खाड़ी में युद्ध छिड़ने से भारत में क्यों बरस रहा है पैसा? जान लीजिए सच्चाई, उड़ जाएंगे होश!
इजरायल-अमेरिका-ईरान युद्ध की वजह से भारत पर बड़ा असर पड़ रहा है. विदेश में काम करने वाले भारतीय मजदूरों का भविष्य को लेकर चिंता बढ़ता जा रहा है.

नई दिल्ली: खाड़ी क्षेत्र में चल रहे इजरायल-अमेरिका-ईरान युद्ध ने दुनिया भर की नजरें खींच ली है. इस युद्ध का भारत पर दोहरा असर पड़ रहा है. एक तरफ कच्चे तेल की कीमतें बढ़ रही हैं, दूसरी तरफ विदेश में काम करने वाले भारतीय मजदूरों का भविष्य अनिश्चित हो गया है.
खाड़ी से रेमिटेंस: भारत की बड़ी लाइफलाइन
भारत दुनिया का सबसे बड़ा रेमिटेंस प्राप्त करने वाला देश है. वित्त वर्ष 2024-25 में भारतीयों ने विदेश से रिकॉर्ड 135.4 अरब डॉलर घर भेजे. इसमें से करीब 38% यानी 51 अरब डॉलर सिर्फ यूएई, सऊदी अरब, कतर, कुवैत, ओमान और बहरीन जैसे खाड़ी देशों से आता है. विदेश मंत्रालय के अनुसार, इन छह देशों में करीब 88.8 लाख भारतीय काम कर रहे हैं.
इनमें से ज्यादातर अर्ध-कुशल या अकुशल मजदूर हैं, जो निर्माण, टैक्सी चलाने और सफाई जैसे काम करते हैं. उनके भेजे गए पैसे पर लाखों परिवार निर्भर है. यह पैसा केरल, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में स्कूल फीस, कर्ज चुकाने और घर बनाने में मदद करता है.
अभी क्यों आ रहा है ज्यादा पैसा?
युद्ध शुरू होने के बाद खाड़ी देशों से भारत में आने वाले पैसे में 20-30% की बढ़ोतरी देखी गई है, लेकिन यह अच्छी खबर नहीं है. मजदूर डर के मारे ज्यादा पैसा भेज रहे हैं क्योंकि उन्हें लग रहा है कि नौकरी जा सकती है या युद्ध के कारण हालात बिगड़ सकते हैं. यह बढ़ोतरी सिर्फ एहतियात है, जो लंबे समय तक नहीं चलेगी.
लंबा युद्ध तो बिगड़ेगा हालात
अगर युद्ध कुछ हफ्तों में खत्म हो गया तो नुकसान कम होगा, लेकिन अगर यह कई महीनों तक चला तो स्थिति गंभीर हो जाएगी. निर्माण काम रुक सकते हैं, कंपनियां मजदूरों को निकाल सकती है और खाड़ी सरकारे विदेशी कामगारों पर सख्ती कर सकती है. मार्च के अंत तक वैसे ही 2.2 लाख से ज्यादा भारतीय खाड़ी से वापस लौट चुके हैं. लंबे युद्ध में यह संख्या और बढ़ सकती है.
अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ेगा?
खाड़ी से आने वाला रेमिटेंस भारत के चालू खाता घाटे को कम करने में बड़ी मदद करता है. तेल महंगा होने से आयात बिल बढ़ रहा है. क्रूड ऑयल की कीमत पहले 72 डॉलर प्रति बैरल थी, अब 100 डॉलर के पार पहुंच गई है.
अगर रेमिटेंस घटा और तेल महंगा रहा तो रुपये पर दबाव बढ़ेगा और अर्थव्यवस्था को झटका लग सकता है. गरीब परिवार सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे क्योंकि उनके पास आय का कोई दूसरा जरिया नहीं है.


