ईरान ने होर्मुज में जब्त किए दो जहाज, एक मालवाहक जहाज गुजरात जा रहा था
डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा दो सप्ताह के नाजुक युद्धविराम को आगे बढ़ाने के कुछ घंटों बाद ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने दो जहाजों पर हमला करने के बाद उन्हें जब्त कर लिया.

बुधवार को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंता उस समय और गहरा गई जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा दो सप्ताह के नाजुक युद्धविराम को आगे बढ़ाने की घोषणा के कुछ ही घंटों बाद ईरान की सैन्य इकाई इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने दो विदेशी जहाजों को निशाना बनाते हुए उन्हें अपने कब्जे में ले लिया.
क्षेत्र में अस्थिरता
इन जहाजों में एक मालवाहक पोत भी शामिल था, जो भारत के गुजरात की ओर जा रहा था, जिससे भारत के लिए यह घटना विशेष रूप से संवेदनशील बन गई है. यह घटना ऐसे समय में सामने आई है, जब बीते सप्ताह ही महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की कोशिश कर रहे भारतीय ध्वज वाले दो जहाजों पर भी हमले की खबरें आई थीं. लगातार हो रही इन घटनाओं ने क्षेत्र में अस्थिरता को बढ़ा दिया है और भारत तथा ईरान के बीच संबंधों में तनाव की आशंका जताई जा रही है.
विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटनाक्रम वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर भी असर डाल सकता है, क्योंकि यह मार्ग दुनिया के सबसे अहम तेल परिवहन रास्तों में से एक है. ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, पनामा ध्वज वाले “एमएससी फ्रांसेस्का” और लाइबेरिया ध्वज वाले “एपामिनोड्स” नामक दोनों जहाज अब आईआरजीसी की हिरासत में हैं और उन्हें ईरान की ओर ले जाया गया है. इन जहाजों के चालक दल और उनके हालात को लेकर फिलहाल अधिक जानकारी सामने नहीं आई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय समुदाय में चिंता बनी हुई है.
विश्लेषकों का क्या मानना है?
विश्लेषकों का मानना है कि ईरान की यह कार्रवाई हाल ही में ओमान की खाड़ी के पास अमेरिकी नौसेना द्वारा दो ईरानी ध्वज वाले मालवाहक जहाजों को जब्त किए जाने के जवाब के तौर पर देखी जा रही है. इस घटनाक्रम ने अमेरिका और ईरान के बीच पहले से जारी तनाव को और बढ़ा दिया है.
कुल मिलाकर, यह स्थिति न केवल क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक स्तर पर भी असर डाल सकती है.आने वाले दिनों में इस मामले पर कूटनीतिक गतिविधियां तेज होने की संभावना है.


