‘अब निर्णायक दौर में हैं भारत और इटली के संबंध’, पीएम मोदी और पीएम मेलोनी ने साझा किया खास ब्लॉग

दोनों प्रधानमंत्रियों ने अपने इस ब्लॉग में कहा कि मेड इन इटली पूरी दुनिया में गुणवत्ता और उत्कृष्टता का प्रतीक रहा है। आज इसकी स्वाभाविक साझेदारी मेक इन इंडिया पहल के हाई क्वालिटी लक्ष्यों के साथ बन रही है।

Sachin Hari Legha

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने दोनों देशों के रिश्तों, आर्थिक तरक्की और आपसी सहयोग पर एक साझा ब्लॉग लिखा है। इस ब्लॉग में भारत और इटली के बीच आर्थिक गतिशीलता, सामाजिक रचनात्मकता और हजारों साल पुरानी सभ्यतागत समझ को विस्तार से सामने रखा गया है। दोनों नेताओं का कहना है कि आज दुनिया जिस बदलाव के दौर से गुजर रही है, उसमें भारत और इटली की साझेदारी बेहद अहम हो गई है।

मेड इन इटली और मेक इन इंडिया का मजबूत मेल   

आपको बताते चलें कि दोनों प्रधानमंत्रियों ने अपने इस ब्लॉग में कहा कि मेड इन इटली पूरी दुनिया में गुणवत्ता और उत्कृष्टता का प्रतीक रहा है। आज इसकी स्वाभाविक साझेदारी मेक इन इंडिया पहल के हाई क्वालिटी लक्ष्यों के साथ बन रही है। भारत में उत्पादन को लेकर इटली की कंपनियों की रुचि लगातार बढ़ रही है। वहीं इटली में भी भारतीय उद्योग की मौजूदगी मजबूत हो रही है। दोनों देशों में ऐसी कंपनियों की संख्या अब 1000 से ज्यादा हो चुकी है। यह आंकड़ा हमारी सप्लाई चेन को और मजबूती देने वाला संकेत है।

रणनीतिक साझेदारी के नए आयाम   

पीएम मोदी अपने विदेश दौरे के आखिरी चरण में बुधवार को इटली पहुंचे। इस दौरान कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। दोनों नेताओं ने लिखा कि भारत और इटली के संबंध अब निर्णायक दौर में हैं। पिछले कुछ सालों में दोनों देशों के रिश्तों में जबरदस्त तेजी आई है। यह दोस्ती अब सिर्फ सौहार्द तक सीमित नहीं है बल्कि स्वतंत्रता, लोकतंत्र और भविष्य को लेकर साझा विजन पर आधारित एक सच्ची स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप बन चुकी है। 

ब्लॉग में कहा गया कि अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था गहरे बदलाव से गुजर रही है। ऐसे समय में इटली और भारत की साझेदारी अब केवल राजनीतिक और संस्थागत संवाद तक नहीं है। यह एक नए और व्यापक आयाम हासिल कर रही है। इसमें हमारी आर्थिक ताकत, सामाजिक रचनात्मकता और हजारों साल पुरानी सभ्यता की समझ एक साथ जुड़ रही है।

21वीं सदी की चुनौतियों पर साझा समझ   

दोनों नेताओं ने माना कि 21वीं सदी में समृद्धि और सुरक्षा इस बात से तय होगी कि देश इनोवेशन, एनर्जी ट्रांजिशन और स्ट्रैटेजिक संप्रभुता को कितनी मजबूती से संभालते हैं। इसी सोच के साथ भारत और इटली ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को और गहरा तथा विविध बनाने का संकल्प लिया है। इसका मकसद नए लक्ष्यों को हासिल करना और एक दूसरे की पूरक क्षमताओं का बेहतर इस्तेमाल करना है।

2029 तक 20 बिलियन यूरो का ट्रेड टारगेट   

ब्लॉग में यूरोपियन यूनियन और भारत के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट का भी जिक्र है। दोनों नेताओं का मानना है कि यह समझौता दोनों तरफ से ट्रेड और इनवेस्टमेंट बढ़ाने का रास्ता खोलेगा। हमारा लक्ष्य 2029 तक इटली और भारत के बीच 20 बिलियन यूरो का ट्रेड टारगेट हासिल करना है और उससे भी आगे जाना है। इसके लिए डिफेंस और एयरोस्पेस, क्लीन टेक्नोलॉजी, मशीनरी, ऑटोमोटिव कंपोनेंट्स, केमिकल्स, फार्मास्युटिकल्स, टेक्सटाइल, एग्री फूड और टूरिज्म जैसे सेक्टर्स पर खास फोकस किया जाएगा।

AI और डिजिटल इकोसिस्टम पर जोर   

इस साझा ब्लॉग में भारत के डिजिटल इकोसिस्टम की भी तारीफ की गई है। दोनों नेताओं ने लिखा कि भारत का डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर ग्लोबल साउथ के कई देशों में अपनी मजबूत पहचान बना चुका है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब समाज और ग्लोबल अर्थव्यवस्था पर गहरा असर डाल रही है। इटली और भारत लंबे समय से यह सुनिश्चित करने के लिए साथ काम कर रहे हैं कि एआई का विकास जिम्मेदारीपूर्ण और मानव केंद्रित हो। 

भारत और इटली एआई को समावेशी विकास के एक मजबूत माध्यम के रूप में देखते हैं। खासकर ग्लोबल साउथ के लिए, जहां डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और सुलभ बहुभाषी टेक्नोलॉजी डिजिटल विभाजन को कम कर सकती है। भारत के मानव विजन और इटली की एल्गोर एथिक्स की सोच के आधार पर यह साझेदारी एआई को सामाजिक सशक्तिकरण का जरिया बनाना चाहती है। हमारा नजरिया भारत की डिजिटल क्षमता को इटली की एथिकल और इंडस्ट्रियल विशेषज्ञता से जोड़ता है ताकि टेक्नोलॉजी मानव गरिमा की सेवा करे।

सांस्कृतिक मूल्यों से जुड़ी साझेदारी   

पीएम मोदी और पीएम मेलोनी ने यह भी लिखा कि हम अपनी साझा चुनौतियों का समाधान दोनों देशों के बीच गहरी साझेदारी और लंबे सांस्कृतिक संबंधों के आधार पर कर सकते हैं। भारतीय संस्कृति में धर्म की अवधारणा जिम्मेदारी की भावना को दर्शाती है। वहीं वसुधैव कुटुम्बकम यानी पूरी दुनिया एक परिवार है का सिद्धांत आज के डिजिटल युग में और प्रासंगिक हो गया है। 

ऐसे मूल्य इटली की पुनर्जागरण काल की मानवतावादी परंपरा में भी दिखाई देते हैं। यह परंपरा हर व्यक्ति की गरिमा और समाजों को जोड़ने में संस्कृति की शक्ति को महत्व देती है। दोनों देशों का मानना है कि संस्कृति और तकनीक का यह संगम दुनिया को बेहतर दिशा दे सकता है।

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