पाक रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ की चेतावनी – 'वार्ता विफल हुई तो होगा खुला युद्ध'
ख्वाजा आसिफ ने कहा कि हमें उम्मीद है कि अफगानिस्तान शांति चाहता है, लेकिन इस्तांबुल में चल रही बातचीत असफल रही, तो हमें खुले युद्ध के लिए तैयार रहना होगा.

पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच जारी तनाव एक बार फिर गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है. करीब एक सप्ताह तक चली सीमा झड़पों और गोलीबारी के बाद 19 अक्टूबर को कतर की मध्यस्थता से दोनों देशों के बीच अस्थायी युद्धविराम लागू किया गया था.
ख्वाजा आसिफ ने अफगानिस्तान को क्यों दी चेतावनी?
हालांकि, अब भी हालात पूरी तरह शांत नहीं हैं. इसी पृष्ठभूमि में दोनों देशों के बीच इस्तांबुल में दूसरे दौर की शांति वार्ता शुरू हुई है, लेकिन वार्ता से पहले ही पाकिस्तान ने सख्त रुख अपना लिया है. पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने एक बयान में अफगानिस्तान को खुले शब्दों में चेतावनी दी है. उन्होंने कहा कि हमें उम्मीद है कि अफगानिस्तान शांति चाहता है, लेकिन यदि इस्तांबुल में चल रही बातचीत असफल रही, तो हमें खुले युद्ध के लिए तैयार रहना होगा. आसिफ के इस बयान के बाद दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय चिंता बढ़ा दी है.
विश्लेषकों का कहना है कि पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच विवाद की जड़ में कई मुद्दे हैं, जिनमें सबसे बड़ा कारण है तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान. पाकिस्तान का आरोप है कि टीटीपी के आतंकवादी अफगानिस्तान की धरती का इस्तेमाल कर उसके खिलाफ हमले कर रहे हैं, जबकि अफगान तालिबान प्रशासन इन आतंकियों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर रहा.
पाकिस्तान में आतंकी हमलों की संख्या में तेज़ी
दरअसल, अगस्त 2021 में काबुल पर तालिबान के कब्जे के बाद से पाकिस्तान में आतंकी हमलों की संख्या में तेज़ी आई है. पाकिस्तान सरकार का कहना है कि अफगानिस्तान से संचालित टीटीपी समूहों को न तो रोका जा रहा है और न ही उनके ठिकानों पर कार्रवाई हो रही है.
सीमा विवाद भी दोनों देशों के बीच लंबे समय से तनाव का एक अहम कारण है. करीब 2,611 किलोमीटर लंबी डूरंड रेखा, जो दोनों देशों की सीमाओं को विभाजित करती है अफगानिस्तान द्वारा अब तक औपचारिक रूप से मान्य नहीं की गई है. यही वजह है कि सीमा क्षेत्रों में अक्सर झड़पें, गोलीबारी और सीमा पार घुसपैठ की घटनाएं होती रहती हैं.
इस पूरे मामले में तुर्की और कतर मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं, ताकि दोनों देशों के बीच संवाद के जरिए समाधान निकाला जा सके. लेकिन पाकिस्तान के हालिया बयान से संकेत मिल रहे हैं कि अगर इस्तांबुल वार्ता में प्रगति नहीं होती, तो स्थिति फिर से हिंसक हो सकती है.


