स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर चीन-ईरान गठजोड़! क्या ‘ड्रैगन’ छीन लेगा दुनिया की तेल सप्लाई का कंट्रोल?

अमेरिका-ईरान तनाव के बीच होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से वैश्विक तेल संकट गहरा गया है. विश्लेषकों के मुताबिक चीन इस मौके का फायदा उठाकर ईरान के साथ मिलकर इस अहम जलमार्ग पर नियंत्रण पाने की रणनीति बना रहा है.

Shraddha Mishra

दुनिया इस समय एक बड़े तनाव के दौर से गुजर रही है. एक तरफ ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ता टकराव है, तो दूसरी ओर इस पूरे संकट के बीच एक और ताकत चुपचाप अपनी रणनीति को आगे बढ़ा रही है. यही वजह है कि वैश्विक राजनीति का संतुलन धीरे-धीरे बदलता नजर आ रहा है. जिस समुद्री रास्ते को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है, वह दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक है.

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है. हाल के हमलों के बाद इस मार्ग पर असर पड़ा है, जिससे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है और आपूर्ति में बाधाएं भी सामने आई हैं. यही कारण है कि इस मार्ग पर नियंत्रण को लेकर कई देशों की नजरें टिकी हुई हैं. अगर कोई देश यहां मजबूत पकड़ बना लेता है, तो वह वैश्विक ऊर्जा बाजार पर बड़ा प्रभाव डाल सकता है.

चीन की बढ़ती दिलचस्पी

विश्लेषकों का मानना है कि चीन इस मौके को एक बड़े अवसर के रूप में देख रहा है. वह ईरान के साथ अपने संबंधों को मजबूत कर इस क्षेत्र में अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर सकता है. अगर ऐसा होता है, तो दुनिया के कई हिस्सों में तेल की सप्लाई पर उसका प्रभाव बढ़ सकता है. चीन पहले से ही ईरान से तेल खरीदता रहा है, वह भी ऐसे समय में जब कई देशों ने प्रतिबंध लगा रखे हैं. इससे दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंध और मजबूत हुए हैं.

रणनीतिक साझेदारी का असर

कुछ साल पहले दोनों देशों के बीच लंबी अवधि की साझेदारी का समझौता हुआ था. इसके तहत निवेश, ऊर्जा और अन्य क्षेत्रों में सहयोग बढ़ा है. इस समझौते ने चीन को इस क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत करने का अवसर दिया है. इसके अलावा, चीन ने खाड़ी क्षेत्र के कई देशों में बंदरगाह, पाइपलाइन और रेल परियोजनाओं में निवेश किया है. इससे न केवल व्यापार को बढ़ावा मिला है, बल्कि इस क्षेत्र में उसका प्रभाव भी बढ़ा है.

क्या घट रही है अमेरिका की भूमिका?

विशेषज्ञों का मानना है कि इस क्षेत्र में अमेरिका की सक्रियता पहले के मुकाबले कुछ कम हुई है. ऐसे में अन्य देश इस खाली जगह को भरने की कोशिश कर रहे हैं. हालांकि, अभी भी सैन्य ताकत के मामले में अमेरिका का दबदबा बना हुआ है, लेकिन बदलते हालात चीन के लिए नए अवसर पैदा कर रहे हैं.

भारत समेत दुनिया पर असर

इस पूरे घटनाक्रम का असर सिर्फ बड़े देशों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव आम लोगों तक पहुंच रहा है. तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से महंगाई बढ़ सकती है और आर्थिक दबाव भी बढ़ेगा. भारत जैसे देशों के लिए यह स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है, क्योंकि यहां ऊर्जा की जरूरतें काफी हद तक आयात पर निर्भर हैं. तेल महंगा होने से बाजार और आम जनता दोनों पर असर पड़ सकता है.

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