1500 करोड़ की संपत्ति वाला मास्टरमाइंड! NEET पेपर लीक में शिवराज मोटेगांवकर पर CBI का शिकंजा
NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में CBI जांच के दौरान महाराष्ट्र के लातूर स्थित एक कोचिंग सेंटर और बड़े नेटवर्क की भूमिका सामने आई है. एजेंसी को शक है कि छात्रों से लाखों रुपये लेकर परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र और उत्तर उपलब्ध कराए गए थे.

नई दिल्ली: NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे कई चौंकाने वाले खुलासे सामने आ रहे हैं. केंद्रीय जांच ब्यूरो को मिले सुरागों से संकेत मिले हैं कि परीक्षा का प्रश्नपत्र पिछले साल भी परीक्षा से पहले महाराष्ट्र के लातूर स्थित रेनुकाई करियर सेंटर तक पहुंच चुका था. जांच एजेंसी अब इस पूरे नेटवर्क की गहराई से पड़ताल कर रही है.
CBI की जांच में शिवराज का नाम
CBI की जांच में कोचिंग संचालक शिवराज रघुनाथ मोटेगांवकर का नाम प्रमुखता से सामने आया है. सूत्रों के अनुसार उसकी कथित संपत्ति करीब 1500 करोड़ रुपये बताई जा रही है. एजेंसी को शक है कि वह लंबे समय से संगठित तरीके से पेपर लीक रैकेट चला रहा था. बताया जा रहा है कि RCC से पढ़ने वाले कई छात्रों ने NEET 2025 में शानदार प्रदर्शन किया था. इनमें 19 छात्रों का चयन अलग-अलग AIIMS संस्थानों में हुआ, जिसमें AIIMS दिल्ली और हैदराबाद जैसे प्रतिष्ठित संस्थान भी शामिल हैं.
जांच में यह भी सामने आया है कि इस नेटवर्क के निशाने पर ऐसे छात्र और परिवार होते थे जो आर्थिक रूप से मजबूत हों और जिनके बच्चे पढ़ाई में पहले से बेहतर प्रदर्शन कर रहे हों. कथित तौर पर इन परिवारों से मोटी रकम लेकर छात्रों को खास बैच में शामिल किया जाता था. परीक्षा से पहले आखिरी 15 दिनों में उन्हें विशेष ‘वन-ऑन-वन मेंटरिंग’ दी जाती थी. आरोप है कि इसी दौरान छात्रों को लीक हुए सवाल और उनके जवाब याद करवाए जाते थे.
CBI को इस पूरे नेटवर्क से जुड़े कुछ वीडियो और डिजिटल सबूत भी मिले हैं. एजेंसी के अनुसार शिवराज मोटेगांवकर का संपर्क पुणे की ब्यूटीशियन मनीषा वाघमारे और केमिस्ट्री प्रोफेसर पीवी कुलकर्णी से था. जांच में यह भी खुलासा हुआ कि गुरुग्राम के यश यादव ने जयपुर के विकास बिवाल को पेपर उपलब्ध कराया था, जबकि यह प्रश्नपत्र उसे नासिक के शुभम खैरनार से मिला था.
हाल ही में CBI ने नागपुर में दो छात्रों के घरों पर छापेमारी कर मोबाइल, लैपटॉप और कई दस्तावेज जब्त किए. एजेंसी को शक है कि पुणे नेटवर्क के जरिए प्रति छात्र करीब 15 लाख रुपये लेकर पेपर बेचा गया था.
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने की बैठक
इस मामले के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अधिकारियों के साथ बैठक कर री-एग्जाम की तैयारियों की समीक्षा की. उन्होंने निर्देश दिए कि 21 जून को होने वाली परीक्षा पूरी तरह सुरक्षित और पारदर्शी तरीके से कराई जाए.
इस बीच शिवराज मोटेगांवकर का एक वीडियो भी वायरल हुआ है, जिसमें एक छात्रा यह दावा करती सुनाई दे रही है कि मॉक टेस्ट के सभी सवाल असली परीक्षा में आए थे. जांच एजेंसी अब नए नामों और संभावित कोचिंग माफिया की भूमिका की भी जांच कर रही है.
NEET-UG परीक्षा 3 मई को देशभर के 551 शहरों और विदेश के 14 केंद्रों पर आयोजित हुई थी. करीब 23 लाख छात्रों ने इसमें हिस्सा लिया था. गड़बड़ी की शिकायतें सामने आने के बाद 12 मई को परीक्षा रद्द कर दी गई और दोबारा परीक्षा कराने का फैसला लिया गया.


