पाकिस्तान में पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों के खिलाफ सड़कों पर उतरी जनता
पाकिस्तान में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी और महंगाई के खिलाफ जनता सड़कों पर उतर आई है. कई शहरों में जोरदार प्रदर्शन हो रहे हैं. लोगों ने सरकार पर टैक्स कम करने और राहत देने की मांग की है.

अमेरिका-ईरान तनाव के बीच पाकिस्तान में पेट्रोलियम कीमतों में तेज बढ़ोतरी और बढ़ती महंगाई ने आम जनता की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. हालात ऐसे हो गए हैं कि लोग सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करने को मजबूर हैं. कराची, जैकबाबाद, हैदराबाद, सुक्कुर समेत सिंध प्रांत के कई शहरों में बड़ी संख्या में लोगों ने रैलियां निकालीं और सरकार के खिलाफ नाराजगी जताई.
सिंध यूनाइटेड पार्टी के कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन
सुक्कुर में सिंध यूनाइटेड पार्टी (एसयूपी) के कार्यकर्ताओं ने प्रेस क्लब के बाहर अनोखे अंदाज में प्रदर्शन किया. कई प्रदर्शनकारी कफन पहनकर पहुंचे और भूख हड़ताल पर बैठ गए. पार्टी नेता ईदन जगिरानी ने पेट्रोल की बढ़ती कीमतों को लेकर सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि महंगाई ने आम लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है और मजदूर वर्ग के लिए रोजमर्रा का सामान खरीदना भी भारी पड़ रहा है.
इसी दौरान पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के कार्यकर्ताओं ने भी विरोध दर्ज कराया. पार्टी नेता गौहर खान खोसो ने कहा कि पेट्रोल की कीमत 378 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई है. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द राहत नहीं दी और अनावश्यक टैक्स खत्म नहीं किए, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा.
‘अवामी तहरीक’ ने रैली निकालकर दिया धरना
‘अवामी तहरीक’ ने भी सुक्कुर में तीर चौक से घंटा घर तक रैली निकालकर धरना दिया. नेताओं अहमद कटियार और सरवन जटोई ने आरोप लगाया कि सरकार पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव का बहाना बनाकर पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि कर रही है. उन्होंने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सिंध के मुख्यमंत्री मुराद अली शाह की सब्सिडी घोषणाओं को केवल दिखावा करार दिया.
कराची में नेशनल ट्रेड यूनियन फेडरेशन (एनटीयूएफ) और होम-बेस्ड वुमेन वर्कर्स फेडरेशन (एचबीडब्ल्यूडब्ल्यूएफ) ने संयुक्त प्रदर्शन किया, जिसमें मजदूर संगठनों और मानवाधिकार समूहों के लोग शामिल हुए. प्रदर्शनकारियों ने पेट्रोलियम लेवी खत्म करने और महंगाई के अनुरूप वेतन बढ़ाने की मांग उठाई.
वहीं, श्रमिक नेताओं नासिर मंसूर और जहरा खान ने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) और विश्व बैंक की नीतियों की आलोचना करते हुए सरकार से विदेशी कर्ज की अदायगी टालने और अधिकारियों को मिलने वाली ईंधन सुविधाएं खत्म करने की मांग की.
नेताओं की सरकार से अपील
जैकबाबाद में ‘आम इंसान तहरीक’ ने साइकिल रैली निकालकर यह दिखाने की कोशिश की कि महंगे ईंधन के कारण आम लोगों के लिए परिवहन कितना मुश्किल हो गया है. नेताओं ने सरकार से अपील की कि जनता पर बोझ डालने के बजाय अपने खर्चों में कटौती करे.
इस बीच, 3 अप्रैल को ह्यूमन राइट्स काउंसिल ने भी कराची प्रेस क्लब के बाहर प्रदर्शन करते हुए ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी को गलत बताया. संगठन ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द ठोस कदम नहीं उठाए, तो जनता का आक्रोश और बढ़ सकता है.


