ईरान के साथ सीजफायर बढ़ाकर ट्रंप ने चली नई चाल, अर्थव्यवस्था को बनाया हथियार

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने रान के साथ युद्धविराम बढ़ा दिया है, लेकिन उन्होंने ईरान की अर्थव्यवस्था पर दबाव बनाने का नया तरीका अपनाया है. इस बात का खुलासा अमेरिकी वित्त मंत्री के एक पोस्ट से हुआ है.

Sonee Srivastav

नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ युद्धविराम बढ़ा दिया है, लेकिन इसके साथ ही उन्होंने ईरान की अर्थव्यवस्था पर दबाव बनाने का नया तरीका अपनाया है. युद्धविराम बढ़ाने को शुरू में शांति का कदम माना गया, लेकिन अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट की एक पोस्ट ने साफ कर दिया कि यह असल में आर्थिक रणनीति का हिस्सा है.

डोनाल्ड ट्रंप का नया प्लान

ट्रंप ने मंगलवार को सीजफायर को अनिश्चितकाल के लिए बढ़ाने की घोषणा की. पाकिस्तान की मध्यस्थता के अनुरोध पर यह फैसला लिया गया. ईरान से कहा गया है कि वह शांति प्रस्ताव दे, तब तक बातचीत चलती रहेगी, लेकिन ट्रंप ने स्पष्ट किया कि ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी जारी रहेगी.

अमेरिकी नौसेना होर्मुज की खाड़ी में ईरानी तेल जहाजों की आवाजाही रोक रही है. इसका मकसद ईरान को खार्ग आइलैंड पर अपना तेल उत्पादन बंद करने के लिए मजबूर करना है. खार्ग आइलैंड ईरान के तेल निर्यात का मुख्य केंद्र है.

ईरान पर आर्थिक दबाव क्यों?

अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा कि कुछ ही दिनों में खार्ग द्वीप के स्टोरेज टैंक भर जाएंगे. जब जगह खत्म हो जाएगी, तो ईरान को अपना तेल उत्पादन रोकना पड़ेगा. इससे ईरान की मुख्य आय पर सीधा प्रहार होगा. ईरान रोजाना लाखों बैरल तेल निकालता है. 

अगर उत्पादन बंद हुआ तो पुराने तेल कुओं को स्थायी नुकसान पहुंच सकता है. तेल कुएं बंद करने से पानी अंदर घुस सकता है, चट्टानें खराब हो सकती हैं और पाइपलाइन जाम हो सकती है. बता दें, एक बार कुआं बंद होने के बाद उसे दोबारा शुरू करना मुश्किल होता है और उत्पादन पहले जितना नहीं रहता.

ईरान पर असर

ईरान के पास अतिरिक्त तेल स्टोर करने की सीमित जगह है. नाकेबंदी के कारण शैडो फ्लीट से कुछ तेल बाहर निकल रहा है, लेकिन यह पर्याप्त नहीं है. अमेरिका पहले ही कई जहाजों को लौटा चुका है और कुछ को जब्त भी किया है. ट्रंप ने माना कि ईरानी सरकार में गहरे मतभेद हैं. 

अमेरिका का मानना है कि आर्थिक दबाव से ईरान कमजोर होगा और बातचीत की मेज पर मजबूरन अमेरिकी शर्तें मानेगा. सैन्य हमलों से ज्यादा यह रणनीति ईरान की अर्थव्यवस्था को लंबे समय तक नुकसान पहुंचा सकती है. ईरान ने नाकेबंदी को युद्ध का कदम बताया है और इसका विरोध किया है. पाकिस्तान में होने वाली वार्ता से पहले यह तनाव और बढ़ सकता है. 

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