बंगाल में चुनावी रैली के बीच पीएम मोदी ने लोगों संग चखा झालमुड़ी का स्वाद

पीएम मोदी झारग्राम में आम लोगों के बीच पहुंचकर स्थानीय मशहूर नाश्ता ‘झालमुड़ी’ का स्वाद लेते नजर आए. झारग्राम में प्रधानमंत्री मोदी का यह सहज और स्थानीय रंग में रंगा हुआ रूप लोगों को आकर्षित करता दिखा.

Suraj Mishra
Edited By: Suraj Mishra

पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को राज्य के विभिन्न हिस्सों में ताबड़तोड़ प्रचार अभियान चलाया. उनके कार्यक्रम में चार बड़ी जनसभाएं शामिल रहीं, जिनमें उन्होंने अलग-अलग क्षेत्रों में जाकर लोगों को संबोधित किया. इस दौरान उनका एक अलग अंदाज भी देखने को मिला, जब वे झारग्राम में आम लोगों के बीच पहुंचकर स्थानीय मशहूर नाश्ता ‘झालमुड़ी’ का स्वाद लेते नजर आए.

पीएम मोदी ने खाई झालमुड़ी 

झारग्राम में प्रधानमंत्री मोदी का यह सहज और स्थानीय रंग में रंगा हुआ रूप लोगों को आकर्षित करता दिखा. उन्होंने पारंपरिक कुर्ता और लाल रंग का स्टोल पहन रखा था, जो उनके ‘बंगाली अवतार’ को और खास बना रहा था. रैली के बाद वे एक छोटी सी दुकान पर पहुंचे, जहां उन्होंने कागज के ठोंगे में परोसी गई झालमुड़ी खाई. इतना ही नहीं, उन्होंने अपने आसपास मौजूद लोगों, खासकर महिलाओं के साथ भी यह नाश्ता साझा किया, जिससे माहौल और आत्मीय हो गया.

प्रधानमंत्री ने इस अनुभव को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा करते हुए लिखा कि व्यस्त चुनावी दिन के बीच झारग्राम में स्वादिष्ट झालमुड़ी का आनंद लेना उनके लिए खास रहा. उनकी यह तस्वीरें और वीडियो तेजी से वायरल हुईं और समर्थकों के बीच चर्चा का विषय बन गईं.

राजनीतिक मुद्दों पर जोरदार हमला

हालांकि, अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने राजनीतिक मुद्दों पर भी जोरदार हमला बोला. उन्होंने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी राज्य में घुसपैठियों को बढ़ावा देने की नीति पर चल रही है. उनके मुताबिक, यह चुनाव पश्चिम बंगाल की सांस्कृतिक पहचान और विरासत को बचाने के लिए बेहद महत्वपूर्ण है.

उन्होंने कहा कि राज्य की मौजूदा सरकार ऐसे रास्ते पर बढ़ रही है, जो समाज के लिए खतरनाक साबित हो सकता है. प्रधानमंत्री का आरोप था कि टीएमसी आम जनता के हितों की अनदेखी कर रही है और भ्रष्टाचार तथा जबरन वसूली जैसी समस्याओं को बढ़ावा दे रही है. उन्होंने यह भी कहा कि आम लोगों को अपनी बुनियादी जरूरतों के लिए भी सत्ताधारी दल के नेताओं पर निर्भर रहना पड़ता है, जबकि जनप्रतिनिधि जनता की समस्याओं से दूर हैं.

इस तरह, एक ओर जहां प्रधानमंत्री मोदी ने अपने सहज व्यवहार से लोगों का ध्यान खींचा, वहीं दूसरी ओर उन्होंने राजनीतिक मंच से विरोधियों पर तीखे प्रहार कर चुनावी माहौल को और गरमा दिया.

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