मोदी की नई कूटनीति! कारपूलिंग से दुनिया को दिखा रहे मजबूत रिश्ते

पीएम मोदी ने पिछले कुछ वर्षों में विदेशी नेताओं के साथ कारपूलिंग और आत्मीय संबोधनों के जरिए मजबूत द्विपक्षीय रिश्तों का संदेश दिया है. ओबामा, पुतिन, मैक्रॉन और मेलोनी समेत कई नेताओं के साथ उनकी यह खास केमिस्ट्री वैश्विक कूटनीति में चर्चा का विषय बनी हुई है.

Suraj Mishra
Edited By: Suraj Mishra

नई दिल्ली: दुनिया की राजनीति में केवल आधिकारिक बयान और समझौते ही रिश्तों की गहराई तय नहीं करते, बल्कि नेताओं का व्यवहार, हावभाव और आपसी जुड़ाव भी बहुत मायने रखता है. पीएम मोदी ने अपने कार्यकाल में कई बार ऐसे संकेत दिए हैं, जिनसे भारत और दूसरे देशों के रिश्तों की मजबूती साफ नजर आती है. कभी किसी विदेशी नेता को 'मेरा प्रिय मित्र' कहकर संबोधित करना, तो कभी किसी राष्ट्राध्यक्ष के साथ सहज अंदाज में सफर करना. मोदी की कूटनीति में व्यक्तिगत संबंधों की झलक साफ दिखाई देती है.

विशेष संबोधनों के लिए चर्चा में पीएम मोदी

प्रधानमंत्री मोदी लंबे समय से अपने विशेष संबोधनों के लिए चर्चा में रहे हैं. उन्होंने यूएई के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान को कई मौकों पर 'मेरे भाई' कहा, जबकि फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रोन को 'मेरा प्रिय मित्र' कहकर संबोधित किया. अंतरराष्ट्रीय राजनीति में जहां औपचारिकता ज्यादा दिखती है, वहां इस तरह की आत्मीयता भारत के मजबूत रिश्तों को अलग पहचान देती है.

पिछले कुछ समय में मोदी ने एक नई शैली भी अपनाई है, जिसे 'कारपूल कूटनीति' कहा जा रहा है. इसमें वह चुनिंदा विदेशी नेताओं के साथ एक ही वाहन में सफर करते नजर आए हैं. इस तरह के दृश्य केवल प्रोटोकॉल का हिस्सा नहीं माने जाते, बल्कि नेताओं के बीच व्यक्तिगत विश्वास और सहजता का संकेत भी देते हैं.

ओबामा के साथ कार यात्रा

इसकी शुरुआत 2014 में हुई थी, जब अमेरिका दौरे के दौरान मोदी ने तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के साथ एक ही कार में यात्रा की थी. उस समय यह तस्वीर काफी चर्चा में रही थी. बाद में विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया था कि सफर के दौरान मोदी ने मजाकिया अंदाज में कहा था कि अमेरिकी राष्ट्रपति की लिमोजिन ‘द बीस्ट’ उनके गुजरात स्थित माता-पिता के घर जितनी बड़ी है.

इसके बाद 2025 में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के दौरान मोदी और रूसी राष्ट्रपति पुतिन की कारपूलिंग ने सुर्खियां बटोरीं. दोनों नेता बैठक स्थल तक एक ही गाड़ी में पहुंचे थे. बाद में पुतिन की भारत यात्रा के दौरान भी दोनों साथ नजर आए.

कीर स्टार्मर के साथ पीएम मोदी का साझा सफर

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर के साथ मुंबई में मोदी का साझा सफर भी काफी चर्चित रहा. वहीं जॉर्डन के क्राउन प्रिंस अल हुसैन बिन अब्दुल्ला द्वितीय ने अम्मान यात्रा के दौरान खुद कार चलाकर मोदी को अपने साथ ले जाकर खास सम्मान दिया.

इथियोपिया दौरे के दौरान प्रधानमंत्री अबी अहमद ने खुद मोदी को होटल तक छोड़ा और उन्हें शहर के कई महत्वपूर्ण स्थान भी दिखाए. फ्रांस यात्रा के दौरान मोदी और मैक्रॉन की दोस्ताना केमिस्ट्री भी खुलकर सामने आई, जब दोनों एक साथ कार में सफर करते नजर आए.

इसके अलावा जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़, यूएई के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद और इजरायल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू के साथ भी मोदी की कारपूलिंग चर्चा का विषय बनी. इन तस्वीरों और मुलाकातों ने यह संकेत दिया कि भारत की विदेश नीति अब केवल औपचारिक बैठकों तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यक्तिगत विश्वास और मजबूत रिश्तों पर भी आधारित है.

ताजा खबरें

ट्रेंडिंग वीडियो