ईरान ने ठुकराई बातचीत, फिर भी ट्रंप ने बढ़ाया युद्धविराम... अमेरिका के फैसले से मिडिल ईस्ट में नई हलचल

अमेरिका ने ईरान के साथ युद्धविराम बढ़ाया है, लेकिन हालात अभी भी तनावपूर्ण हैं. ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रूथ सोशल’ पर इस फैसले की जानकारी देते हुए कहा कि यह कदम पाकिस्तान की अपील के बाद उठाया गया है.

Shraddha Mishra

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच एक अहम मोड़ देखने को मिला है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने युद्धविराम को आगे बढ़ाने का फैसला किया है, जिससे फिलहाल टकराव टलता हुआ नजर आ रहा है. हालांकि इस फैसले के पीछे कूटनीतिक दबाव, रणनीतिक सोच और क्षेत्रीय देशों की भूमिका साफ झलकती है.

मंगलवार को ट्रंप ने घोषणा की कि ईरान के साथ जारी युद्धविराम को तब तक जारी रखा जाएगा, जब तक ईरानी नेतृत्व एक साझा और स्पष्ट प्रस्ताव सामने नहीं रखता और बातचीत किसी निष्कर्ष तक नहीं पहुंचती. ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रूथ सोशल’ पर इस फैसले की जानकारी देते हुए कहा कि यह कदम पाकिस्तान की अपील के बाद उठाया गया है. पाकिस्तान ने अमेरिका से अनुरोध किया था कि वह सैन्य कार्रवाई को फिलहाल रोककर कूटनीतिक रास्ते को मौका दे.

ट्रंप ने अपने बयान में साफ किया कि पाकिस्तान के फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सीधे तौर पर उनसे अपील की थी कि हालात को बिगड़ने से रोकने के लिए कुछ समय दिया जाए. उन्होंने कहा कि ईरान के भीतर राजनीतिक मतभेद पहले से ही हैं, ऐसे में किसी भी जल्दबाजी में लिया गया फैसला स्थिति को और गंभीर बना सकता है.

सैन्य तैयारी जारी, लेकिन हमला फिलहाल टला

ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि युद्धविराम का मतलब यह नहीं है कि अमेरिका अपनी तैयारी कम कर रहा है. उन्होंने सेना को निर्देश दिया है कि नाकाबंदी जारी रखी जाए और हर परिस्थिति के लिए पूरी तरह तैयार रहा जाए. यानी एक तरफ अमेरिका ने सीधे हमले को रोका है, लेकिन दूसरी ओर दबाव बनाए रखने की रणनीति जारी रखी है. यह कदम संकेत देता है कि अमेरिका कूटनीति और शक्ति, दोनों का संतुलन बनाए रखना चाहता है.

अमेरिका के कदम पर ईरान की कड़ी प्रतिक्रिया

अमेरिका के इस फैसले के तुरंत बाद ईरान की ओर से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई. ईरान के वरिष्ठ अधिकारी अब्बास अराघची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि अमेरिकी नाकाबंदी को युद्धविराम का उल्लंघन माना जाना चाहिए. उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि किसी देश के बंदरगाहों को रोकना और व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाना सीधे तौर पर “युद्ध का कार्य” है. अराघची ने चेतावनी दी कि अगर ऐसे कदम जारी रहे तो इससे हालात और ज्यादा बिगड़ सकते हैं. उन्होंने यह भी कहा कि ईरान अपने हितों की रक्षा करना जानता है और किसी भी तरह के दबाव के आगे झुकने वाला नहीं है.

ईरान ने बातचीत से किया किनारा

इसी बीच एक और बड़ा घटनाक्रम सामने आया है. ईरान ने पाकिस्तान में प्रस्तावित वार्ता में शामिल होने से इनकार कर दिया है. ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी तसनीम के अनुसार, तेहरान का मानना है कि मौजूदा हालात में बातचीत करना बेकार है, क्योंकि अमेरिका अपनी मांगों से पीछे हटने को तैयार नहीं है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान ने औपचारिक रूप से पाकिस्तान और अन्य मध्यस्थ देशों को सूचित कर दिया है कि वह इस समय किसी भी वार्ता में भाग नहीं लेगा. ईरानी अधिकारियों का कहना है कि जब तक अमेरिका अपने रुख में नरमी नहीं दिखाता, तब तक किसी समझौते की उम्मीद करना मुश्किल है.

‘युद्धविराम सिर्फ समय खरीदने की चाल’ - ईरान

ईरान के भीतर भी ट्रंप के इस फैसले को लेकर संदेह की स्थिति है. ईरान के मुख्य वार्ताकार और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकर गालिबाफ के एक सलाहकार ने इस कदम को रणनीतिक चाल बताया है. उनका कहना है कि युद्धविराम बढ़ाने का उद्देश्य असल में भविष्य में किसी अचानक हमले के लिए समय हासिल करना हो सकता है.

सलाहकार ने यह भी कहा कि अमेरिकी नाकाबंदी को हल्के में नहीं लिया जा सकता, क्योंकि इसका असर बमबारी जैसा ही होता है. उन्होंने ईरान से अपील की कि वह सक्रिय होकर जवाब देने के लिए तैयार रहे. उनके मुताबिक, जो पक्ष कमजोर स्थिति में होता है, वह शर्तें तय नहीं कर सकता, और अमेरिका का यह कदम इसी दिशा में देखा जाना चाहिए.

पाकिस्तान की भूमिका और प्रतिक्रिया

इस पूरे घटनाक्रम में पाकिस्तान की भूमिका काफी अहम रही है. प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने ट्रंप के फैसले का स्वागत करते हुए उनका धन्यवाद किया. उन्होंने कहा कि यह निर्णय कूटनीतिक प्रयासों को आगे बढ़ाने का मौका देगा और क्षेत्र में शांति कायम करने में मदद करेगा.

शरीफ ने यह भी कहा कि पाकिस्तान लगातार दोनों पक्षों के बीच संवाद बनाए रखने की कोशिश कर रहा है और उम्मीद जताई कि आने वाले समय में एक व्यापक शांति समझौते की दिशा में प्रगति होगी. उन्होंने विश्वास जताया कि अगर सभी पक्ष संयम बरतें और बातचीत को प्राथमिकता दें, तो इस तनावपूर्ण स्थिति का समाधान निकाला जा सकता है.

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