PM कार्नी ने ओटावा गुरुद्वारा में पत्नी के साथ लंगर परोसा, कहा- कनाडा सिखों का दूसरा घर
मार्क कार्नी ने सिख परंपराओं के प्रति गहरा सम्मान व्यक्त करते हुए कहा कि सिख समुदाय कनाडा की पहचान और प्रगति का अनमोल हिस्सा है. उन्होंने सिख कनाडाईयों के योगदान को याद करते हुए भावुक होकर कनाडा को उनका ‘दूसरा घर’ बताया.

कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने सिख हेरिटेज माह के मौके पर अपनी पत्नी डायना फॉक्स कार्नी के साथ ओटावा के गुरुद्वारा साहिब पहुंचकर सिख समुदाय के साथ गहरी एकजुटता दिखाई. इस दौरान उन्होंने सिख परंपराओं का पूरा सम्मान करते हुए अरदास में शिरकत की और संगत के साथ धार्मिक कार्यक्रमों में सक्रिय रूप से भाग लिया. गुरुद्वारे पहुंचने पर प्रधानमंत्री दंपति ने लंगर सेवा में भी हाथ बंटाया. उन्होंने खुद संगत के लिए लंगर परोसा और सेवादारों के साथ मिलकर व्यवस्था संभालने में सहयोग किया. गुरुद्वारे में उपस्थित लोगों ने उनका स्वागत किया.
गुरुद्वारा पहुंचकर प्रधानमंत्री ने की लंगर सेवा
प्रधानमंत्री मार्क कार्नी और उनकी पत्नी डायना फॉक्स कार्नी ने गुरुद्वारे में लंगर परोसा और सेवादारों के साथ मिलकर पूरी व्यवस्था में मदद की. इस मौके पर सिख समुदाय के सदस्यों ने प्रधानमंत्री के आगमन पर अपनी खुशी जाहिर की और उन्हें हार्दिक अभिनंदन दिया.
Canada is home to the second-largest Sikh community in the world.
This Sikh Heritage Month, we celebrate the generations of Sikh Canadians who have contributed to our shared prosperity, strengthened our communities, and helped build a stronger Canada. pic.twitter.com/JmrUq1b6xn— Mark Carney (@MarkJCarney) April 18, 2026
मार्क कार्नी का सोशल मीडिया संदेश
इस अवसर पर प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने सोशल मीडिया पर एक संदेश साझा करते हुए कहा कि कनाडा विश्व में दूसरा सबसे बड़ा सिख समुदाय का घर है. उन्होंने कहा कि सिख विरासत माह में हम उन पीढ़ियों के सिख कनाडाई लोगों का सम्मान करते हैं, जिन्होंने देश की समृद्धि, समुदायों की मजबूती और एक मजबूत कनाडा के निर्माण में अहम योगदान दिया है.
सिख विरासत माह का महत्व
सिख विरासत माह हर साल अप्रैल के महीने में मनाया जाता है, जो मुख्य रूप से कनाडा और अन्य पश्चिमी देशों में सिख समुदाय के इतिहास, संस्कृति, कला और उनके योगदान का जश्न मनाता है. इस महीने बैसाखी का त्योहार भी आता है, जो खालसा पंथ की स्थापना की याद दिलाता है. ये महीना सिखों द्वारा समाज, अर्थव्यवस्था और संस्कृति में डाले गए बहुमूल्य योगदान को पहचानने और साझा करने का अवसर है.


