ईरान में सबसे दर्दनाक 'नौरोज'... नए साल पर बच्चियों की कब्रों पर फूल रखकर रो पड़े परिवार

ईरान में नौरोज इस बार खुशी के बजाय गम में बदला नजर आया. मीनाब स्कूल हमले में बड़ी संख्या में बच्चों की मौत के बाद लोग कब्रों पर त्योहार मना रहे हैं, जिससे पूरे देश में शोक का माहौल है.

Shraddha Mishra

नई दिल्ली: ईरान में मनाया जाने वाला फारसी नववर्ष ‘नौरोज’ हमेशा से खुशियों, नई शुरुआत और उम्मीदों का प्रतीक रहा है. लेकिन इस बार हालात बिल्कुल अलग हैं. जहां हर साल इस मौके पर घरों में रौनक और हंसी-खुशी का माहौल होता था, वहीं इस बार पूरे देश में सन्नाटा पसरा हुआ है. त्योहार की रौनक अब दर्द और आंसुओं में बदल चुकी है, और लोग जश्न मनाने के बजाय अपने खोए हुए अपनों को याद कर रहे हैं.

हाल ही में ईरान के मीनाब शहर में एक प्राथमिक स्कूल पर हुए हमले ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया. यह हमला उस समय हुआ था जब बच्चे अपनी कक्षाओं में पढ़ाई कर रहे थे. इस घटना में बड़ी संख्या में मासूम बच्चों की जान चली गई थी, जिससे हर परिवार गहरे दुख में डूब गया है. इस हादसे ने न केवल ईरान बल्कि पूरी दुनिया को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि युद्ध का सबसे बड़ा असर निर्दोष लोगों, खासकर बच्चों पर पड़ता है.

कब्रों पर मनाया गया त्योहार

इस बार नौरोज का दृश्य बेहद भावुक और दर्दनाक रहा. जहां पहले परिवार एक साथ बैठकर ‘हफ्त-सीन’ सजाते थे, अब वही सजावट बच्चों की कब्रों पर दिखाई दी. कई माता-पिता अपने बच्चों की याद में उनकी कब्रों के पास बैठकर त्योहार मना रहे हैं. वहां रखे छोटे-छोटे खिलौने, जूते और मिठाइयां उस दर्द को बयां कर रहे हैं, जिसे शब्दों में कहना मुश्किल है.

युद्ध ने छीन ली खुशियां

ईरान में चल रहे संघर्ष ने आम लोगों की जिंदगी को बुरी तरह प्रभावित किया है. लगातार हो रहे हमलों और हिंसा के कारण लोगों में डर और असुरक्षा का माहौल बना हुआ है. इस स्थिति में त्योहार जैसे खास मौके भी अपनी चमक खो चुके हैं और लोगों के लिए सिर्फ एक और दुख भरा दिन बनकर रह गए हैं.

इस घटना को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता जताई गई है. कई संगठनों ने इस तरह के हमलों को बेहद गंभीर बताया है और कहा है कि ऐसे हमले मानवीय मूल्यों के खिलाफ हैं. हालांकि, इस मामले को लेकर अलग-अलग पक्षों के अपने-अपने दावे हैं, लेकिन इस त्रासदी का असर हर किसी के दिल पर साफ दिखाई दे रहा है.

बढ़ता मानवीय संकट

लगातार जारी इस संघर्ष के कारण बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हुए हैं. कई लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हो गए हैं, जबकि हजारों लोग घायल हैं. इस पूरे हालात ने यह दिखा दिया है कि युद्ध केवल सीमाओं तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह आम लोगों की जिंदगी को भी पूरी तरह बदल देता है.

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