ईरान-अमेरिका तनाव ने यूक्रेन को छोड़ दिया अकेला, जेलेंस्की पर टूट पड़ा रूस का कहर!
ईरान और अमेरिका के बीच जारी युद्ध ने यूक्रेन-रूस युद्ध को पीछे धकेल दिया है. रूस ने सोमवार तड़के हुए इस हमले में रिहायशी इलाकों को भारी नुकसान पहुंचाया है.

नई दिल्ली: दुनिया का ध्यान इन दिनों अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव पर केंद्रित है. फरवरी 2026 में शुरू हुए इस संघर्ष ने यूक्रेन-रूस युद्ध को पीछे धकेल दिया है. अमेरिका ईरान पर हमलों और क्षेत्रीय तनाव में व्यस्त दिख रहा है, जिससे यूक्रेन को अकेले लड़ना पड़ रहा है.
रूस का ओडेसा पर हमला
यूक्रेन में रूस का हमला जारी है. जंग के पांचवें साल में ओडेसा के बंदरगाह क्षेत्र में हालिया ड्रोन हमले ने स्थिति और खराब कर दी. सोमवार तड़के हुए इस हमले में रिहायशी इलाकों को भारी नुकसान पहुंचा. क्षेत्रीय अधिकारियों के अनुसार, इस हमले में तीन लोगों की मौत हो गई, जिनमें एक मासूम बच्चा भी शामिल है. दस से ज्यादा लोग घायल हुए.
यह हमला यूक्रेन के सबसे महत्वपूर्ण ब्लैक सी पोर्ट ओडेसा पर किया गया, जो देश की अर्थव्यवस्था और सहायता के लिए अहम है. राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की की चिंताएं बढ़ गई हैं क्योंकि रूस लगातार नागरिक क्षेत्रों को निशाना बना रहा है.
यूक्रेन का जवाबी हमला
यूक्रेन की सेना चुप नहीं बैठी. जवाब में यूक्रेन ने रूस के तेल निर्यात केंद्र पर हमला किया. रूस के बाल्टिक बंदरगाह प्रिमोर्स्क के पास प्रमुख तेल पाइपलाइन और लुकोइल रिफाइनरी को ड्रोन से निशाना बनाया गया.
यूक्रेन के ड्रोन फोर्स कमांडर रॉबर्ट ब्रोवडी ने पुष्टि की कि उनके मानवरहित सिस्टम ने इन लक्ष्यों को सफलतापूर्वक हिट किया. रूस ने शुरुआत में नुकसान छिपाने की कोशिश की. लेनिनग्राद क्षेत्र के गवर्नर ने पहले पाइपलाइन क्षतिग्रस्त होने की बात कही, लेकिन बाद में बयान बदल दिया और कहा कि केवल एक ईंधन टैंक प्रभावित हुआ, जिसे नियंत्रित कर लिया गया.
जेलेंस्की की बढ़ती मुश्किलें
अमेरिका का ध्यान ईरान पर शिफ्ट होने से यूक्रेन को सैन्य और आर्थिक मदद में कमी का खतरा है. जेलेंस्की को अब रूस के हमलों से निपटने के लिए अपने संसाधनों पर ज्यादा निर्भर रहना पड़ रहा है. ओडेसा जैसे महत्वपूर्ण इलाकों पर हमले से नागरिकों की सुरक्षा और बंदरगाहों की कार्यक्षमता प्रभावित हो रही है.
यूक्रेन रूस की ऊर्जा सुविधाओं को निशाना बनाकर जवाब दे रहा है, लेकिन लंबे समय तक अकेले लड़ना चुनौतीपूर्ण है. जेलेंस्की पर दबाव बढ़ रहा है क्योंकि अंतरराष्ट्रीय ध्यान कम होने से सहायता और समर्थन प्रभावित हो सकता है.
यह स्थिति दिखाती है कि वैश्विक संकट एक-दूसरे से जुड़े हैं. जब एक मोर्चे पर तनाव बढ़ता है, तो दूसरे मोर्चे पर संघर्ष करने वाले देश अकेले पड़ जाते हैं. जेलेंस्की के लिए अब चुनौती है कि वे अपनी सेना को मजबूत रखें और अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान यूक्रेन की ओर वापस लाएं.


