ईरान का टॉप सिक्योरिटी ऑफिसर निकला इजराइल का जासूस, तत्काल फांसी से लटकाया
ईरान की न्यायपालिका के बयान के मुताबिक मेहदी फरीद पैसिव डिफेंस कमेटी के निदेशक थे। यह निकाय देश के जरूरी बुनियादी ढांचे को हमलों से बचाने का काम करता है।

नई दिल्ली: ईरान और इजरायल के बीच तनाव जगजाहिर है। अमेरिका के साथ मिलकर इजरायल के हमलों से ईरान पहले से ही नाराज है। इसी बीच हाल ही में ईरान ने इजरायल के लिए जासूसी के दोषी एक बड़े अधिकारी मेहदी फरीद को फांसी दे दी।
ईरान की न्यायपालिका के बयान के मुताबिक मेहदी फरीद पैसिव डिफेंस कमेटी के निदेशक थे। यह निकाय देश के जरूरी बुनियादी ढांचे को हमलों से बचाने का काम करता है। युद्ध के माहौल के बीच इस तरह खबरें किसी भी देश को और भी ज्यादा चिंतित करने पर विवश कर देती है।
इजराइल के लिए जासूसी करने के लगे थे आरोप
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार अदालत ने मेहदी को इजरायली खुफिया एजेंसी मोसाद के साथ मिलकर जासूसी करने का दोषी पाया। उसे 'करप्शन ऑन अर्थ' के तहत मौत की सजा सुनाई गई। ईरान में यह सबसे गंभीर अपराधों में गिना जाता है। बयान में कहा गया कि फरीद ने साइबर के जरिए मोसाद से संपर्क किया और अपने पद का गलत इस्तेमाल कर बेहद संवेदनशील सैन्य और खुफिया जानकारी साझा की।
ऊंचे पद पर होने के कारण इजरायली अधिकारियों ने उस पर जल्दी भरोसा कर लिया था। बता दें कि यह फांसी ऐसे समय हुई है, जब ईरान में मौत की सजा के मामले तेजी से बढ़े हैं। मानवाधिकार संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस पर गहरी चिंता जताई है। वहीं पर्यवेक्षकों का मानना है कि अमेरिका और इजरायल के साथ सैन्य तनाव बढ़ने के बाद ईरानी सरकार फांसी की सजा बढ़ाकर डर का माहौल बनाना चाहती है।
विरोध प्रदर्शनों से जुड़े बंदियों को भी मिली सजा
गौरतलब है कि मानवाधिकार रिपोर्ट्स के मुताबिक सिर्फ जासूसी के मामलों में ही नहीं, बल्कि जनवरी के विरोध प्रदर्शनों से जुड़े बंदियों को भी फांसी दी जा रही है। इससे आरोप लग रहे हैं कि युद्ध जैसे हालात में न्यायपालिका को राजनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है।
अंतर्राष्ट्रीय संगठनों का कहना है कि इन मुकदमों में पारदर्शिता के बुनियादी नियम भी नहीं अपनाए जा रहे। फैसले बंद कमरों में सुनाए जा रहे हैं, जो अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संधियों का उल्लंघन है। मेहदी फरीद जैसे बड़े अधिकारी को फांसी दिए जाने से मामला और चर्चा में आ गया है।


