नई दिल्ली: संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने पाकिस्तान को कड़ा अल्टीमेटम दे दिया है. पाकिस्तान को इस महीने के अंत तक UAE को करीब 3.5 अरब डॉलर का कर्ज लौटाना होगा. अगर यह राशि चुकाई गई तो पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार पर भारी दबाव पड़ जाएगा.
पाकिस्तान पर UAE का 3 अरब डॉलर का कर्ज साल 2018 से जमा था, जो हर साल रोलओवर होता रहा, लेकिन सात साल बाद पहली बार रोलओवर का समझौता नहीं हो सका. इसके अलावा 45 करोड़ डॉलर का एक और पुराना कर्ज भी बकाया है. UAE ने साफ कहा है कि अप्रैल के अंत तक पूरा पैसा वापस चाहिए.
इस संकट से बचने के लिए पाकिस्तान सरकार सऊदी अरब और चीन से नया कर्ज और निवेश मांग रही है. ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, दोनों देश मिलकर 3.5 अरब डॉलर से ज्यादा की मदद दे सकते हैं. बातचीत कर्ज और निवेश दोनों पर चल रही है.
पाकिस्तान के पास फिलहाल करीब 16 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार है, जो सिर्फ तीन महीने के आयात के लिए काफी है, लेकिन कर्ज चुकाने के बाद यह और कम हो जाएगा.
हाल ही में प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ अमेरिका-ईरान शांति वार्ता की मेजबानी कर खुद को क्षेत्रीय मध्यस्थ बता रहे थे. उन्होंने कहा था कि पाकिस्तान का सिर गर्व से ऊंचा हो गया है, लेकिन अब आर्थिक तंगी के कारण पाकिस्तान को फिर से पैसे के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है.
हाल के महीनों में पाकिस्तान और सऊदी अरब के आर्थिक व सुरक्षा संबंध मजबूत हुए हैं. पाकिस्तान ने सऊदी सुरक्षा के लिए फाइटर जेट्स भी भेजे हैं. वहीं सऊदी और UAE के रिश्तों में कुछ खटास बताई जा रही है. यूएई का अचानक पैसा मांगना इसी असंतोष का संकेत माना जा रहा है.
पाकिस्तान का विदेश मंत्रालय इसे सामान्य वित्तीय मामला बता रहा है और किसी तनाव से इनकार कर रहा है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना पाकिस्तान की लगातार आर्थिक कमजोरी को उजागर करती है. पाकिस्तान अब सऊदी अरब, चीन और संभवतः कतर से कुल 5 अरब डॉलर तक की मदद की उम्मीद लगा रहा है. First Updated : Tuesday, 14 April 2026