों की चुप्पी रही, जिससे सारा भार यूएसए पर आ गया.
अवगत करवाते चलें कि ईरान युद्ध के दौरान पहले भी कई बार ऐसी खबरें सामने आई है कि अमेरिका को जंग में हथियारों की कमी हो रही है. वहीं इससे पहले 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध और 2023 में हुए गाजा-इजराइल संघर्ष के दौरान भी USA ने हथियारों पर अरबों डॉलर खर्च किए थे. इन सब के बाद अब ईरान पर लगातार भीषण हमले जारी रखने के कारण ही शायद हथियारों के स्टॉक पर दबाव बढ़ा है.


