पाकिस्तान को अमेरिका से नहीं मिली भीख...भारत-यूएस ट्रेड डील के बाद घर में ही हुई फजीहत
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते में भारतीय निर्यात पर टैरिफ 50% से घटाकर 18% किया गया, जबकि पाकिस्तान को 19% का सामना करना पड़ रहा है. ट्रंप ने मोदी की 'दोस्ती' का जिक्र कर ऐलान किया. पाकिस्तान में भारी नाराजगी, सोशल मीडिया पर व्यंग्य और आलोचना. पीटीआई ने चापलूसी वाली नीति को विफल बताया. भारत को निर्यात में 150 अरब डॉलर बढ़ोतरी की उम्मीद.

नई दिल्लीः भारत और अमेरिका के बीच हुए नए व्यापार समझौते ने पाकिस्तान में भारी नाराजगी पैदा कर दी है. 2 फरवरी 2026 को घोषित इस डील में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय निर्यात पर टैरिफ 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया. इसके बदले भारत ने रूसी तेल खरीद बंद करने और अमेरिकी उत्पादों पर टैरिफ कम करने पर सहमति जताई. पाकिस्तान को 19 प्रतिशत टैरिफ का सामना करना पड़ रहा है, जो भारत से 1 प्रतिशत ज्यादा है.
ट्रंप का ऐलान
आपको बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर इंडिया गेट और एक मैगजीन कवर की तस्वीरें शेयर करते हुए लिखा कि मोदी की 'दोस्ती और सम्मान' के चलते टैरिफ 18 प्रतिशत किया गया. पाकिस्तान में इसे झटका माना गया, क्योंकि वहां के नेताओं ने ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामांकित किया और शांति बोर्ड में उनकी नियुक्ति का समर्थन किया. इसके बावजूद पाकिस्तान को बेहतर डील नहीं मिली.
सोशल मीडिया पर पाकिस्तानी यूजर्स ने गुस्सा जताया. एक वायरल पोस्ट में यूजर उमर अली ने व्यंग्य किया कि ट्रंप ने पाकिस्तान सेना प्रमुख आसिम मुनीर के साथ 'रखैल जैसा' बर्ताव किया, सारे काम करवाए, लेकिन सौदा देने से इनकार कर दिया. उन्होंने एआई जनरेटेड इमेज शेयर की, जिसमें मुनीर दुर्लभ खनिजों का डिब्बा पकड़े उदास खड़े हैं.
विपक्ष ने साधा सरकार पर निशाना
पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के पूर्व मंत्री हम्माद अजहर ने कहा कि 21वीं सदी में विदेश नीति चापलूसी या व्यक्तिगत रिश्तों पर नहीं चलती. यह आर्थिक ताकत, टैरिफ और बाजार पहुंच का खेल है. भारत ने यूरोपीय संघ और अमेरिका के साथ डील करके इसे साबित किया. चापलूसी और फोटो से कुछ नहीं मिलता.
पत्रकार असद तूर ने चेतावनी दी कि यह फैसला पाकिस्तान की आर्थिक समस्याओं को और गहरा करेगा. निर्यात गिरेगा, विदेशी निवेश कम होगा और सौदेबाजी की ताकत खत्म हो जाएगी. इमरान रियाज खान ने कहा कि 'मुख्य विक्रेता' वाली रणनीति फेल हो गई. बलूचिस्तान के खनिज लकड़ी के बक्सों में भरकर दे सकते हैं, लेकिन सम्मान नहीं खरीद सकते.
डिजिटल क्रिएटर वजाहत खान ने लिखा कि ट्रंप एक व्यवसायी हैं. उन्होंने एक मैनेजर और दुकानदार को देखा, पाकिस्तान को दुकानदार वाला सौदा मिला, जबकि भारत साझेदार बनकर 18 प्रतिशत के साथ चला गया. जनता के जनादेश के बिना सरकार चलाने की यही कीमत है.
भारत के लिए फायदे
यह समझौता भारत के लिए बड़ा राहत है. इससे निर्यात में 150 अरब डॉलर तक की बढ़ोतरी की उम्मीद है. भारत ने रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखते हुए बातचीत की, जबकि पाकिस्तान व्यक्तिगत पैरवी पर ज्यादा निर्भर रहा. पाकिस्तानी विपक्ष इसे रणनीतिक विफलता बता रहा है. मीडिया और सोशल मीडिया पर 'मूवर्स, शेकर्स एंड बेगर्स' जैसी टिप्पणियां वायरल हो रही हैं.


