ईरान-इजराइल जंग खत्म, अब तैयारियां ताइवान में तेज़

ईरान-इजराइल युद्ध से मिले सबक ताइवान को गहराई से प्रभावित कर रहे हैं. चीन के बढ़ते खतरे के मद्देनजर ताइवान ने सैन्य अभ्यास, साइबर सुरक्षा, नागरिक सुरक्षा और अमेरिका के साथ मजबूत साझेदारी के जरिए युद्ध के हर मोर्चे पर खुद को तैयार कर लिया है.

Dimple Yadav
Edited By: Dimple Yadav

ईरान और इजराइल के बीच हुई 12 दिन की जंग का असर हजारों किलोमीटर दूर ताइवान तक महसूस किया जा रहा है. इस संघर्ष में इजराइल की तेज़ रणनीति, अमेरिका का सक्रिय समर्थन और ईरान की जवाबी कार्रवाई ने ताइवान को कई महत्वपूर्ण सबक दिए हैं. इन सबक को समझते हुए ताइवान अब चीन के संभावित खतरे से निपटने के लिए खुद को हर मोर्चे पर तैयार कर रहा है. इसका सबसे बड़ा उदाहरण इस हफ्ते शुरू हुए ताइवान के अब तक के सबसे बड़े सैन्य अभ्यास “हान कुआंग ड्रिल्स” हैं, जिसमें लगभग 22,000 रिजर्व सैनिक हिस्सा ले रहे हैं. इस अभ्यास में साइबर अटैक, मिसाइल हमले और जमीनी लड़ाई जैसी हर संभव स्थिति का सामना करने की तैयारी की जा रही है.

13 जून से 24 जून तक चले ईरान-इजराइल युद्ध में इजराइल ने शुरुआत में ही ईरान की एयर डिफेंस को कमजोर किया और सटीक खुफिया जानकारी के आधार पर सैकड़ों एयरस्ट्राइक किए. इसके जवाब में ईरान ने 550 से ज्यादा मिसाइलें और हजार से ज्यादा ड्रोन दागे. नौवें दिन अमेरिका ने युद्ध में हस्तक्षेप करते हुए ईरान के तीन न्यूक्लियर ठिकानों पर हमला किया. इस पूरी लड़ाई से ताइवान ने यह सीखा कि समय पर सही जानकारी, मजबूत साइबर सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय सहयोग से दुश्मन को काफी हद तक रोकना संभव है.

ईरान-इजराइल जंग खत्म

चीन की विशाल सेना के मुकाबले ताइवान ने असिमेट्रिक डिफेंस की रणनीति अपनाई है, जिसमें तेज और स्मार्ट तकनीकों पर जोर दिया गया है. ताइवान ने एंटी-ड्रोन सिस्टम, साइबर हमलों के बीच कमांड बनाए रखने की योजनाएं बनाई हैं और अमेरिकी M1A2T अब्राम्स टैंक को भी शामिल किया है, जो उनकी सैन्य ताकत को बढ़ा रहे हैं.

अब तैयारियां ताइवान में तेज़

अमेरिका के साथ ताइवान के संबंध और सैन्य सहयोग भी गहरा हुआ है. दोनों देशों के बीच सैन्य ट्रेनिंग, खुफिया जानकारी साझा करने और फॉरेन मिलिट्री फाइनेंसिंग के समझौते बढ़ाए गए हैं. ताइवानी सैनिक अमेरिका में ट्रेनिंग ले रहे हैं, वहीं अमेरिकी विशेषज्ञ ताइवान में जाकर प्रशिक्षण दे रहे हैं.

इजराइल-ईरान जंग से मिली सीख

सिविल डिफेंस की तैयारी भी ताइवान में जोर पकड़ रही है. मिसाइल हमले की स्थिति में सुरक्षा के लिए नए सरकारी और सार्वजनिक भवनों में बम-रोधी शेल्टर बनाए जा रहे हैं, साथ ही पुराने भवनों को मजबूत बनाने की योजना है. ट्रेन स्टेशनों और मेट्रो में भी सुरक्षित जगहों का इंतजाम किया जा रहा है.

ताइवान ने तैयारियों को किया दोगुना

इसके अलावा, ताइवान अपने नागरिकों को मानसिक रूप से भी युद्ध के लिए तैयार कर रहा है. मेडिकल इमरजेंसी, रेस्क्यू सिस्टम और ट्रॉमा थैरेपी पर फोकस बढ़ा है. ताइवान के विशेषज्ञ इजराइल जाकर वहां के अनुभवों से सीख रहे हैं कि जंग जैसी कठिन परिस्थितियों में आम लोग कैसे शांत और तैयार रह सकते हैं. इस तरह ताइवान ने ईरान-इजराइल युद्ध से मिली सीखों को अपने लिए एक मजबूत सुरक्षा रणनीति में बदला है.

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