मिडिल ईस्ट जंग से हिली वैश्विक अर्थव्यवस्था, IMF की बड़ी चेतावनी

आईएमएफ ने चेतावनी दी है कि ईरान युद्ध से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ रहा है, जिससे महंगाई बढ़ने और विकास दर घटने का खतरा है. ऊर्जा और खाद्य कीमतों में उछाल के कारण खासकर गरीब और आयात-निर्भर देशों की स्थिति और ज्यादा कठिन होती जा रही है.

Suraj Mishra
Edited By: Suraj Mishra

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने गंभीर चिंता जताते हुए चेतावनी दी है कि ईरान से जुड़े युद्ध ने क्षेत्रीय ही नहीं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी नकारात्मक असर डालना शुरू कर दिया है. आईएमएफ के शीर्ष अर्थशास्त्रियों द्वारा जारी एक ब्लॉग में कहा गया है कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद शुरू हुआ यह संघर्ष एक असमान आर्थिक झटका बनकर उभरा है, जिससे वित्तीय हालात और सख्त हो गए हैं.

सदस्य देशों को सलाह 

आईएमएफ के अनुसार, इस युद्ध का असर इस बात पर निर्भर करेगा कि यह संघर्ष कितने समय तक चलता है. इसका दायरा कितना बढ़ता है और बुनियादी ढांचे व आपूर्ति श्रृंखलाओं को कितना नुकसान पहुंचता है. संगठन ने अपने सदस्य देशों को सलाह दी है कि वे हालात को देखते हुए बेहद सोच-समझकर नीतिगत फैसले लें। साथ ही आईएमएफ ने भरोसा दिलाया है कि जरूरत पड़ने पर वह देशों को वित्तीय सहायता और नीतिगत मार्गदर्शन प्रदान करता रहेगा.

यह चेतावनी ऐसे समय आई है जब जी-7 देशों के वित्त मंत्रियों ने ऊर्जा बाजार को स्थिर रखने और आर्थिक अस्थिरता को कम करने के लिए हर संभव कदम उठाने का संकल्प लिया है. अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) के मुताबिक, ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने और क्षेत्र में बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचने से वैश्विक तेल आपूर्ति में भारी बाधा आई है. सामान्य परिस्थितियों में दुनिया के कुल तेल का लगभग 25 से 30 प्रतिशत और एलएनजी का करीब 20 प्रतिशत इसी रास्ते से गुजरता है, जिससे इसकी अहमियत और बढ़ जाती है.

आईएमएफ ने खास तौर पर चेताया है कि कम आय वाले देशों के सामने खाद्य असुरक्षा का खतरा बढ़ सकता है. खाद्य पदार्थों और उर्वरकों की कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है, जबकि कई विकसित देश अपनी विदेशी सहायता घटा रहे हैं. ऐसे में गरीब देशों को अतिरिक्त वैश्विक सहयोग की जरूरत पड़ सकती है.

विशेषज्ञों का क्या मानना है?

विशेषज्ञों का मानना है कि इस युद्ध के अलग-अलग प्रभाव हो सकते हैं, लेकिन अधिकांश स्थितियों में परिणाम महंगाई बढ़ने और आर्थिक विकास की रफ्तार धीमी होने के रूप में सामने आएंगे. एशिया और यूरोप के ऊर्जा आयातक देशों पर ईंधन की कीमतों का सबसे ज्यादा असर पड़ रहा है, जबकि अफ्रीका और एशिया के कई देशों को ऊंची कीमतों पर भी जरूरी संसाधन जुटाने में मुश्किल हो रही है.

आईएमएफ ने आगाह किया है कि यदि यह संघर्ष लंबा खिंचता है, तो वैश्विक बाजार में अनिश्चितता बनी रहेगी, ऊर्जा महंगी होती जाएगी और महंगाई को काबू में रखना और कठिन हो जाएगा. संस्था ने कहा कि वह 14 अप्रैल को जारी होने वाली अपनी विश्व आर्थिक आउटलुक रिपोर्ट में इस पूरे संकट का विस्तृत आकलन पेश करेगी. साथ ही सदस्य देशों से सतर्क रहने और मिलकर इस चुनौती का सामना करने की अपील की गई है.

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