TMC नेता का विवादित बयान, 'वोट नहीं दिया तो छोड़ना पड़ेगा इलाका'
टीएमसी नेता इमरान हसन मोल्ला के धमकी भरे बयान से पश्चिम बंगाल चुनाव से पहले सियासी माहौल गरमा गया है. विपक्ष ने इसे लोकतंत्र के खिलाफ बताते हुए कड़ी निंदा की है और चुनाव में जवाब देने की बात कही है.

पश्चिम बंगाल में 2026 के विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी माहौल लगातार गरमाता जा रहा है. इसी बीच सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के एक युवा नेता के बयान ने नया विवाद खड़ा कर दिया है. दक्षिण 24 परगना जिले के मोगराहाट इलाके में आयोजित एक चुनावी सभा के दौरान टीएमसी नेता इमरान हसन मोल्ला ने मतदाताओं को लेकर आपत्तिजनक और धमकी भरी भाषा का इस्तेमाल किया. उनके बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रहा है, जिससे राजनीतिक माहौल और तनावपूर्ण हो गया है.
टीएमसी नेता इमरान हसन मोल्ला ने क्या कहा?
सभा को संबोधित करते हुए मोल्ला ने साफ शब्दों में कहा कि अगर लोगों ने टीएमसी को वोट नहीं दिया तो उन्हें इलाके में रहने का अधिकार नहीं मिलेगा. उन्होंने यहां तक कहा कि जो लोग पार्टी का समर्थन नहीं करेंगे, उनके लिए यहां रहना मुश्किल कर दिया जाएगा. अपने बयान को और कड़ा बनाते हुए उन्होंने चेतावनी दी कि विरोध करने वालों की हालत खराब कर दी जाएगी. इसके साथ ही उन्होंने राज्य सरकार की योजनाओं, खासकर लक्ष्मी भंडार योजना का जिक्र करते हुए इशारा किया कि वोट नहीं देने वालों को इन सुविधाओं से वंचित होना पड़ सकता है.
टीएमसी नेता ने 2021 के विधानसभा चुनाव का हवाला देते हुए कहा कि उस समय पार्टी ने कथित तौर पर “गलती करने वालों” को नजरअंदाज कर दिया था, लेकिन 2026 में ऐसा नहीं होगा. उन्होंने समर्थकों से कहा कि अगर उन्हें इलाके में रहना है तो पार्टी के साथ रहना होगा, अन्यथा उन्हें परिवार समेत वहां से जाना पड़ सकता है. इस तरह के बयानों ने स्वतंत्र और निष्पक्ष मतदान की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
विपक्षी दलों की तीखी प्रतिक्रिया
इस घटना के बाद विपक्षी दलों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है. भाजपा नेता सजल घोष ने इस बयान की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि ऐसे नेता लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ हैं और चुनाव के बाद जनता उन्हें जवाब देगी. उन्होंने यह भी दावा किया कि भविष्य में ऐसे नेताओं को खुद अपने क्षेत्रों से भागना पड़ेगा. उल्लेखनीय है कि इससे पहले भी बहरामपुर इलाके में टीएमसी के कुछ नेताओं पर मतदाताओं की निगरानी और वोटिंग पर नजर रखने जैसे आरोप लग चुके हैं.
जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहे हैं, वैसे-वैसे राज्य में राजनीतिक बयानबाजी, आरोप-प्रत्यारोप और तनाव की स्थिति बढ़ती जा रही है, जिससे निष्पक्ष चुनाव कराना एक बड़ी चुनौती बनता दिख रहा है.


