ईरान से शांति वार्ता के लिए पाकिस्तान जाएंगे जेडी वैंस, 11 अप्रैल को होगी पहली बैठक
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच अब बातचीत की पहल तेज हो गई है. उपराष्ट्रपति जेडी वैंस के नेतृत्व में अमेरिकी टीम पाकिस्तान पहुंचकर 11 अप्रैल को होने वाली अहम वार्ता में हिस्सा लेगी.

नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच अब कूटनीति की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उपराष्ट्रपति जेडी वैंस के नेतृत्व में एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल को पाकिस्तान भेजने का फैसला किया है, जहां दोनों देशों के बीच वार्ता का पहला दौर आयोजित होगा.
व्हाइट हाउस की ओर से यह संकेत दिया गया है कि अब सैन्य दबाव के साथ-साथ बातचीत के जरिए समाधान तलाशने की कोशिश की जा रही है. यह वार्ता ऐसे समय में हो रही है जब क्षेत्रीय हालात काफी संवेदनशील बने हुए हैं.
11 अप्रैल को इस्लामाबाद में होगी पहली वार्ता
प्रेस सचिव कैरोलिन लीविट ने बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने वार्ता दल को पाकिस्तान भेजने का निर्णय लिया है. उन्होंने कहा, "इन वार्ताओं का पहला दौर स्थानीय समयानुसार शनिवार सुबह होगा, और हम इन आमने-सामने की बैठकों का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं."
इस वार्ता में उपराष्ट्रपति जेडी वैंस के साथ ट्रंप के वरिष्ठ सलाहकार जेरेड कुशनर और स्टीव विटकॉफ भी शामिल होंगे.
टकराव से कूटनीति की ओर बढ़ता अमेरिका
व्हाइट हाउस का यह कदम साफ तौर पर सैन्य रणनीति से कूटनीतिक प्रयासों की ओर झुकाव को दर्शाता है. हालांकि, सार्वजनिक रूप से अमेरिका अभी भी सख्त रुख बनाए हुए है.
लीविट ने कहा कि 28 फरवरी से शुरू हुए अमेरिकी और इजरायली हमलों के बाद ईरान के प्रॉक्सी समूहों की हथियार आपूर्ति क्षमता कमजोर पड़ी है. उन्होंने कहा, "ईरान अब अपने प्रॉक्सी समूहों को हथियार वितरित नहीं कर सकता है," और सैन्य अभियान को वार्ता से पहले संतुलन बदलने वाला कदम बताया.
होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलना प्राथमिकता
अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा पूरी तरह खोलना उसकी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है.
लीविट ने कहा, "राष्ट्रपति की तत्काल प्राथमिकता बिना किसी प्रतिबंध के जलडमरूमध्य को फिर से खोलना है, चाहे वह टोल के रूप में हो या किसी अन्य रूप में."
उन्होंने यह भी बताया कि वैश्विक जहाजरानी पर किसी भी तरह के प्रतिबंध या शुल्क को स्वीकार नहीं किया जाएगा.
ईरान के प्रस्ताव पर बदला रुख
व्हाइट हाउस के अनुसार, ईरान द्वारा पहले पेश किए गए प्रस्ताव को पूरी तरह खारिज कर दिया गया था. लीविट ने कहा, "ईरानियों ने शुरू में एक 10 सूत्री योजना पेश की थी जो मूल रूप से गैर-गंभीर, अस्वीकार्य और पूरी तरह से निष्फल थी," और इसे "ट्रम्प ने सचमुच कचरे में फेंक दिया था."
हालांकि, बाद में ईरान द्वारा पेश किए गए संशोधित प्रस्ताव ने बातचीत की राह खोल दी है. यह नया प्रस्ताव अब "हमारे अपने 15 सूत्री प्रस्ताव के अनुरूप" माना जा रहा है.
राजनयिक गतिविधियां तेज
पाकिस्तान में होने वाली यह वार्ता हाल के दिनों में बढ़ी कूटनीतिक गतिविधियों का हिस्सा है. राष्ट्रपति ट्रंप ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से भी बातचीत की है, जबकि अमेरिकी अधिकारी चीन के साथ भी संपर्क में हैं.
यूरेनियम पर भी संकेत
लीविट के अनुसार, ईरान ने यह संकेत दिया है कि वह समृद्ध यूरेनियम सौंपने के लिए तैयार हो सकता है, जो पहले वार्ताओं में एक बड़ी बाधा रहा है.


