ग्रीनलैंड में उतरी जर्मन फौज! ट्रंप के खिलाफ NATO के ही सदस्यों ने कर दी 'गद्दारी'?
अमेरिका और यूरोप के बीच ग्रीनलैंड को लेकर गहरा विवाद खड़ा हो गया है. वहीं यूक्रेन में अभी युद्ध जारी है, जबकि जर्मनी ने बड़ा ऐलान किया है कि वह यूरोप की सबसे ताकतवर पारंपरिक सेना तैयार करेगा.

जनवरी 2026 में वैश्विक राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिल रहा है. यूक्रेन युद्ध जारी है, लेकिन अब अमेरिका और यूरोप के बीच ग्रीनलैंड को लेकर गहरा विवाद खड़ा हो गया है. इसी बीच जर्मनी ने बड़ा ऐलान किया है कि वह यूरोप की सबसे ताकतवर पारंपरिक सेना तैयार करेगा. यह कदम नाटो के अंदर तनाव को और बढ़ा रहा है. आखिर क्या वजह है कि जर्मनी, जो दशकों से सैन्य मामलों में पीछे रहा, अब इतना आक्रामक हो गया है?
ट्रंप ने फिर से ग्रीनलैंड खरीदने की उठाई मांग
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फिर से ग्रीनलैंड खरीदने की मांग उठाई है. डेनमार्क और ग्रीनलैंड ने इसे सिरे से खारिज कर दिया. जवाब में अमेरिका ने 17 जनवरी को जर्मनी, फ्रांस, डेनमार्क समेत आठ यूरोपीय देशों पर 10 प्रतिशत आयात शुल्क लगाने का ऐलान किया. यह शुल्क 1 फरवरी 2026 से लागू हो सकता है और समझौता न होने पर बढ़ सकता है.
अमेरिका ग्रीनलैंड को आर्कटिक क्षेत्र में रूस और चीन के खिलाफ रणनीतिक महत्व का मानता है. लेकिन यूरोपीय देश इसे अपनी संप्रभुता पर हमला बता रहे हैं. वे कहते हैं कि अमेरिका अब सहयोगी की बजाय सख्त व्यापारी बन गया है. इस विवाद ने नाटो में दरार पैदा कर दी है.
ऑपरेशन आर्कटिक एनड्योरेंस हुआ शुरू
अमेरिकी दबाव के बजाय यूरोप ने ग्रीनलैंड में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ाई है. डेनमार्क के नेतृत्व में 'ऑपरेशन आर्कटिक एनड्योरेंस' शुरू हुआ है. जर्मनी, फ्रांस और स्वीडन की सेनाएं इसमें शामिल हैं. जर्मन सैनिक पहली बार इतनी दूर मिशन में हिस्सा ले रहे हैं, जो अमेरिकी हितों के खिलाफ दिखता है. यह नाटो के इतिहास में अनोखी स्थिति है, जहां सदस्य देश एक-दूसरे के सामने खड़े हैं. यूरोप ग्रीनलैंड की रक्षा के लिए एकजुट हो रहा है.
जर्मनी की सेना विस्तार की योजना
जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने संसद में कहा कि बुंडेसवेहर (जर्मन सेना) को यूरोप की सबसे मजबूत पारंपरिक सेना बनना होगा. नवंबर में सक्रिय सैनिकों की संख्या 1,84,000 थी, जो मई से 2,500 बढ़ी है. बता दें, 2026 से 18 साल के पुरुषों को सेना में सेवा के लिए शारीरिक फिटनेस का प्रश्नपत्र भरना अनिवार्य है.
भर्ती अभी स्वैच्छिक है, लेकिन कानून सरकार को जरूरत पड़ने पर अनिवार्य सेवा लागू करने का अधिकार देता है. जर्मनी ने नाटो को वादा किया है कि 2035 तक सक्रिय सैनिक 2,60,000 और रिजर्व 2,00,000 होंगे. युवाओं को आकर्षित करने के लिए 23 महीने के कॉन्ट्रैक्ट पर 2,600 यूरो मासिक वेतन, मुफ्त आवास और स्वास्थ्य बीमा दिया जा रहा है. कर कटौती के बाद भी 2,300 यूरो हाथ में आते हैं.
रूस की चिंता और जर्मनी का रक्षा बजट
रूस ने जर्मनी की इस योजना पर कड़ी आपत्ति जताई है. रूसी राजदूत ने कहा कि जर्मनी रूस से पूर्ण युद्ध की तैयारी कर रहा है. यूक्रेन युद्ध के कारण जर्मनी का रक्षा खर्च बढ़ा है. इस साल 108 अरब यूरो (जीडीपी का 2.5%) खर्च हो रहा है. 2030 तक इसे 3.5% तक ले जाने की योजना है. जनता का समर्थन भी बढ़ा है.
जर्मनी, दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होने के बावजूद, अब यूरोप की सुरक्षा में अहम भूमिका निभाना चाहता है. ग्रीनलैंड विवाद ने इसे और तेज कर दिया है. क्या यह नाटो में नई 'बगावत' का संकेत है? ये समय ही बताएगा.


