पीएम मोदी को आतंकवादी कहने पर फंसे मल्लिकार्जुन खरगे, चुनाव आयोग ने लिया एक्शन
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के पीएम नरेंद्र मोदी पर दिए विवादित बयान पर चुनाव आयोग ने नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. इस मुद्दे पर भाजपा ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है, जिससे राजनीतिक विवाद और तेज हो गया है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर मल्लिकार्जुन खरगे के विवादित बयान ने राजनीतिक माहौल गरमा दिया है. इस मामले को गंभीरता से लेते हुए चुनाव आयोग ने खरगे को कारण बताओ नोटिस जारी किया है और उनसे जवाब मांगा है. आयोग के एक अधिकारी के अनुसार, इस तरह के बयान चुनावी आचार संहिता के तहत गंभीर माने जाते हैं, इसलिए इस पर तुरंत संज्ञान लिया गया.
मल्लिकार्जुन खरगे की सफाई
दरअसल, मंगलवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान खरगे ने प्रधानमंत्री मोदी को 'आतंकवादी' कह दिया था. उनके इस बयान के सामने आते ही राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली. विवाद बढ़ने पर खरगे ने अपनी सफाई में कहा कि उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया गया. उनका कहना था कि उनका आशय यह था कि प्रधानमंत्री अपने राजनीतिक विरोधियों और आम लोगों पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उन्होंने सीधे तौर पर प्रधानमंत्री को आतंकवादी नहीं कहा.
इस पूरे मामले में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा. भाजपा नेताओं ने इस बयान को बेहद आपत्तिजनक बताते हुए चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज कराई. पार्टी ने कांग्रेस की आलोचना करते हुए उसे “शहरी नक्सल” विचारधारा से जोड़ने तक का आरोप लगाया. भाजपा का कहना है कि इस तरह की भाषा लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है और इससे राजनीतिक संवाद का स्तर गिरता है.
खरगे का बयान कब आया?
खरगे का यह बयान उस समय आया जब वे तमिलनाडु की राजनीति पर टिप्पणी कर रहे थे. वे AIADMK द्वारा भाजपा के साथ गठबंधन करने के फैसले की आलोचना कर रहे थे. इसी दौरान उन्होंने कहा कि जो लोग सी.एन. अन्नादुरई जैसे नेताओं के आदर्शों की बात करते हैं, वे भाजपा के साथ कैसे जा सकते हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि यह गठबंधन समानता और सामाजिक न्याय के सिद्धांतों को कमजोर करता है. साथ ही उन्होंने के. कामराज, पेरियार ई.वी. रामासामी, एम. करुणानिधि और भीमराव अंबेडकर के विचारों का भी जिक्र करते हुए कहा कि ऐसे गठबंधन उनके सिद्धांतों के विपरीत हैं.
कुल मिलाकर, इस बयान के बाद राजनीतिक विवाद तेज हो गया है और अब सबकी नजर चुनाव आयोग की अगली कार्रवाई पर टिकी है. यह मामला चुनावी माहौल में भाषा और मर्यादा के महत्व को एक बार फिर सामने लाता है.


