अयातुल्ला खामेनेई को ईरान ने अब तक नहीं दफनाया! रिपोर्ट में चौंकाने वाली वजह
अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के हफ्तों बाद भी सुरक्षा और हमलों के खतरे के कारण उनके अंतिम संस्कार पर फैसला नहीं हो पाया है. ईरानी सरकार बड़े जनसमूह से जुड़े जोखिम और अस्थिर हालात के चलते कार्यक्रम टालती जा रही है.

ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या को कई सप्ताह बीत चुके हैं, लेकिन उनके अंतिम संस्कार को लेकर अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया जा सका है. रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरानी प्रशासन इस मामले में सुरक्षा और व्यवस्थागत चुनौतियों को मुख्य कारण बता रहा है.
संभावित खतरों का आकलन कर रही सरकार
बताया जा रहा है कि सरकार बड़े सार्वजनिक आयोजन से जुड़े संभावित खतरों का गहराई से आकलन कर रही है. खासकर इजरायल की ओर से संभावित हमलों और किसी भी बड़े जनसमूह के दौरान उत्पन्न हो सकने वाली अव्यवस्था को लेकर अधिकारियों में चिंता है. इसी वजह से अंतिम संस्कार जैसे बड़े कार्यक्रम को टालने का फैसला किया जा रहा है.
विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा हालात में ईरानी नेतृत्व किसी भी तरह का जोखिम उठाने से बच रहा है. फाउंडेशन फॉर डिफेंस ऑफ डेमोक्रेसीज से जुड़े विशेषज्ञ बेहनम तालेब्लू के अनुसार, सरकार फिलहाल इतनी दबाव में है कि वह किसी बड़े आयोजन की अनुमति देने में हिचकिचा रही है. उनका कहना है कि देश की स्थिति ऐसी नहीं है कि शासन तंत्र कोई बड़ा जोखिम उठा सके.
28 फरवरी को हुई थी मौत
गौरतलब है कि 86 वर्षीय खामेनेई की 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हवाई हमले में मौत हो गई थी. इस घटना के बाद क्षेत्रीय तनाव और अधिक बढ़ गया. हालांकि, इतने समय बाद भी उन्हें अंतिम विदाई नहीं दी जा सकी है, जो एक असामान्य स्थिति मानी जा रही है.
इसके विपरीत, वर्ष 1989 में जब आयतुल्ला रूहोल्लाह खुमैनी का निधन हुआ था, तब तेहरान में उनके लिए भव्य राजकीय अंतिम संस्कार आयोजित किया गया था, जिसमें लाखों लोग शामिल हुए थे. लेकिन इस बार परिस्थितियां पूरी तरह अलग हैं और किसी बड़े जनसमूह के जुटने की संभावना फिलहाल नजर नहीं आ रही है.
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरानी अधिकारी मशहद को अंतिम संस्कार के संभावित स्थल के रूप में देख रहे हैं, क्योंकि वहां सुरक्षा प्रबंधन अपेक्षाकृत आसान हो सकता है. पहले 4 मार्च से तीन दिन तक राजकीय अंतिम संस्कार आयोजित करने की योजना बनाई गई थी, लेकिन अमेरिका और इजरायल के बढ़ते हमलों के चलते इसे रद्द कर दिया गया.
हालांकि अधिकारियों ने शुरुआती देरी का कारण भारी भीड़ की आशंका भी बताया था, लेकिन अब तक नई तारीख तय नहीं हो सकी है. इससे यह साफ संकेत मिलता है कि देश के मौजूदा हालात इस महत्वपूर्ण आयोजन के लिए अनुकूल नहीं हैं.


