फ्रांस ने दिया फिलिस्तीन को समर्थन, अमेरिका ने बताया ‘आतंक का इनाम’
संयुक्त राष्ट्र महासभा में फिलिस्तीन को मान्यता देने की फ्रांस की घोषणा के बाद वैश्विक राजनीति में हलचल तेज हो गई है. जहां फ्रांस ने इसे मध्य पूर्व में शांति की दिशा में उठाया गया ऐतिहासिक कदम बताया है, वहीं अमेरिका और इजरायल ने इसे आतंक के समर्थन जैसा बताया है.

फ्रांस द्वारा संयुक्त राष्ट्र महासभा में फिलिस्तीन को मान्यता देने की घोषणा के बाद अंतरराष्ट्रीय सियासत गर्मा गई है. अमेरिका ने इस कदम का कड़ा विरोध करते हुए इसे 'गंभीर और गैरजिम्मेदार निर्णय' करार दिया है. अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की घोषणा की आलोचना करते हुए कहा है कि यह फैसला हमास के प्रचार को बढ़ावा देता है और 7 अक्टूबर के हमले के पीड़ितों का अपमान है.
इधर इजरायल ने भी फ्रांस की कड़ी आलोचना करते हुए कहा है कि फिलिस्तीन को मान्यता देना आतंकवाद को इनाम देने जैसा है. इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और विदेश मंत्री गिदोन सार ने भी फ्रांसीसी निर्णय पर तीखी प्रतिक्रिया दी है.
अमेरिका का कड़ा विरोध
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों की योजना पर प्रतिक्रिया देते हुए X (पूर्व ट्विटर) पर लिखा, संयुक्त राष्ट्र महासभा में फिलिस्तीन को मान्यता देने की @EmmanuelMacron की योजना को अमेरिका दृढ़ता से खारिज करता है. यह गैरजिम्मेदार फैसला हमास के प्रचार को बढ़ावा देता है और 7 अक्टूबर के पीड़ितों के मुंह पर तमाचा है. रुबियो के इस बयान के बाद अमेरिका की स्थिति स्पष्ट हो गई है कि फिलिस्तीन को एकतरफा मान्यता देना मध्य पूर्व में शांति नहीं, बल्कि और अस्थिरता लाएगा.
The United States strongly rejects @EmmanuelMacron’s plan to recognize a Palestinian state at the @UN general assembly.
— Secretary Marco Rubio (@SecRubio) July 25, 2025
This reckless decision only serves Hamas propaganda and sets back peace. It is a slap in the face to the victims of October 7th.
फ्रांस ने फिलिस्तीन को मान्यता देने का किया ऐलान
फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने गुरुवार को घोषणा की कि फ्रांस सितंबर में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान फिलिस्तीन को एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता देगा. मैक्रों के अनुसार, यह फैसला मध्य पूर्व में स्थायी शांति की दिशा में एक आवश्यक कदम है. X पर पोस्ट किए गए एक पत्र में मैक्रों ने लिखा, हमें अंततः फिलिस्तीन राष्ट्र का निर्माण करना होगा, उसकी स्थिरता सुनिश्चित करनी होगी और उसकी निरस्त्रीकरण की स्वीकार्यता के साथ उसे इजरायल को पूर्ण रूप से मान्यता देकर, पूरे मध्य पूर्व की सुरक्षा में योगदान देने में सक्षम बनाना होगा.
आतंक को इनाम दे रहा है फ्रांस
फ्रांस के इस ऐलान के बाद इज़रायल ने तीखी प्रतिक्रिया दी है. प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने AFP को दिए बयान में कहा, स्पष्ट रूप से कहें तो फिलिस्तीनी इज़रायल के साथ एक राज्य नहीं चाहते, बल्कि इज़रायल की जगह अपना राज्य चाहते हैं.वहीं इजरायली विदेश मंत्री गिदोन सार ने भी X पर लिखा कि एक फिलिस्तीनी राज्य, एक हमास राज्य होगा, जैसे गाजा से इजरायली वापसी के बाद हमास ने वहां कब्जा कर लिया. मैक्रों इजरायल की सुरक्षा नहीं कर सकते. आशा है कि वे पेरिस की सड़कों पर सुरक्षा सुनिश्चित कर पाएं. ओस्लो प्रक्रिया में हम पहले ही देख चुके हैं कि आतंक के खिलाफ लड़ने के वादों पर आधारित सुरक्षा कैसे विफल हुई. अब इजरायल अपने भविष्य को दांव पर नहीं लगाएगा.
मान्यता के पीछे की पृष्ठभूमि
फ्रांस का यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब गाजा युद्ध के बीच करीब 30 देशों और कई इजरायली सहयोगियों ने युद्ध रोकने और मानवीय सहायता की बहाली की मांग की है. फ्रांस ने स्पष्ट किया है कि उसकी मान्यता का उद्देश्य गाजा में युद्ध समाप्त करना और वहां की नागरिक आबादी को राहत पहुंचाना है.


