'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों पर हमला बर्दाश्त नहीं करेंगे' UNECOSOC बैठक में भारत का सख्त बयान

भारत ने संयुक्त राष्ट्र में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों पर हमलों को लेकर सख्त रुख अपनाया है और साफ कहा है कि जहाजों को निशाना बनाना, चालक दल की जान खतरे में डालना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.

Sonee Srivastav

नई दिल्ली: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच भारत ने संयुक्त राष्ट्र में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों पर हमलों को लेकर सख्त रुख अपनाया है. भारत के स्थायी प्रतिनिधि पार्वथानेनी हरीश ने स्पष्ट कहा कि इस क्षेत्र में जहाजों को निशाना बनाना, चालक दल की जान को खतरे में डालना और समुद्री आवाजाही की आजादी को रोकना पूरी तरह अस्वीकार्य है.

UNECOSOC बैठक में भारत का कड़ा बयान

भारत के राजनयिक ने संयुक्त राष्ट्र आर्थिक और सामाजिक परिषद (UNECOSOC) की विशेष बैठक में यह बात कही. यह बैठक वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और आपूर्ति को सुरक्षित रखने के मकसद से बुलाई गई थी. हरीश ने बैठक में कहा कि होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों पर हमले बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे. उन्होंने अंतरराष्ट्रीय कानून का पूरा सम्मान करने की मांग भी की.

भारतीय जहाज पर हुआ हमला

13 मई 2026 को ओमान के तट के पास भारतीय ध्वज वाले एक जहाज पर हमला हुआ था. यह जहाज सोमालिया से आ रहा था. ओमान की नौसेना ने तुरंत कार्रवाई करते हुए जहाज पर सवार 14 चालक दल के सदस्यों को सुरक्षित बचा लिया.

भारत सरकार ने इस हमले की निंदा की थी. फरवरी 2026 में पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने के बाद अब तक भारतीय ध्वज वाले कम से कम तीन जहाजों पर हमले हो चुके हैं.

होर्मुज स्ट्रेट क्यों है महत्वपूर्ण? 

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया का एक बेहद संवेदनशील और संकरा समुद्री रास्ता है. यहां से दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत ऊर्जा आपूर्ति (तेल और गैस) गुजरती है. इस मार्ग पर कोई भी रुकावट भारत समेत पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को प्रभावित करती है.

ईरान पर हमले से बढ़ा तनाव

28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल के ईरान पर हमलों के बाद क्षेत्र में तनाव बढ़ गया. ईरान की जवाबी कार्रवाई के कारण होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई है. इससे ईंधन, उर्वरक और अन्य जरूरी सामानों की आपूर्ति पर असर पड़ा है.

भारत ने बैठक में जोर देकर कहा कि इस संकट से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग जरूरी है. अल्पकालिक और लंबे समय के दोनों प्रकार के उपायों की जरूरत है.

भारत का यह सख्त रुख जहाजों की सुरक्षा और अपने नागरिकों की जान की सुरक्षा को प्राथमिकता देने का संकेत देता है. वैश्विक स्तर पर बढ़ते तनाव के बीच भारत अपनी व्यापारिक और ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सक्रिय कूटनीति चला रहा है.

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