मेलोडी इतनी चॉकलेटी क्यों है? आखिर क्या है इस टॉफी का राज, 1983 से आज तक लोगों की फेवरेट
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इन दिनों इटली दौरे पर हैं, जहां उन्होंने इटली की पीएम जॉर्जिया मेलोनी को मेलोडी चॉकलेट गिफ्ट की. मेलोनी ने इसका वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया, जिसके बाद ‘मेलोडी’ चॉकलेट इंटरनेट पर चर्चा का बड़ा विषय बन गई.

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इटली यात्रा के दौरान का एक खास पल सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. वायरल वीडियो में पीएम मोदी इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को मशहूर मेलोडी चॉकलेट गिफ्ट करते नजर आ रहे हैं. इस वीडियो को खुद मेलोनी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शेयर किया, जिसके बाद इंटरनेट पर मेलोडी चॉकलेट की चर्चा फिर से तेज हो गई है.
दरअसल, पीएम मोदी और जॉर्जिया मेलोनी को सोशल मीडिया पर अक्सर मेलोडी के नाम से भी जोड़ा जाता है. कुछ समय पहले #Melodi हैशटैग काफी वायरल हुआ था. अब पीएम मोदी द्वारा मेलोडी चॉकलेट गिफ्ट किए जाने के बाद यह ब्रांड एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है.
मेलोनी ने शेयर किया वीडियो
इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर करते हुए लिखा, गिफ्ट के लिए धन्यवाद. वीडियो में पीएम मोदी उन्हें मेलोडी चॉकलेट का स्टैंडर्ड पैक देते दिखाई दे रहे हैं. इस खास पल ने सोशल मीडिया यूजर्स का ध्यान खींच लिया और देखते ही देखते मेलोडी ट्रेंड करने लगी.
Thank you for the gift pic.twitter.com/7ePxbJwPbA
— Giorgia Meloni (@GiorgiaMeloni) May 20, 2026
कब लॉन्च हुई थी मेलोडी चॉकलेट?
मेलोडी चॉकलेट को पारले प्रोडक्ट्स बनाती है. इस कैंडी की सबसे बड़ी खासियत इसका अनोखा स्वाद है. इसका बाहरी हिस्सा कड़े कैरामल से बना होता है, जबकि अंदर गाढ़ी चॉकलेट भरी होती है. पारले प्रोडक्ट्स ने इस कैंडी को साल 1983 में लॉन्च किया था. लॉन्च के बाद यह कैंडी तेजी से लोगों की पसंद बन गई और आज भी इसकी लोकप्रियता बरकरार है.
1929 में हुई थी पारले प्रोडक्ट्स की शुरुआत
पारले प्रोडक्ट्स की स्थापना साल 1929 में मोहनलाल दयाल चौहान ने मुंबई के विले पार्ले इलाके में की थी. शुरुआत में कंपनी जर्मनी से आयात की गई मशीनों से मिठाई और कैंडी बनाती थी. इसके बाद 1939 में कंपनी ने बिस्कुट निर्माण शुरू किया. पारले-जी बिस्कुट धीरे-धीरे देश के सबसे लोकप्रिय ब्रांड्स में शामिल हो गया.
कंपनी का कारोबार 15 हजार करोड़ रुपये के पार
बिस्कुट और कनफेक्शनरी कारोबार से जुड़ी इस कंपनी का पिछले वित्त वर्ष में रेवेन्यू 8.5 फीसदी बढ़कर 15,568.49 करोड़ रुपये पहुंच गया. इसी अवधि में कंपनी का मुनाफा 979.53 करोड़ रुपये दर्ज किया गया. भारत के कनफेक्शनरी बाजार में कंपनी की हिस्सेदारी करीब 15 फीसदी बताई जाती है. हालांकि कंपनी अलग-अलग कैंडी ब्रांड्स की कमाई सार्वजनिक नहीं करती, लेकिन बताया जाता है कि कनफेक्शनरी कारोबार में मेलोडी का बड़ा योगदान है.
विज्ञापन ने बनाया घर-घर का ब्रांड
मेलोडी की सफलता में उसके विज्ञापन अभियान की बड़ी भूमिका रही. इसकी मशहूर टैगलाइन 'मेलोडी इतनी चॉकलेटी क्यों है' लोगों की जुबान पर चढ़ गई थी. इसके जवाब में कहा जाता था, मेलोडी खाओ, खुद जान जाओ. इस विज्ञापन ने ब्रांड को देशभर में अलग पहचान दिलाई.
आज भी कायम है मेलोडी का जलवा
समय के साथ बाजार में कई नई कैंडी और चॉकलेट ब्रांड्स आए, लेकिन मेलोडी की लोकप्रियता अब भी बनी हुई है. फिलहाल पारले प्रोडक्ट्स को विजय चौहान, शरद चौहान और राज चौहान मैनेज कर रहे हैं. खबरों के अनुसार विजय चौहान और उनके परिवार की नेटवर्थ करीब 8.6 अरब डॉलर है. कंपनी पारले-जी, क्रैकजैक, मोनेको और मेलोडी जैसे लोकप्रिय ब्रांड्स बनाती है.


